400 फीसदी से अधिक उछला है ये शेयर, कीमत 50 रुपये से कम; जानें- कंपनी का कारोबार

TAKE Solutions ने भारत के प्रिवेंटिव हेल्थकेयर स्पेस में विस्तार करने की अपनी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी के तहत, AI-इनेबल्ड स्मार्ट डायग्नोस्टिक और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर यूनिट 'वन मिनट क्लिनिक' शुरू करने के प्लान की घोषणा की है. कंपनी चीन से पूरी तरह से इंटीग्रेटेड स्मार्ट हेल्थ यूनिट्स इंपोर्ट करने की योजना बना रही है.

मल्टीबैगर स्टॉक. Image Credit: Getty image

50 रुपये से कम कीमत वाला मल्टीबैगर स्मॉल-कैप स्टॉक TAKE Solutions मंगलवार 10 फरवरी को इंट्रा-डे डील्स में 3.5 फीसदी बढ़कर अपने 52 वीक के हाई पर पहुंच गया. भारत-US ट्रेड डील की घोषणा से मिले बुलिश सेंटीमेंट और पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों की वजह से मंगलवार ट्रेड में भारतीय स्टॉक मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 0.2 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हुई. स्टॉक 3.5 फीसदी तक बढ़कर अपने दिन के हाई 46.30 रुपये पर पहुंच गया, जो इसका 52-हफ्ते का हाई भी है. स्मॉल-कैप स्टॉक अप्रैल 2025 में अपने 52 वीक के सबसे निचले स्तर 6.70 रुपये से 591 फीसदी ऊपर चढ़ गया है.

जोरदार रिटर्न

स्टॉक ने पिछले 1 साल और पिछले 6 महीनों में मल्टीबैगर रिटर्न भी दिया है, जिसमें क्रमशः 300% और 416% की तेजी आई है. इस बीच, यह पिछले 3 महीनों में 96 फीसदी और पिछले 1 महीने में 9 फीसदी बढ़ा है.

हालिया डेवलपमेंट

TAKE Solutions ने भारत के प्रिवेंटिव हेल्थकेयर स्पेस में विस्तार करने की अपनी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी के तहत, AI-इनेबल्ड स्मार्ट डायग्नोस्टिक और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर यूनिट ‘वन मिनट क्लिनिक’ शुरू करने के प्लान की घोषणा की है. कंपनी ने SEBI के लिस्टिंग रेगुलेशन के तहत 10 फरवरी को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस डेवलपमेंट के बारे में बताया.

क्या है कंपनी का मकसद?

इस पहल का मकसद AI-ड्रिवन डायग्नोस्टिक्स और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में TAKE Solutions की पोजीशन को मजबूत करना है, साथ ही डीसेंट्रलाइज्ड हेल्थ स्क्रीनिंग और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म में स्केलेबल मौकों को खोजना है. कंपनी ने कहा कि क्लीनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके रैपिड, सेल्फ-सर्विस स्क्रीनिंग पर फोकस करेंगे.

प्रेस रिलीज के अनुसार, भारत का प्रिवेंटिव हेल्थकेयर मार्केट 2030 तक 197 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि डायग्नोस्टिक्स इंडस्ट्री की वैल्यू लगभग 13 अरब डॉलर है, जिसे बढ़ते लाइफस्टाइल से जुड़े हेल्थ रिस्क और जेब से होने वाले ज्यादा मेडिकल खर्च से सपोर्ट मिलता है.

हेल्थ यूनिट्स इंपोर्ट करने की योजना

प्रोजेक्ट के पीछे के विजन के बारे में बताते हुए, डायरेक्टर परमेश्वर धनगरे ने कहा, ‘प्लान किए गए वन मिनट क्लिनिक इनिशिएटिव के जरिए हमारा मकसद शुरुआती हेल्थ स्क्रीनिंग को ज्यादा आसान, इंटेलिजेंट और सस्ता बनाने के लिए स्केलेबल तरीके खोजना है, साथ ही डेटा-ड्रिवन और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर मॉडल की ओर बदलाव को सपोर्ट करना है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर भारत के भविष्य के हेल्थ सिस्टम के अहम हिस्सों में से एक होगा, क्योंकि स्केलेबल डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशन लंबे समय के हेल्थकेयर खर्चों को मैनेज करते हुए हेल्थ के नतीजों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.’

कंपनी चीन से पूरी तरह से इंटीग्रेटेड स्मार्ट हेल्थ यूनिट्स इंपोर्ट करने की योजना बना रही है ताकि डिप्लॉयमेंट में तेजी लाई जा सके और दुनिया भर में स्थापित प्रिवेंटिव हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी को भारत लाया जा सके. उम्मीद है कि ये कॉम्पैक्ट यूनिट्स AI-असिस्टेड वाइटल चेक, तुरंत डिजिटल हेल्थ रिपोर्ट, जल्दी रिस्क का पता लगाने और मिनटों में टेलीकंसल्टेशन के तरीके देंगी.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.