Stock Market पर RBI की सख्ती: लोन लिमिट घटी, क्या अब थमेगा F&O का जोखिम?
शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता और खासतौर पर F&O (Futures & Options) सेगमेंट में रिटेल निवेशकों के भारी नुकसान को देखते हुए RBI ने बड़ा कदम उठाया है. अब बैंकों के जरिए स्टॉक मार्केट में निवेश के लिए मिलने वाले लोन पर ₹1 करोड़ की सीमा तय कर दी गई है. इसके साथ ही IPO फाइनेंसिंग को भी सीमित करते हुए एक निवेशक के लिए अधिकतम ₹25 लाख की कैप लगा दी गई है.
दरअसल, पिछले कुछ समय में देखा गया है कि कई रिटेल निवेशक उधार लेकर बाजार में ट्रेडिंग कर रहे थे, खासकर F&O सेगमेंट में, जहां जोखिम बहुत ज्यादा होता है. बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के साथ ही इन निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर भी दबाव बढ़ने का खतरा था.
RBI का यह कदम दोहरे उद्देश्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है. पहला, बैंकों को संभावित NPA (Non-Performing Assets) के जोखिम से बचाना और दूसरा, बाजार में बढ़ती अटकलों और ओवर-लेवरेजिंग पर नियंत्रण लगाना. IPO फंडिंग पर ₹25 लाख की सीमा लगाने का मकसद भी यही है कि ओवरसब्सक्रिप्शन के दौरान अत्यधिक उधारी से बचा जा सके.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बाजार में अनुशासन लाने की दिशा में अहम कदम है. इससे अत्यधिक जोखिम लेने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी और निवेशकों को ज्यादा सोच-समझकर फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगा.
अब सवाल यह है कि क्या निवेशकों को उधार लेकर ट्रेडिंग करनी चाहिए? मौजूदा हालात को देखते हुए यही सलाह दी जा रही है कि निवेश हमेशा अपनी क्षमता और जोखिम प्रोफाइल के अनुसार ही करें. क्योंकि बाजार में तेजी के साथ गिरावट भी उतनी ही तेज हो सकती है.
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