इंटर्न से टाटा संस के चेयरमैन तक पहुंचे थे चंद्रशेखरन, इस्तीफे की चिट्ठी में खोला राज, कहा- एक सदस्य ने नहीं किया सपोर्ट
एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है. करीब 6 महीने तक इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं होने के बाद उन्होंने फरवरी 2027 में कार्यकाल खत्म होने पर पुनर्नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करने का निर्णय लिया. सरकारी स्कूल से पढ़ाई और टीसीएस में इंटर्नशिप से शुरू हुआ उनका सफर टाटा संस के चेयरमैन पद तक पहुंचा.
Highlights
- एन चंद्रशेखरन ने Tata Sons के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है.
- फरवरी 2027 में कार्यकाल खत्म होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेने का फैसला.
- टीसीएस में इंटर्नशिप से शुरू हुआ सफर टाटा संस के चेयरमैन पद तक पहुंचा सफर.
N Chandrasekaran: टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफे के साथ टाटा संस में अपने दूसरे कार्यकाल को लेकर चल रही खींचतान पर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है. चंद्रशेखरन ने बताया कि उनके अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश सर्वसम्मति से की गई थी, लेकिन 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड में प्रस्ताव रखे जाने के बाद एक बोर्ड सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया. उन्होंने इस्तीफे के बयान में उस बोर्ड सदस्य का नाम नहीं बताया. चंद्रशेखरन ने कहा कि सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण उन्होंने उस समय इस फैसले को आगे बढ़ाने का निर्णय टाल दिया था.
20 फरवरी 2027 को खत्म होगा मौजूदा कार्यकाल
चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होगा. उन्होंने बोर्ड से जल्द नए उत्तराधिकारी का फैसला करने का अनुरोध किया है, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो सके.
चंद्रशेखरन ने क्या कहा
चिट्ठी में लिखा कि उन्होंने टाटा ग्रुप में अपने पेशेवर जीवन के 40 वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस प्रतिष्ठित संस्था में योगदान देने का अवसर मिलने के लिए उन्होंने आभार जताया. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए बड़ा सम्मान और गहन जिम्मेदारी रहा है.
टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके अगले कार्यकाल को 5 वर्ष के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था और इसकी सिफारिश की थी. इस प्रस्ताव को टाटा संस नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड द्वारा दर्ज और अनुमोदित किया गया था.
इसके बाद यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड में प्रस्तुत किया गया. हालांकि, एक बोर्ड सदस्य के असहमति जताने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका. सर्वसम्मति से समर्थन नहीं मिलने के कारण चंद्रशेखरन ने उस समय इस निर्णय को स्थगित करने का विकल्प चुना.
उन्होंने आगे कहा कि उस बोर्ड बैठक को 6 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है. टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई रणनीतिक परियोजनाएं एक्जीक्यूशन के महत्वपूर्ण चरण में हैं. ऐसे में फरवरी 2027 के बाद ग्रुप का नेतृत्व करने के लिए स्पष्टता होना जरूरी है. यह स्पष्टता कर्मचारियों, निवेशकों, साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है.
सरकारी स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई, फिर टीसीएस में इंटर्नशिप
एन. चंद्रशेखरन की कहानी भी काफी दिलचस्प है. उनका जन्म 2 जून 1963 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के एक छोटे से कस्बे मोहनूर में एक किसान परिवार में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल में हुई. परिवार की उम्मीद थी कि पढ़ाई के बाद वह खेती संभालेंगे और कुछ समय के लिए वह वापस घर भी लौटे थे.
इसके बाद उन्होंने कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड साइंसेज में बैचलर डिग्री हासिल की. इसके बाद तिरुचिरापल्ली के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशंस में मास्टर डिग्री पूरी की. इसी दौरान अंतिम सेमेस्टर में एक कैंपस इंटर्नशिप ने उनके करियर की दिशा बदल दी.
इंटर्नशिप से शुरू हुआ टाटा ग्रुप का सफर
चंद्रशेखरन ने अपनी इंटर्नशिप टीसीएस में की थी. उस समय टीसीएस में करीब 500 कर्मचारी थे और कंपनी आज की तरह विशाल आईटी कंपनी नहीं बनी थी. इंटर्नशिप शुरू होने के करीब 2 महीने बाद ही टीसीएस ने उन्हें फुल-टाइम इंजीनियर की नौकरी ऑफर कर दी. इसके बाद 1987 में उन्होंने टीसीएस में औपचारिक रूप से काम शुरू किया. इसके बाद चंद्रशेखरन ने टीसीएस में टेक्नोलॉजी और नेतृत्व से जुड़े अलग-अलग पदों पर काम किया. 2007 में वह कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बने और इसके 2 साल बाद 2009 में उन्हें सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया.
टीसीएस से टाटा संस के चेयरमैन तक
टीसीएस में चंद्रशेखरन का करियर तेजी से आगे बढ़ा. 2009 में 45 साल की उम्र में वह कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बने. उनके नेतृत्व में टीसीएस ने डिजिटल, क्लाउड और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया और कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन भी तेजी से बढ़ा. 2016 में वह टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया. उन्होंने 21 फरवरी 2017 को पद संभाला.
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