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BSE शेयर में बड़ी गिरावट, RBI के फैसले से बढ़ी चिंता; डेरिवेटिव कारोबार पर पड़ सकता है असर, चेक करें डिटेल्स

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से एक महत्वपूर्ण नियम को लेकर दी गई स्पष्टता के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई. इसी वजह से BSE के शेयर में कारोबार के दौरान 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ गई. सिर्फ BSE ही नहीं, बल्कि ब्रोकिंग सेक्टर की कई कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला.

BSE Image Credit: Canva, tv9

BSE Share Dip: भारतीय शेयर बाजार की प्रमुख एक्सचेंज BSE के शेयर में शुक्रवार को तेज गिरावट देखने को मिली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से एक महत्वपूर्ण नियम को लेकर दी गई स्पष्टता के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई. इसी वजह से BSE के शेयर में कारोबार के दौरान 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ गई.

सिर्फ BSE ही नहीं, बल्कि ब्रोकिंग सेक्टर की कई कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला. बाजार को डर है कि नए नियम लागू होने के बाद डेरिवेटिव ट्रेडिंग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. अब बाजार की नजर इस बात पर है कि नए नियमों का असर कंपनी की कमाई और कारोबार पर कितना पड़ता है.

क्या है RBI का नया नियम

RBI ने साफ कर दिया है कि जुलाई 2026 से प्रोपाइटरी ट्रेडिंग से जुड़े कर्ज पर 100 प्रतिशत गारंटी (Collateral) का नियम लागू होगा. इसका मतलब है कि ट्रेडिंग फर्म और ब्रोकर्स अब पहले की तरह ज्यादा उधार लेकर बड़े पैमाने पर ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे.

पहले इस नियम को अप्रैल से लागू किया जाना था, लेकिन उद्योग की मांग पर इसे जुलाई तक टाल दिया गया था. अब RBI ने साफ कर दिया है कि नियम तय समय पर लागू होगा.

BSE के शेयर पर क्यों पड़ा असर

  • इस खबर के बाद BSE का शेयर कारोबार के दौरान 5.2 प्रतिशत तक टूटकर 3,822.90 रुपये पर पहुंच गया.
  • हालांकि बाद में कुछ रिकवरी हुई और शेयर 3,880 रुपये पर बंद हुआ.
  • निवेशकों को चिंता है कि नए नियम लागू होने से डेरिवेटिव ट्रेडिंग का वॉल्यूम कम हो सकता है.
  • इससे BSE की कमाई पर असर पड़ सकता है.

डेरिवेटिव कारोबार क्यों है अहम

भारत में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) कारोबार का बड़ा हिस्सा प्रोपाइटरी ट्रेडिंग फर्मों के जरिए होता है. अनुमान है कि कुल F&O कारोबार का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ऐसे ट्रेडर्स से आता है.

ये फर्म बाजार में तरलता बनाए रखने का काम भी करती हैं. नए नियम के बाद इनके लिए कारोबार की लागत बढ़ जाएगी, जिससे ट्रेडिंग गतिविधि कम हो सकती है.

कमाई पर पड़ सकता है असर

नए नियमों के कारण डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. BSE की हाल की ग्रोथ में डेरिवेटिव कारोबार की बड़ी भूमिका रही है. अनुमान के अनुसार कंपनी की कुल राजस्व वृद्धि का 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा इसी कारोबार से आया है. ऐसे में अगर ट्रेडिंग कम होती है तो ट्रांजैक्शन फीस से होने वाली कमाई भी प्रभावित हो सकती है.

पहले से ही बढ़ रहा था दबाव

  • BSE और पूरे एक्सचेंज सेक्टर पर पहले से कुछ दूसरे नियमों का असर भी पड़ रहा है.
  • सरकार ने F&O पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाया है.
  • वहीं SEBI ने साप्ताहिक एक्सपायरी की संख्या भी कम की है.
  • अब RBI के नए नियमों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है.

आगे किन बातों पर रहेगी नजर

  • आने वाले महीनों में डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम, कंपनी की कमाई और प्रबंधन की टिप्पणियों पर नजर रखना जरूरी होगा.
  • BSE अब म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म, कमोडिटी कारोबार और डेटा सेवाओं जैसे दूसरे कारोबारों पर भी फोकस बढ़ा रही है.
  • फिलहाल निवेशक यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि जुलाई से लागू होने वाले नए नियमों का वास्तविक असर बाजार और BSE के कारोबार पर कितना पड़ता है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.