सरकार OFS के जरिए BHEL में बेचेगी 3 फीसदी हिस्सेदारी, 254 रुपये प्रति शेयर तय किया फ्लोर प्राइस

सरकार ने 2 फीसदी इक्विटी के बराबर, 6.96 करोड़ और शेयर बेचने के लिए ओवरसब्सक्रिप्शन ऑप्शन भी रखा है. BHEL ने दिसंबर तिमाही में अपने परफॉर्मेंस में जबरदस्त बदलाव की जानकारी दी है, जिसमें बेहतर एग्जीक्यूशन और ऑपरेटिंग लेवरेज की वजह से नेट प्रॉफिट तीन गुना से ज्यादा हो गया है.

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड. Image Credit: Canva, BHEL website

सरकार भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में 3 फीसदी हिस्सेदारी, यानी 10.44 करोड़ से ज्यादा शेयर, ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेगी. PSU ने फ्लोर प्राइस 254 रुपये प्रति शेयर तय किया है़. सरकार ने 2 फीसदी इक्विटी के बराबर, 6.96 करोड़ और शेयर बेचने के लिए ओवरसब्सक्रिप्शन ऑप्शन भी रखा है. अगर इसका पूरी तरह इस्तेमाल किया जाता है, तो कुल संभावित डाइवेस्टमेंट 17.41 करोड़ शेयर या कंपनी की इक्विटी कैपिटल का 5 फीसदी हो जाएगा.

कब खुलेगा OFS?

शेयर BSE और NSE पर एक अलग, तय OFS विंडो के जरिए बेचे जाएंगे. OFS बुधवार को ट्रेडिंग के समय सुबह 9:15 बजे शुरू होगा और दोपहर 3:30 बजे बंद होगा. दिए गए फ्लोर प्राइस पर सरकार 3 फीसदी इक्विटी के डाइवेस्टमेंट पर 2,653 करोड़ रुपये जुटाएगी, जबकि ओवरसब्सक्रिप्शन ऑप्शन का इस्तेमाल करने पर यह रकम 4,422 करोड़ रुपये तक बढ़ जाएगी.

BHEL के शेयर मंगलवार को पिछली क्लोजिंग प्राइस से 1.25 रुपये या 0.46% बढ़कर 275.90 रुपये पर बंद हुए.

परफॉर्मेंस में जबरदस्त बदलाव

BHEL ने दिसंबर तिमाही में अपने परफॉर्मेंस में जबरदस्त बदलाव की जानकारी दी है, जिसमें बेहतर एग्जीक्यूशन और ऑपरेटिंग लेवरेज की वजह से नेट प्रॉफिट तीन गुना से ज्यादा हो गया है. सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी ने दिसंबर 2025 को खत्म हुई तीसरी तिमाही में 382 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट पोस्ट किया, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 125 करोड़ रुपये था, जो साल-दर-साल 206 फीसदी की बढ़ोतरी है.

ऑपरेशनल रेवेन्यू

ऑपरेशनल रेवेन्यू साल-दर-साल 16% बढ़कर 8,473 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 7,277 करोड़ रुपये था. यह बेहतर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन को दिखाता है. दूसरी इनकम मिलाकर, इस तिमाही की कुल इनकम 8,700 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 7,393 करोड़ रुपये थी.

कॉस्ट साइड पर कुल खर्च पिछले साल की इसी तिमाही के 7,224 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,188 करोड़ रुपये हो गया. मटीरियल और सर्विस की कॉस्ट बढ़कर 6,059 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एम्प्लॉई बेनिफिट खर्च थोड़ा बढ़कर 1,531 करोड़ रुपये हो गया. फाइनेंस कॉस्ट सितंबर तिमाही के 195 करोड़ रुपये से घटकर 182 करोड़ रुपये हो गई, जिससे प्रॉफिट को और सपोर्ट मिला.

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