शेयर मार्केट में गिरावट से घबराएं नहीं, निवेशक अपनाएं ये तरीका; एक्सपर्ट ने बताया सही फॉर्मूला
शेयर मार्केट में गिरावट और उतार- चढाव के बीच निवेशकों के लिए सही रणनीति अपनाना जरूरी है. ICICI Prudential AMC के CIO संकरण नरेन ने निवेशकों को एसेट एलोकेशन, कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टिंग और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की सलाह दी है. उनके मुताबिक, निवेशकों को केवल हाल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर ध्यान देने के बजाय कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में भी रिसर्च के बाद अवसर तलाशने चाहिए.
Highlights
- मार्केट में गिरावट के बीच ICICI Prudential AMC के CIO संकरण नरेन ने बताई निवेश की रणनीति.
- निवेशक एसेट एलोकेशन के जरिए अलग-अलग विकल्पों में बांटें अपना पैसा.
- कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में रिसर्च के बाद तलाशें निवेश के अवसर.
शेयर मार्केट में लगातार उतार-चढ़ाव से परेशान हैं और समझ नहीं आ रहा कि पैसा कहां लगाएं? कभी मार्केट में गिरावट निवेशकों की चिंता बढ़ा देती है, तो कभी तेजी देखकर ज्यादा रिटर्न कमाने की उम्मीद जागने लगती है. ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या पूरा पैसा शेयर मार्केट में लगाना सही है या निवेश को अलग-अलग विकल्पों में बांटना चाहिए.
ICICI Prudential AMC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संकरण नरेन का मानना है कि मौजूदा मार्केट में निवेशकों को तीन बातों पर ध्यान देना चाहिए. इनमें एसेट एलोकेशन, मार्केट के विपरीत अवसर तलाशना और लंबे समय तक निवेश बनाए रखना शामिल है. आइए समझते हैं कि इन तीन सिद्धांतों को अपनाकर आप अपने निवेश की रणनीति कैसे बेहतर बना सकते हैं.
क्या पूरा पैसा शेयर मार्केट में लगाए
शेयर मार्केट लंबे समय में पैसा बनाने का एक अहम जरिया हो सकता है, लेकिन इसमें लगातार तेजी बनी रहे, यह जरूरी नहीं है. कई बार मार्केट लंबे समय तक दबाव में रह सकता है. ऐसे में अगर आपका पूरा निवेश सिर्फ इक्विटी में है, तो मार्केट की गिरावट का असर आपके पोर्टफोलियो पर ज्यादा हो सकता है.
संकरण नरेन के मुताबिक, निवेशकों को केवल इक्विटी फंड पर निर्भर रहने के बजाय एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए. इसका मतलब है कि अपनी जरूरत और रिस्क उठाने की क्षमता के हिसाब से इक्विटी, डेट और दूसरे एसेट क्लास में निवेश बांटना चाहिए.
एसेट एलोकेशन से कैसे मिलेगी मदद
एसेट एलोकेशन का मतलब है अपने निवेश को अलग-अलग एसेट क्लास में बांटना. उदाहरण के लिए, कोई निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से शेयर मार्केट, डेट फंड और दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगा सकता है. इसका उद्देश्य किसी एक एसेट क्लास पर पूरी तरह निर्भरता कम करना है.
जब शेयर मार्केट में गिरावट आती है, तो पोर्टफोलियो के दूसरे हिस्से कुल नुकसान के असर को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, अलग अलग निवेश विकल्पों में जोखिम बना रहता है और डाइवर्सिफिकेशन नुकसान से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता. हाइब्रिड फंड और एसेट एलोकेशन आधारित रणनीतियां भी निवेश में डॉयवर्सिफिकेशन लाने का एक विकल्प हो सकती हैं.
गिरावट के दौरान कहां निवेश का मौका
मार्केट में गिरावट के दौरान कई शेयर और सेक्टर कमजोर प्रदर्शन करते हैं. लेकिन हर गिरावट वाले शेयर में निवेश का मौका हो, यह जरूरी नहीं है. संकरण नरेन के मुताबिक, निवेशकों को हाल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों के अलावा उन कंपनियों और सेक्टरों पर भी नजर रखनी चाहिए, जिनका प्रदर्शन कुछ समय से कमजोर रहा है.
इसे कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टिंग कहा जाता है. इस रणनीति में उन निवेश विकल्पों की तलाश की जाती है, जिनकी कीमत या मार्केट में स्थिति उनकी लंबी अवधि की संभावनाओं को पूरी तरह नहीं दिखा रही हो. इसके लिए कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है.
SIP बंद करें या निवेश जारी रखें
मार्केट में गिरावट के दौरान निवेशकों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या उन्हें अपनी SIP रोक देनी चाहिए या निवेश जारी रखना चाहिए. संकरण नरेन के मुताबिक, निवेशकों को मार्केट की छोटी अवधि की चाल देखकर अपनी निवेश योजना से बाहर नहीं निकलना चाहिए. मार्केट में तेजी और गिरावट उसके सामान्य चक्र का हिस्सा हैं.
कई बार गिरावट के बाद मार्केट में सुधार भी आता है, लेकिन इसकी डेडलाइन का अनुमान लगाना आसान नहीं है. गिरावट के दौरान घबराकर निवेश बेचने से संभावित रिकवरी का फायदा छूट सकता है. हालांकि, निवेश जारी रखने का फैसला आपके वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और रिस्क उठाने की क्षमता के अनुरूप होना चाहिए.
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SIF में निवेश से पहले क्या समझें
निवेशकों के पास कॉन्ट्रेरियन फंड और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड यानी SIF जैसे विकल्प भी हैं. कॉन्ट्रेरियन फंड ऐसी कंपनियों या सेक्टरों में अवसर तलाशते हैं, जिनका प्रदर्शन हाल में कमजोर रहा हो, लेकिन जिनमें आगे सुधार की संभावना दिखाई देती हो. वहीं SIF के तहत फंड मैनेजरों को अलग तरह की निवेश रणनीतियां अपनाने की अधिक लचीलापन मिलता है.
डिस्क्लेमर: मनी9लाइव कभी किसी शेयर, आईपीओ या म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है, ये खबर केवल जानकारी के लिए है.
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