NSE की लिस्टिंग से पहले बड़ा मुकाबला: मार्केट शेयर, मुनाफा और वैल्यूएशन में BSE या NSE कौन है महारथी?
पिछले एक साल में BSE के शेयर ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. BSE का शेयर बीते 12 महीनों में 54.31 प्रतिशत चढ़ा है, जबकि साल 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें 58.13 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. इसके मुकाबले बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स पिछले एक साल में करीब 4 प्रतिशत और इस साल अब तक करीब 8 प्रतिशत कमजोर रहा है.
NSE vs BSE : भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज National Stock Exchange (NSE) का बहुप्रतीक्षित IPO अब एक कदम और करीब पहुंचता नजर आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NSE इस सप्ताह अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर सकता है. NSE के लिस्ट होते ही निवेशकों के सामने देश के दो सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों NSE और BSE में निवेश का विकल्प होगा. ऐसे में यह समझना दिलचस्प है कि भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज NSE, देश के सबसे पुराने एक्सचेंज BSE के मुकाबले कहां खड़ा है और दोनों के बीच किसकी स्थिति ज्यादा मजबूत दिखाई देती है.
शेयर प्रदर्शन में BSE ने मारी बाजी
पिछले एक साल में BSE के शेयर ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. BSE का शेयर बीते 12 महीनों में 54.31 प्रतिशत चढ़ा है, जबकि साल 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें 58.13 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. इसके मुकाबले बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स पिछले एक साल में करीब 4 प्रतिशत और इस साल अब तक करीब 8 प्रतिशत कमजोर रहा है. वहीं NSE के अनलिस्टेड शेयर फिलहाल करीब 2,015 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं.
STT बढ़ोतरी के बाद डेरिवेटिव्स बाजार में बड़ा बदलाव
फरवरी 2026 के बजट में सरकार ने Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाने का फैसला किया था. इसके बाद पहली बार अप्रैल में BSE ने डेरिवेटिव्स कारोबार के मामले में NSE को पीछे छोड़ दिया. STT बढ़ने के बाद F&O के नॉशनल टर्नओवर में BSE की हिस्सेदारी 55.4 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि NSE की हिस्सेदारी घटकर 44.6 प्रतिशत रह गई. बजट में फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया गया था. वहीं, ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया. ऑप्शन एक्सरसाइज पर भी STT को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया. STT बढ़ोतरी से पहले BSE की हिस्सेदारी 43.6 प्रतिशत और NSE की 56.4 प्रतिशत थी.
मुनाफे के मामले में अभी भी आगे है NSE
हालांकि बाजार हिस्सेदारी में बदलाव देखने को मिला है, लेकिन मुनाफे के मोर्चे पर NSE अभी भी काफी मजबूत नजर आता है. मार्च तिमाही में NSE का नेट प्रॉफिट 19 प्रतिशत बढ़कर 2,871 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही में 2,409 करोड़ रुपये था. दूसरी तरफ BSE का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 32.5 प्रतिशत बढ़कर 797 करोड़ रुपये पहुंचा. हालांकि ग्रोथ मजबूत रही, लेकिन मुनाफे का आकार NSE की तुलना में काफी छोटा है.
एक्सपायरी डे बदलने से NSE को मिला फायदा
हाल के महीनों में एक्सपायरी शेड्यूल में बदलाव भी दोनों एक्सचेंजों के बीच प्रतिस्पर्धा का बड़ा कारण बना. निफ्टी की वीकली एक्सपायरी गुरुवार से बदलकर मंगलवार कर दी गई, जबकि Sensex की एक्सपायरी मंगलवार से गुरुवार कर दी गई. इस बदलाव के बाद NSE को रणनीतिक बढ़त मिली, क्योंकि अब उसकी एक्सपायरी BSE से 2 दिन पहले होती है. इससे ट्रेडिंग गतिविधियों में NSE को फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी है.
मार्केट कैप में कौन आगे?
BSE का खुद का मार्केट कैप करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये है. वहीं BSE पर लिस्ट कंपनियों का कुल मार्केट कैप 400 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. दूसरी ओर NSE पर लिस्ट सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 438.9 लाख करोड़ रुपये है, जो BSE के मुकाबले अधिक है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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