इंडोनेशिया से घट सकता है तेल इंपोर्ट, Adani Wilmar, HUL समेत कई FMCG कंपनियों पर बढ़ेगा संकट…शेयरों पर रखें नजर
इंडोनेशिया के B50 बायोडीजल प्रोग्राम और पाम ऑयल एक्सपोर्ट पर संभावित सख्ती का असर भारतीय एफएमसीजी और खाद्य तेल कंपनियों पर दिख सकता है. Adani Wilmar, Patanjali Foods, Marico, HUL, Dabur India और Emami जैसी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है. वहीं Gokul Agro Resources और Kriti Nutrients जैसी कंपनियों को वैकल्पिक खाद्य तेलों की बढ़ती मांग का फायदा मिल सकता है.
Indonesia Palm Oil Export: इंडोनेशिया की ओर से पाम ऑयल एक्सपोर्ट पर संभावित सख्ती का असर अब भारतीय एफएमसीजी और खाद्य तेल कंपनियों पर गहराता दिख रहा है. दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक देश इंडोनेशिया अपने बी50 बायोडीजल प्रोग्राम को लागू करने की तैयारी कर रहा है. इस नई नीति के तहत डीजल में 50 फीसदी पाम ऑयल ब्लेंडिंग अनिवार्य की जा सकती है. इससे इंडोनेशिया की घरेलू खपत बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की सप्लाई घट सकती है. इसका सीधा असर भारत पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. भारत हर साल लगभग 50 लाख टन क्रूड पाम ऑयल इंडोनेशिया से खरीदता है. ऐसे में अगर एक्सपोर्ट कम होता है, तो घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और कई बड़ी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है.
Adani Wilmar पर सबसे ज्यादा दबाव संभव
Adani Wilmar भारत की सबसे बड़ी खाद्य तेल कंपनियों में शामिल है. कंपनी का फॉर्च्यून ब्रांड देशभर में काफी लोकप्रिय है. कंपनी बड़े स्तर पर पाम ऑयल रिफाइनिंग कारोबार करती है. ऐसे में कच्चे पाम ऑयल की कीमत बढ़ने का सबसे तेज असर इसी कंपनी पर पड़ सकता है. कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मार्जिन मैनेजमेंट की हो सकती है.
जब कच्चे माल की कीमत अचानक बढ़ती है, तो कंपनियां तुरंत उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाल पातीं. इससे कुछ समय तक मुनाफे पर दबाव बना रहता है. अगर इंडोनेशिया लंबे समय तक एक्सपोर्ट सीमित करता है, तो Adani Wilmar को कीमतें बढ़ाने या मार्जिन घटाने में से किसी एक रास्ते का चयन करना पड़ सकता है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 1.56 फीसदी गिरकर 195.14 रुपये पर पहुंच गया.
Patanjali Foods को भी लागत बढ़ने का खतरा
Patanjali Foods भी खाद्य तेल कारोबार में बड़ा नाम बन चुकी है. कंपनी पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल दोनों से जुड़ा रिफाइनिंग बिजनेस करती है. ऐसे में पाम ऑयल महंगा होने से इसकी इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है. हालांकि कंपनी के पास विविध प्रोडक्ट पोर्टफोलियो होने का फायदा जरूर है, लेकिन खाद्य तेल कारोबार में प्रतिस्पर्धा काफी अधिक है. इसलिए कीमत बढ़ाने का असर डिमांड पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि बढ़ती लागत का असर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दिख सकता है. कंपनी का शेयर शुक्रवार को 0.04 फीसदी बढ़कर 463.45 रुपये पर पहुंच गया.
Marico के पर्सनल केयर बिजनेस पर असर
Marico सीधे खाद्य तेल कंपनी नहीं है, लेकिन उसके कई प्रोडक्ट्स में पाम ऑयल आधारित डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल होता है. कंपनी के हेयर ऑयल और वैल्यू एडेड पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में यह महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है. अगर पाम ऑयल महंगा होता है, तो कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ सकती है. इससे कंपनी के एबिट्डा मार्जिन पर दबाव बन सकता है. हालांकि Marico प्रीमियम प्रोडक्ट्स सेगमेंट में मजबूत पकड़ रखती है, इसलिए वह कुछ हद तक कीमत बढ़ाने में सक्षम हो सकती है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.89 फीसदी बढ़कर 824.45 रुपये पर पहुंच गया.
Hindustan Unilever के साबुन और स्किनकेयर कारोबार पर नजर
Hindustan Unilever भारत की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनियों में से एक है. कंपनी अपने साबुन, डिटर्जेंट, स्किनकेयर और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में पाम आधारित इनपुट्स का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करती है. अगर पाम ऑयल की कीमतों में तेजी आती है, तो इसका असर कंपनी की प्रोडक्शन कॉस्ट पर पड़ सकता है. हालांकि कंपनी के पास मजबूत ब्रांड और प्राइसिंग पावर है, लेकिन प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी धीरे-धीरे ही की जा सकती है. इससे कुछ समय तक मार्जिन दबाव में रह सकते हैं.
Godrej Consumer Products, Dabur India और Emami पर भी असर
Godrej Consumer Products, Dabur India और Emami जैसी कंपनियों पर भी अप्रत्यक्ष असर देखने को मिल सकता है. इन कंपनियों के कई उत्पादों में पाम आधारित डेरिवेटिव्स और पैकेजिंग इनपुट्स का इस्तेमाल होता है. कच्चे माल की लागत बढ़ने से इनके खर्च बढ़ सकते हैं. एफएमसीजी सेक्टर में आमतौर पर कंपनियां कीमतें धीरे-धीरे बढ़ाती हैं ताकि उपभोक्ता मांग प्रभावित न हो. ऐसे में कमोडिटी इन्फ्लेशन का असर शुरुआती तिमाहियों में सीधे मुनाफे पर दिखाई देता है.
किन कंपनियों को हो सकता है फायदा
जहां एफएमसीजी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं घरेलू ऑयलसीड प्रोसेसर्स को फायदा मिल सकता है. पाम ऑयल महंगा होने पर बाजार में सोयाबीन ऑयल, सनफ्लावर ऑयल और मस्टर्ड ऑयल की मांग बढ़ सकती है. Gokul Agro Resources को वैकल्पिक खाद्य तेलों की बढ़ती मांग का फायदा मिल सकता है. वहीं Kriti Nutrients को सोयाबीन ऑयल की बढ़ती कीमतों और मांग से लाभ हो सकता है.
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