Trump के बयान से Oil Market में नरमी, लेकिन टूट गए ONGC-Oil India समेत कई शेयर; जानें क्यों आई बड़ी गिरावट
कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया. निवेशकों के लिए यह हैरानी भरा था क्योंकि एक दिन पहले ही कच्चे तेल की कीमतें तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के बाद बाजार का रुख अचानक बदल गया.
Oil Stocks crash: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया. निवेशकों के लिए यह हैरानी भरा था क्योंकि एक दिन पहले ही कच्चे तेल की कीमतें तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के बाद बाजार का रुख अचानक बदल गया. ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है.
इस बयान के बाद वैश्विक बाजार में यह उम्मीद बनी कि अगर युद्ध जल्दी खत्म होता है तो तेल की सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा. इसी उम्मीद के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई. तेल की कीमतें गिरते ही भारतीय शेयर बाजार में तेल खोजने वाली कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली शुरू हो गई. नतीजा यह रहा कि ONGC, ऑयल इंडिया और अन्य तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.
तेल की कीमत गिरते ही तेल कंपनियों के शेयर टूटे
मंगलवार 10 मार्च को तेल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ गया. ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन यानी ONGC के शेयर करीब 1.5 प्रतिशत गिरकर कारोबार कर रहे थे. वहीं ऑयल इंडिया लिमिटेड के शेयर लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे आ गए.
इसके अलावा हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी के शेयर में लगभग 6.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. जिंदल ड्रिलिंग के शेयर भी करीब 3.3 प्रतिशत तक नीचे चले गए. निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था.
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.51 डॉलर यानी लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड की कीमत भी 6.12 डॉलर यानी करीब 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई.
युद्ध को लेकर ट्रंप के बयान से बदला माहौल
दरअसल एक दिन पहले कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं. ब्रेंट क्रूड 119.50 डॉलर और WTI 119.48 डॉलर तक पहुंच गया था. यह स्तर 2022 के बाद सबसे ऊंचा था. कीमतों में यह तेजी इसलिए आई थी क्योंकि सऊदी अरब और अन्य तेल उत्पादक देशों की सप्लाई कटौती और अमेरिका, इजराइल तथा ईरान के बीच बढ़ते तनाव से सप्लाई बाधित होने का डर बढ़ गया था.
लेकिन बाद में खबर आई कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत हुई है और ईरान युद्ध को जल्दी खत्म करने के प्रस्ताव दिए गए हैं. इसके बाद बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कम हो गई और कीमतें गिरने लगीं. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है और स्थिति उनकी उम्मीद से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है.
हालांकि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे. इसके अलावा यह भी खबर है कि ट्रंप रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने और अमेरिका के आपातकालीन तेल भंडार को बाजार में जारी करने पर विचार कर रहे हैं. इससे भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
डेटा सोर्स: Groww, Money control
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