Sahara को झटका, ₹14106 करोड़ OFCD मामले में बड़ा फैसला, SAT ने SEBI की कार्रवाई को ठहराया सही

SAT (Securities Appellate Tribunal) ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) के खिलाफ SEBI की कार्रवाई को सही ठहराया है. यह मामला हजारों करोड़ रुपये जुटाने से जुड़ा है, जिसमें कंपनी पर आरोप है कि उसने नियमों का पालन किए बिना निवेशकों से पैसा जुटाया था.

Sahara Image Credit: Canva/Money9 live

Sahara Scam: सहारा ग्रुप से जुड़ा एक बड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी SAT (Securities Appellate Tribunal) ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (SICCL) के खिलाफ SEBI की कार्रवाई को सही ठहराया है. यह मामला हजारों करोड़ रुपये जुटाने से जुड़ा है, जिसमें कंपनी पर आरोप है कि उसने नियमों का पालन किए बिना निवेशकों से पैसा जुटाया था.

यह पूरा विवाद ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर यानी OFCD के जरिए जुटाए गए फंड से जुड़ा है. सेबी का कहना है कि कंपनी ने इन डिबेंचरों के माध्यम से लाखों निवेशकों से पैसा लिया, जिसे निजी निवेश बताकर जारी किया गया था. हालांकि नियामक का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर पैसा जुटाना असल में एक पब्लिक इश्यू के बराबर था और इसके लिए जरूरी नियमों का पालन नहीं किया गया.

SAT ने सेबी की कार्रवाई को ठहराया सही

सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ SEBI की कार्रवाई को सही ठहराया है. ट्रिब्यूनल ने कंपनी और उसके निदेशकों द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया. यह मामला SEBI के अक्टूबर 2018 के उस आदेश से जुड़ा है जिसमें कंपनी को निवेशकों से जुटाई गई रकम वापस करने का निर्देश दिया गया था. इसके साथ ही कंपनी को अपनी संपत्ति और इन्वेंट्री का डिटेल देने के लिए भी कहा गया था.

14106 करोड़ रुपये जुटाने का मामला

ट्रिब्यूनल के अनुसार, कंपनी ने 1998 से 2008 के बीच OFCD के जरिए करीब 14106 करोड़ रुपये जुटाए थे. यह पैसा करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से लिया गया था. SAT ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर लाखों निवेशकों से पैसा जुटाना निजी निवेश नहीं माना जा सकता. इसलिए यह मामला सेबी के नियामक अधिकार क्षेत्र में आता है.

ट्रिब्यूनल ने कहा कि कंपनियों से जुड़े कानून में 2000 में हुए संशोधन के बाद यदि किसी निवेश योजना को 50 या उससे अधिक लोगों को ऑफर किया जाता है तो उसे पब्लिक इश्यू माना जाएगा. ऐसे मामलों में कंपनियों को लिस्टिंग और खुलासे से जुड़े सभी नियमों का पालन करना जरूरी होता है.

पैसे लौटाने के दावे को भी खारिज किया

सहारा समूह ने दावा किया था कि अधिकांश निवेशकों का पैसा वापस कर दिया गया है. लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया. SAT ने कहा कि कंपनी इसके समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी. केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाण पत्र यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि करीब दो करोड़ निवेशकों को पैसा लौटा दिया गया. हालांकि ट्रिब्यूनल ने कंपनी के कुछ कर्मचारियों को राहत दी है. SAT ने कहा कि कंपनी के कुछ मैनेजर और कंपनी सेक्रेटरी केवल कर्मचारी थे, इसलिए उन्हें कंपनी के फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.