ब्रोकर ने वसूल लिया है ज्यादा STT तो ब्याज समेत करना होगा जमा, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का बड़ा आदेश, सरकार को होगा फायदा

आयकर विभाग ने स्टॉक ब्रोकर्स को ग्राहकों से लिया गया अतिरिक्त सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT सरकार के खाते में जमा करने का निर्देश दिया है. यह आदेश वित्त वर्ष 2023-24 और उससे पहले के वर्षों के लिए है. NSE के सर्कुलर के अनुसार ब्रोकर्स को सात दिन के अंदर अतिरिक्त STT जमा करना होगा और देरी पर हर महीने एक फीसदी ब्याज भी देना होगा.

ब्रोकर्स को सात दिन के अंदर अतिरिक्त STT जमा करना होगा . Image Credit: AI

Securities Transaction Tax: शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. आयकर विभाग ने स्टॉक ब्रोकर्स को ग्राहकों से लिया गया अतिरिक्त सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) जमा करने का निर्देश दिया है. यह आदेश वित्त वर्ष 2023-24 और उससे पहले के वर्षों से जुड़ा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने भी इस बारे में सर्कुलर जारी कर ब्रोकर्स से पूरी जानकारी मांगी है. अगर किसी ब्रोकर ने ग्राहकों से ज्यादा STT लिया है और सरकार को जमा नहीं किया है तो अब उसे ब्याज के साथ जमा करना होगा. इससे निवेशकों के हितों की सुरक्षा को लेकर सरकार का सख्त रुख साफ नजर आता है.

ब्रोकर्स से मांगी गई STT की जानकारी

आयकर विभाग ने पांच मार्च को NSE को एक पत्र भेजा. इसमें बताया गया कि कुछ ब्रोकर्स और सब ब्रोकर्स ने ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा STT वसूला था. लेकिन यह रकम सरकार के खाते में जमा नहीं कराई गई. इसके बाद NSE ने सभी ब्रोकर्स को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द अतिरिक्त STT की पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं.

7 दिन के अंदर जमा करनी होगी रकम

NSE के सर्कुलर के अनुसार जिन ब्रोकर्स ने अतिरिक्त STT अपने पास रखा है उन्हें सात दिन के अंदर इसे जमा करना होगा. इसके साथ देरी की अवधि के लिए हर महीने 1 फीसदी ब्याज भी देना होगा. यह रकम पहले NSE के पास जमा होगी और उसके बाद एक्सचेंज इसे सरकार के खाते में भेजेगा.

क्या होता है STT और क्यों लगता है

STT टैक्स शेयर मार्केट में होने वाले ट्रांजेक्शन पर लगाया जाने वाला एक डायरेक्ट टैक्स है. यह टैक्स शेयर और डेरिवेटिव की खरीद या बिक्री पर लगता है. यह मायने नहीं रखता कि निवेशक को फायदा हुआ है या नुकसान. ब्रोकर्स यह टैक्स सरकार की ओर से निवेशकों से वसूलते हैं और बाद में सरकार को जमा करते हैं.

इनकम का अहम जरिया है STT

सरकार के लिए STT टैक्स रेवेन्यू का एक महत्वपूर्ण सोर्स है. वित्त वर्ष 2024 में STT से सरकार को करीब 52197 करोड़ रुपये की इनकम हुई थी. आने वाले वर्षों में इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है. सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए STT कलेक्शन का अनुमान करीब 73700 करोड़ रुपये रखा है.

STT बढ़ाने का फैसला

सरकार ने इस साल फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ाने की घोषणा भी की है. यह बदलाव एक अप्रैल से लागू होगा. फ्यूचर्स पर STT 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है. वहीं ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स 0.1 फीसदी से बढ़कर 0.15 फीसदी हो जाएगा.

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निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

आयकर विभाग का यह कदम निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि ब्रोकर्स ग्राहकों से लिया गया टैक्स सही तरीके से सरकार तक पहुंचाएं. साथ ही बाजार में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा.

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