₹3500 से टूटने के बाद फिर चमकेगा GRSE शेयर? 28x रिटर्न देने वाली इस डिफेंस कंपनी के पास ₹153 अरब का काम
2018 के IPO के बाद निवेशकों को करीब 28 गुना रिटर्न देने वाला GRSE शेयर पिछले एक साल से दबाव में है और अपने ₹3,500 के ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे कारोबार कर रहा है. हालांकि, ₹153.2 अरब की मजबूत ऑर्डर बुक, कर्ज मुक्त बैलेंस शीट और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती मांग के दम पर कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी मजबूत नजर आ रही है. ऐसे में सवाल है कि क्या यह गिरावट निवेशकों के लिए नया मौका बन सकती है?

GRSE Outlook: भारतीय शेयर बाजार में रक्षा क्षेत्र के शेयरों ने पिछले कुछ सालों में निवेशकों की किस्मत बदल दी है. ऐसा ही एक नाम है गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE). 2018 में आए अपने आईपीओ के बाद से इस शेयर ने निवेशकों को लगभग 28 गुना का बंपर रिटर्न देकर देश के सबसे बड़े वेल्थ क्रिएटर्स में अपनी जगह बनाई है.
साल 2021 के अंत से शुरू हुई इस शानदार तेजी के दम पर शेयर ने साल 2024 के मध्य में ₹2,700 का स्तर छुआ. इसके बाद भारी गिरावट आई, लेकिन कंपनी ने शानदार रिकवरी दिखाते हुए साल 2025 के मध्य में ₹3,500 का नया ऑल-टाइम हाई बना दिया.
हालांकि, पिछले एक साल से इस मल्टीबैगर स्टॉक की रफ्तार पर ब्रेक लगा हुआ है. ₹3,536 के ऊंचे स्तर से फिसलकर यह शेयर ₹2,800 तक आ गया था. अब भले ही इसमें कुछ सुधार दिख रहा है, लेकिन यह अभी भी अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे कारोबार कर रहा है. ऐसे में निवेशकों के मन में बड़ा सवाल है कि GRSE का भविष्य कैसा है और इसके मौजूदा वैल्यूएशन क्या इशारा कर रहे हैं? आइए समझते हैं.
भविष्य के लिए कितनी तैयार है GRSE?
भारत की समुद्री विरासत जितनी पुरानी है, उसका भविष्य उतना ही उज्ज्वल दिख रहा है. वर्तमान में वैश्विक जहाज निर्माण (Global Shipbuilding) बाजार में भारत की हिस्सेदारी 1% से कम है, जबकि चीन (47%), दक्षिण कोरिया (25%) और जापान (18%) का इस पर दबदबा है. लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा बजट में बढ़ोतरी और सरकार के ₹697.3 अरब के मैरीटाइम रीवाइटलाइजेशन पैकेज के चलते यह तस्वीर तेजी से बदल रही है.
GRSE इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है. कंपनी ने अब तक 111 युद्धपोत डिलीवर किए हैं, जो किसी भी भारतीय शिपयार्ड में सबसे ज्यादा हैं. भविष्य की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी क्षमता को मौजूदा 28 प्लेटफॉर्म से बढ़ाकर इस साल के अंत तक 32 प्लेटफॉर्म करने जा रही है. इसके अलावा, कंपनी पश्चिम बंगाल और गुजरात में नए ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड प्लांट लगाकर अपनी क्षमता का विस्तार कर रही है.
वित्तीय मोर्चे पर दमदार प्रदर्शन
GRSE के वित्तीय नतीजे लगातार इसकी मजबूत बाजार स्थिति को दर्शाते हैं. वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कंपनी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है:
- सेल्स: 38% की बढ़त के साथ ₹70 अरब रही.
- नेट प्रॉफिट: 42% उछाल के साथ ₹7.48 अरब पर पहुंच गया.
- डिविडेंड: कंपनी के बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर ₹6.7 के अंतिम लाभांश की सिफारिश की है.
- चौथी तिमाही के नतीजे (Q4FY26): इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 29% बढ़कर ₹21.19 अरब और नेट प्रॉफिट 24% बढ़कर ₹3 अरब रहा. कंपनी का EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 16.8% हो गया.
सबसे खास बात यह है कि कंपनी के पास वर्तमान में ₹153.2 अरब की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो भविष्य में होने वाली कमाई की गारंटी देती है. साथ ही, कंपनी पूरी तरह कर्जमुक्त है.
वैल्यूएशन के मायने और आउटलुक
दलाल स्ट्रीट लगातार GRSE की ग्रोथ, बढ़ते रिटर्न रेशियो और समय पर डिलीवरी से खुश रहा है, जिसके कारण इसके वैल्यूएशन में लगातार सुधार हुआ है. कंपनी न केवल युद्धपोत बना रही है, बल्कि पश्चिम बंगाल सरकार के लिए 13 हाइब्रिड फेरी और यूरोपीय क्लाइंट्स के लिए मल्टी-पर्पज जहाजों के एक्सपोर्ट पर भी काम कर रही है. साथ ही इंजीनियरिंग और इंजन सर्विसेज में इसके डायवर्सिफिकेशन से कमाई के साधन बढ़े हैं.
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ट्रेडब्रेन की रिपोर्ट के मुताबिक, GRSE की मौजूदा ऊंची वैल्यूएशन और भविष्य की ग्रोथ पूरी तरह से सरकारी रक्षा बजट और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने पर निर्भर है. अगर सरकार के रक्षा खर्च या नीतियों में कोई बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर शेयर की चाल पर पड़ सकता है.
लॉन्ग टर्म के लिहाज से कंपनी के फंडामेंटल्स बेहद मजबूत हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में ऊंचे वैल्यूएशन के कारण शेयर में थोड़ी सुस्ती या उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. नए निवेशकों को इसमें गिरावट पर धीरे-धीरे भरोसा जताने की रणनीति अपनानी चाहिए.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.