IDFC First Bank फ्रॉड केस पर RBI का बयान, नहीं है कोई सिस्टमैटिक रिस्क, शेयर 20% टूटे
IDFC First Bank में 590 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के बाद RBI ने साफ किया है कि इससे बैंकिंग सिस्टम को कोई बड़ा खतरा नहीं है. हरियाणा सरकार से जुड़े खातों तक सीमित इस मामले की जांच जारी है. इस बीच बैंक के शेयरों में करीब 20 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
IDFC First Bank से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड ने सोमवार को बैंकिंग सेक्टर और शेयर बाजार में हलचल मचा दी. हालांकि इस मामले पर भारतीय रिजर्व बैंक ने साफ कहा है कि इससे देश की बैंकिंग व्यवस्था पर कोई बड़ा या सिस्टम से जुड़ा खतरा नहीं दिखता. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के इस बयान से भले ही बाजार को कुछ राहत मिली हो, लेकिन निवेशकों और राज्य सरकार के स्तर पर चिंता कम होती नहीं दिख रही.
RBI ने क्या कहा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सेंट्रल बैंक पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कोई “सिस्टमेटिक इश्यू” नहीं है और बैंकिंग सिस्टम के लिए इसमें कोई बड़ा जोखिम नहीं दिखता. आरबीआई के इस बयान का मकसद साफ तौर पर यह संदेश देना था कि मामला सीमित है और पूरे बैंकिंग सेक्टर पर इसका असर नहीं पड़ेगा.
क्या है IDFC First Bank फ्रॉड मामला
IDFC First Bank ने अपने चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में लगभग 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता लगाया है. बैंक के मुताबिक, यह मामला हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खास अकाउंट्स तक सीमित है और इसका असर न तो चंडीगढ़ ब्रांच के बाकी ग्राहकों पर पड़ा है और न ही बैंक की अन्य शाखाओं पर. बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि फिलहाल रकम का मिलान किया जा रहा है और आगे की जानकारी के आधार पर नुकसान का सही आकलन होगा.
IDFC First Bank ने कहा है कि उसने इस मामले में आंतरिक जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जांच के आधार पर चार संदिग्ध अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. बैंक ने यह भी साफ किया है कि दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा, बैंक अन्य बैंकों में मौजूद संदिग्ध लाभार्थी खातों पर लियन मार्क करने और कानूनी प्रक्रिया के जरिए रकम की रिकवरी की कोशिश करेगा.
हरियाणा सरकार का सख्त कदम
फ्रॉड सामने आने के बाद हरियाणा सरकार के वित्त विभाग (Institutional Finance & Credit Control) ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज के लिए डी-एम्पैनल कर दिया है. सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और पीएसयू को निर्देश दिया है कि वे इन बैंकों से अपने फंड तुरंत अन्य अधिकृत बैंकों में ट्रांसफर करें और मौजूदा खाते बंद कर दें.
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शेयर बाजार में असर
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर IDFC First Bank के शेयर पर पड़ा. खबर सामने आने के बाद बैंक का शेयर करीब 20 फीसदी तक टूट गया. हालांकि बयान के बाद कंपनी के शेयरों में थोड़ी रिकवरी दिखी और स्टॉक 70 रुपये (-16%) पर बंद हुए. जो मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है. निवेशकों में डर और अनिश्चितता की वजह से शेयर पर भारी दबाव देखने को मिला.