चंद्रशेखरन ने 10 साल बाद छोड़ी टाटा की कमान, जानें उनके दौर में कहां से कहां पहुंचा ग्रुप

Tata Sons की कमान संभालने के बाद एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दे दिया है. वह फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे. उनके कार्यकाल में Tata Group का राजस्व 7.89 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया.

एन चंद्रशेखरन

Highlights

  • 10 साल बाद Tata Sons की कमान से हटे चंद्रशेखरन.
  • उनके कार्यकाल में Tata Group का राजस्व 7.89 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हुआ.
  • चंद्रशेखरन के दौर में Tata Group ने Air India, Semiconductor, Electronics, Batteries और Digital कारोबार जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया.

N Chandrasekaran Resignation: Tata Group के लिए बुधवार को बड़ा नेतृत्व बदलाव हुआ. करीब एक दशक तक समूह की कमान संभालने वाले एन चंद्रशेखरन ने Tata Sons के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे और 20 फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे. इसके बाद वह दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे. उन्होंने बोर्ड से जल्द से जल्द अपना उत्तराधिकारी चुनने को कहा है.

चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब Tata Group सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमानन, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रहा है. उनके करीब 10 साल के कार्यकाल में समूह का आकार काफी बढ़ा. समूह के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 में 7.89 लाख करोड़ रुपये रहा कुल रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया.

2017 में संभाली थी टाटा की कमान

63 वर्षीय चंद्रशेखरन ने जनवरी 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था. वह Tata Group के करीब 150 साल के इतिहास में पहले गैर-पारसी चेयरमैन थे. उन्हें दिवंगत रतन टाटा ने खुद इस पद के लिए चुना था. जब उन्होंने टाटा की कमान संभाली थी, तब समूह मुश्किल दौर से गुजर रहा था. साइरस मिस्त्री को अचानक हटाए जाने के बाद Tata Group में नेतृत्व संकट और भरोसे की कमी का दौर था. इसके बाद मिस्त्री और Tata Group के बीच लंबे समय तक कानूनी लड़ाई भी चली.

10 साल में कितना बदला Tata Group?

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में Tata Group का कारोबार काफी तेजी से बढ़ा. समूह के आंकड़ों के मुताबिक:

  • वित्त वर्ष 2019-20 में कुल रेवेन्यू 7.89 लाख करोड़ रुपये था.
  • वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रेवेन्यू बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया.
  • कर चुकाने के बाद मुनाफा 32,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गया.
  • Tata कंपनियों का कुल मार्केट कैप वित्त वर्ष 2019-20 के 9.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24.39 लाख करोड़ रुपये हो गया.
  • वित्त वर्ष 2024-25 में यह मार्केट कैप 27.85 लाख करोड़ रुपये था.

Air India से Semiconductor तक बड़ा विस्तार

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में Tata Group ने कई नए क्षेत्रों में कदम बढ़ाया. समूह विमानन कारोबार में वापस आया और Air India का अधिग्रहण किया. इसके अलावा समूह ने Semiconductors, Electronics Manufacturing और Batteries जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया. Digital Businesses और Electric Vehicles पर भी फोकस बढ़ाया गया.

इन नए कारोबारों में बड़े निवेश की जरूरत पड़ी. इसी वजह से नए कारोबारों के प्रदर्शन और उनमें लगने वाली पूंजी को लेकर Tata Trusts के भीतर भी मतभेद सामने आए.

Tata Steel से लेकर BigBasket तक बड़े सौदे

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में Tata Group ने कई बड़े सौदे किए. मई 2018 में Tata Steel ने दिवालिया हो चुकी Bhushan Steel को 35,200 करोड़ रुपये में खरीदा. यह देश के बड़े कॉरपोरेट अधिग्रहणों में से एक था. इसके बाद मई 2021 में Tata Group ने BigBasket को 9,500 करोड़ रुपये में खरीदा. कंपनी का वित्त वर्ष 2024-25 का राजस्व करीब 9,900 करोड़ रुपये रहा, जबकि उसका घाटा बढ़कर करीब 2,000 करोड़ रुपये हो गया.

हाल की एक बोर्ड बैठक में Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने BigBasket और Air India के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी. Air India को एक साल पहले हुए घातक विमान हादसे के बाद भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और इसका अनुमानित सालाना घाटा 3 अरब डॉलर बताया गया.

Air India की वापसी को माना जाता है बड़ी उपलब्धि

चंद्रशेखरन के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में अक्टूबर 2021 में Tata Group का Air India के लिए सफल बोली लगाना भी शामिल है. इस सौदे के साथ टाटा समूह को वह एयरलाइन वापस मिली, जिसकी स्थापना कभी समूह ने की थी और बाद में उसे सरकार को सौंप दिया गया था.

इसके अलावा चंद्रशेखरन के कार्यकाल में Tata Group ने घाटे में चल रहे अपने मोबाइल कारोबार Tata Teleservices को Airtel को बेचने की प्रक्रिया भी पूरी की.

यूरोप में Tata Steel का सौदा नहीं हो सका

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में कुछ ऐसे मामले भी रहे, जिन्हें समूह के लिए झटका माना गया. इनमें Tata Steel के यूरोपीय कारोबार को ThyssenKrupp को बेचने का सौदा पूरा नहीं होना शामिल है. यानी उनके कार्यकाल में Tata Group ने कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया, लेकिन कुछ बड़े कारोबारों में चुनौतियां भी बनी रहीं.

काम के अलावा फोटोग्राफी और मैराथन का शौक

चंद्रशेखरन ने अपना पूरा पेशेवर जीवन Tata Group के साथ बिताया है. वह मूल रूप से तमिलनाडु से हैं और अपनी पत्नी ललिता के साथ मुंबई में रहते हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें फोटोग्राफी और संगीत का शौक है. वह मैराथन रनर भी हैं और दुनिया के कई बड़े मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं.

TCS से शुरू हुआ था सफर

चंद्रशेखरन ने 1987 में TCS में इंटर्न प्रोग्रामर के तौर पर काम शुरू किया था. इसके बाद वह लगातार आगे बढ़ते हुए कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने. TCS में सफलता के बाद उन्हें 2016 में Tata Sons के बोर्ड में शामिल किया गया. इसके एक साल बाद जनवरी 2017 में वह Tata Sons के चेयरमैन बने और अगले महीने उन्होंने आधिकारिक तौर पर पद संभाला.

6 महीने से अटका था दोबारा नियुक्ति का मामला

चंद्रशेखरन ने Tata Sons के बोर्ड को अपने फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि Tata Trusts, नामांकन समिति और बोर्ड ने उन्हें एक और पांच साल का कार्यकाल देने की सर्वसम्मति से सिफारिश की थी. हालांकि, फरवरी में बोर्ड के एक सदस्य के विरोध के बाद यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका. इसी वजह से उन्होंने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करने का फैसला किया और बोर्ड से जल्द नया चेयरमैन चुनने को कहा.

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