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7 दिन में 28% उछला रिलायंस इंफ्रा शेयर, अब सेबी के सामने रखी बड़ी मांग; सोमवार को रहेगी बाजार की नजर

अनिल अंबानी की कंपनी Reliance Infrastructure के शेयरों में हाल के दिनों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है और स्टॉक महज सात कारोबारी दिनों में करीब 28% चढ़ चुका है. इस बीच कंपनी ने SEBI, NSE और BSE से अपील की है कि उसके शेयरों पर लागू ASM फ्रेमवर्क और साप्ताहिक ट्रेडिंग प्रतिबंधों की समीक्षा की जाए.

रिलायंस इंफ्रा का शेयर में जबरदस्‍त उछाल Image Credit: PTI/freepik

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के शेयरों में पिछले कुछ दिनों से बंपर तेजी देखने को मिल रही है. बीते एक हफ्ते से स्टॉक लगातार अपर सर्किट छू रहा है और महज सात दिनों में निवेशकों को करीब 28 फीसदी का दमदार रिटर्न दे चुका है. हालांकि, लॉन्ग टर्म के लिहाज से देखें तो यह शेयर अपने ऊपरी स्तरों से 79 फीसदी तक टूट चुका है. शानदार रिकवरी के बीच अब इस स्टॉक पर सोमवार को बाजार की खास नजर रहेगी, क्योंकि कंपनी ने ट्रेडिंग नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है.

दरअसल, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने रविवार को बताया कि उसने बाजार नियामक SEBI और दोनों प्रमुख एक्सचेंजों (NSE व BSE) से संपर्क किया है. कंपनी ने उस निगरानी ढांचे (ASM Framework) की समीक्षा करने की मांग की है, जिसके तहत उसके शेयरों में हफ्ते में सिर्फ एक ही दिन ट्रेडिंग की इजाजत मिलती है.

7 लाख से ज्यादा छोटे निवेशकों पर असर

कंपनी का कहना है कि दिवाला प्रक्रिया (Insolvency) से जुड़े इस कड़े नियम के कारण उसके 7 लाख से अधिक पब्लिक शेयरधारकों पर बुरा असर पड़ रहा है. मौजूदा नियमों के मुताबिक, रिलायंस इंफ्रा के शेयरों में हफ्ते में सिर्फ एक बार, वह भी महज 5 फीसदी के सीमित प्राइस बैंड के भीतर ट्रेडिंग होती है.

कंपनी के मुताबिक, इस पाबंदी की वजह से शेयरों के भाव में होने वाला उतार-चढ़ाव पूरी तरह से मैकेनिकल हो जाता है. जब शेयर में लोअर सर्किट का दौर चलता है, तो निवेशक चाहकर भी अपनी होल्डिंग बेचकर बाहर नहीं निकल पाते और हर हफ्ते उनकी संपत्ति का मूल्य घटता जाता है.

कोर्ट से राहत, फिर भी ट्रेडिंग पर पाबंदी क्यों?

रिलायंस इंफ्रा ने एक मजबूत दलील देते हुए कहा कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के आदेश पर पहले ही रोक लगा दी है.

कंपनी का कामकाज किसी बाहरी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल के हाथ में नहीं है, बल्कि इसका संचालन पहले की तरह बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ही संभाल रहे हैं. इसके बावजूद कंपनी पर यह पाबंदी लागू है, जो कि छोटे निवेशकों के हित में नहीं है.

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कंपनी ने रेगुलेटर्स के सामने रखा ये विकल्प

बाजार में निष्पक्ष तरीके से शेयरों की कीमत तय हो सके, इसके लिए रिलायंस इंफ्रा ने SEBI और एक्सचेंजों के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है. कंपनी ने कहा है कि 100% मार्जिन और एडिशनल सर्विलांस डिपॉजिट (ASD) जैसे सुरक्षा नियम भले ही लागू रहें, लेकिन हफ्ते में सिर्फ एक दिन ट्रेडिंग कराने के बजाय ‘पीरियोडिक कॉल-ऑक्शन’ या ‘वाइडर प्राइस बैंड’ जैसे विकल्प दिए जाएं, ताकि निवेशक सामान्य रूप से खरीद-बिक्री कर सकें.

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पावर, रोड और मेट्रो रेल जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) के जरिए प्रोजेक्ट्स डेवलप करने का काम करती है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.