रेलवे बूम में किस शेयर पर लगाएं दांव? Jupiter Wagons या Titagarh Rail, जानिए किस कंपनी में दिख रहा ज्यादा दम
सरकार लगातार रेलवे नेटवर्क, माल ढुलाई और यात्री सेवाओं पर बड़ा निवेश कर रही है. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शुरू हो रहे हैं, नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं और रेलवे कोच व वैगनों की मांग बढ़ रही है. ऐसे में रेलवे से जुड़ी कंपनियां निवेशकों के रडार पर हैं. इनमें Jupiter Wagons और Titagarh Rail Systems दो प्रमुख नाम हैं.

Jupiter Wagons vs Titagarh Rail: भारत में रेलवे सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. सरकार लगातार रेलवे नेटवर्क, माल ढुलाई और यात्री सेवाओं पर बड़ा निवेश कर रही है. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शुरू हो रहे हैं, नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं और रेलवे कोच व वैगनों की मांग बढ़ रही है. ऐसे में रेलवे से जुड़ी कंपनियां निवेशकों के रडार पर हैं. इनमें Jupiter Wagons और Titagarh Rail Systems दो प्रमुख नाम हैं. दोनों कंपनियां रेलवे सेक्टर में काम करती हैं, लेकिन उनका कारोबार और ग्रोथ का तरीका अलग है.
FY26 के नतीजों ने भी दोनों कंपनियों के बीच यह अंतर साफ कर दिया है. एक कंपनी माल ढुलाई से जुड़े कारोबार पर ज्यादा निर्भर है, जबकि दूसरी यात्री ट्रेनों, मेट्रो और रेलवे के कई क्षेत्रों में काम कर रही है. ऐसे में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि रेलवे सेक्टर की तेजी का ज्यादा फायदा किस कंपनी को मिल सकता है.
FY26 में कैसा रहा प्रदर्शन
Jupiter Wagons की FY26 में कुल आय 2,916 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल के 3,963 करोड़ रुपये से कम रही. कंपनी का मुनाफा भी 56 प्रतिशत गिरकर 166 करोड़ रुपये रह गया. कंपनी का कहना है कि पहियों की कमी और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों का असर कारोबार पर पड़ा. कंपनी के पास 4,675 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, जिससे आने वाले समय की कमाई का अनुमान मिलता है.
वहीं Titagarh Rail Systems की इनकम FY26 में 3,185.82 करोड़ रुपये रही. कंपनी के यात्री रेल कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली. मेट्रो और वंदे भारत परियोजनाओं की वजह से इस क्षेत्र की आय बढ़ी. कंपनी का ऑर्डर बुक लगभग 14,240 करोड़ रुपये है, जो Joint projects को जोड़ने पर 27,540 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है.
दोनों कंपनियों के कारोबार में बड़ा अंतर
Jupiter Wagons का मुख्य फोकस माल ढुलाई से जुड़े वैगन, व्हीलसेट, ब्रेकिंग सिस्टम और कंटेनर कारोबार पर है. कंपनी रेलवे माल परिवहन से जुड़ी जरूरतों को पूरा करती है. इसके अलावा कंपनी बैटरी स्टोरेज और वैगन लीजिंग जैसे नए क्षेत्रों में भी कदम बढ़ा रही है.
दूसरी ओर Titagarh Rail Systems का बड़ा फोकस यात्री रेल कारोबार पर है. कंपनी मेट्रो कोच, वंदे भारत ट्रेन, रेल व्हील और अन्य रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. FY26 में कंपनी ने 64 मेट्रो कोच की डिलीवरी की, जो पिछले साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा है.
FY27 में कहां दिख रहा मौका
Jupiter Wagons को उम्मीद है कि माल ढुलाई वाले वैगनों की मांग बढ़ने और नई रेल व्हील फैक्ट्री शुरू होने से कारोबार को फायदा मिलेगा. वहीं Titagarh Rail Systems को मेट्रो कोच, वंदे भारत परियोजनाओं और यात्री रेल कारोबार से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है. कंपनी FY27 में 200 से ज्यादा मेट्रो कोच की डिलीवरी का लक्ष्य लेकर चल रही है.
निवेशकों के लिए क्या है संदेश
अगर कोई निवेशक रेलवे के माल ढुलाई कारोबार पर दांव लगाना चाहता है, तो Jupiter Wagons एक सीधा विकल्प माना जा सकता है. वहीं जो निवेशक रेलवे के कई क्षेत्रों जैसे मेट्रो, वंदे भारत, रेल व्हील और यात्री ट्रेनों की बढ़ती मांग का फायदा उठाना चाहते हैं, उनके लिए Titagarh Rail Systems ज्यादा विविध कारोबार वाला विकल्प हो सकता है. यानी एक तरफ माल ढुलाई की कहानी है, तो दूसरी तरफ पूरे रेलवे विकास की कहानी. निवेशकों का चुनाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वे रेलवे सेक्टर के किस हिस्से में ज्यादा संभावना देखते हैं.
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