सोने और चांदी की रैली देख, कॉपर खरीदने लगे हैं…तो थमिए! 13,000 डॉलर से फिसलने लगा भाव, जानें एक्सपर्ट की राय
रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसलने के बाद कॉपर की कीमतों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. अमेरिका और चीन में बढ़ते स्टॉक, चीन में कमजोर शॉर्ट-टर्म मांग और निवेशकों की बिकवाली ने कॉपर पर दबाव बना दिया है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लंबी अवधि की कहानी मजबूत है, लेकिन फिलहाल गोल्ड जैसी तेजी मुश्किल दिखती है.
Copper outlook: कॉपर की कीमतों ने हाल के महीनों में निवेशकों को चौंकाया है. एक समय ऐसा लगा कि यह धातु भी सोने की तरह तेज रफ्तार पकड़ लेगी, लेकिन अब तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है. पिछले महीने कॉपर की कीमतें 13,000 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचीं, लेकिन इस हफ्ते यह फिसलकर करीब 12,700 डॉलर पर आ गईं. लंबी अवधि में मांग मजबूत रहने की उम्मीदों और अमेरिका व चीन के एक्सचेंजों पर बढ़ते स्टॉक के बीच टकराव ने कॉपर के निकट भविष्य को अनिश्चित बना दिया है.
गोल्ड और कॉपर, दोनों की है अलग चाल
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, लेकिन कमोडिटी बाजार में सभी धातुओं में एक जैसी तेजी देखने को नहीं मिलेगी. South China Morning Post में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि बेस मेटल्स में रिटर्न ज्यादा अलग-अलग हो सकते हैं. यही वजह है कि कॉपर का शॉर्ट टर्म का आउटलुक गोल्ड की तुलना में कमजोर दिख रहा है.
ओवरसप्लाई और बढ़ता स्टॉक बना दबाव
Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटेजी हेड ओले हैनसेन के अनुसार, कॉपर बाजार में फिलहाल सप्लाई ज्यादा है. अमेरिका और चीन के प्रमुख एक्सचेंज हब्स पर दिखाई दे रहे ऊंचे इन्वेंट्री लेवल, चीन में छुट्टियों से पहले कमजोर मांग और लंदन मार्केट में कैश से तीन महीने का कंटैंगो इस बात के संकेत हैं कि निकट भविष्य में सप्लाई पर्याप्त है. उनका कहना है कि भले ही इलेक्ट्रिफिकेशन, AI डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी थीम्स कॉपर को लंबे समय में सपोर्ट देती हैं, लेकिन अभी तेजी सीमित रह सकती है.
चीन की भूमिका और छुट्टियों का असर
चीन के लूनर न्यू ईयर की वजह से वहां के बाजार 23 फरवरी तक बंद रहे. इस दौरान आमतौर पर मांग कमजोर रहती है और ग्लोबल कीमतों पर चीन के एक्सचेंजों का असर भी कम हो जाता है. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब मेटल्स के शॉर्ट-टर्म प्राइस फॉर्मेशन का केंद्र चीन बन चुका है. उन्होंने कहा कि फंडामेंटल्स अब भी मायने रखते हैं, लेकिन पोजिशनिंग और मोमेंटम की भूमिका बढ़ गई है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो रहा है.
सट्टेबाजों की बड़ी हिस्सेदारी
Oilprice.com की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाले कॉपर, जिंक, निकेल, टिन, लेड और एल्युमिनियम में रिकॉर्ड-हाई ओपन इंटरेस्ट देखा गया. ट्रेडर्स ने बेस मेटल्स और लिथियम में लगातार तेजी की उम्मीद में भारी दांव लगाए. इसमें बड़ी हिस्सेदारी रिटेल निवेशकों की भी रही, जिससे मेटल्स में एक तरह की ‘मैनिया’ देखने को मिली. विशेषज्ञों के अनुसार, जब पोजिशनिंग बहुत ज्यादा हो जाती है, तो कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं और फिर उतनी ही तेज गिरावट भी आती है.
टैरिफ, सप्लाई और AI डिमांड का रोल
ऑयल प्राइस डॉट कॉम ने अपने रिपोर्ट में बताया है कि Deutsche Bank Research के मुताबिक, कॉपर की हालिया तेजी में सप्लाई डिसरप्शन, अमेरिका की ओर से रिफाइंड कॉपर पर संभावित टैरिफ, AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मांग और निवेश फ्लो जैसी वजहों का भी योगदान रहा है. हालांकि, बैंक का कहना है कि 2025 की तीसरी तिमाही से चीन में कॉपर की मांग तेज कीमतों के कारण कमजोर पड़ी है. इससे घरेलू मांग पर दबाव बना है.
आगे का अनुमान क्या कहता है
Deutsche Bank Research ने अपनी रिपोर्ट में उम्मीद जताई है कि 2026 में कॉपर की औसत कीमत 12,125 डॉलर प्रति टन रह सकती है, जबकि दूसरी तिमाही में यह 13,000 डॉलर तक पहुंच सकती है, जब चीन में छुट्टियों के बाद मांग लौटने की संभावना है.
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च ने ये भी संकेत दिया है कि अमेरिका के रिफाइंड कॉपर टैरिफ पर स्पष्टता आने के बाद साल के अंत में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. बैंक का बेस केस है कि 15 फीसदी का टैरिफ 2026 के मध्य में घोषित हो सकता है और 2027 में लागू होगा. जब तक यह अनिश्चितता बनी रहेगी, कॉपर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. लेकिन एक बात साफ है कि कॉपर में गोल्ड जैसी रैली नजर नहीं आ रही है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
Latest Stories
विदेशों में बज रहा भारतीय फर्मा सेक्टर का डंका, जेनेरिक दवाओं की सप्लाई में ये 4 दिग्गज सबसे आगे, 5 साल में 189% तक का रिटर्न
एक फैसले ने बदली तस्वीर, इस एग्रोकेमिकल सेक्टर का स्टॉक्स 15% टूटा, शेयर में मची भारी बिकवाली
30 तेजस फाइटर जेट ग्राउंडेड, डिलीवरी में लगातार देरी और हादसों से सहमे निवेशक, 4% टूटे HAL शेयर
