₹30000 की सैलरी पर ₹40 लाख का कर्ज! क्यों कर्ज के जाल में फंस रहे Gen Z

भारत में Gen Z तेजी से कर्ज के जाल में फंस रही है. ₹30-40 हजार मासिक कमाने वाले कई युवा ₹30-40 लाख तक के कर्ज में डूब रहे हैं. आसान डिजिटल लोन, बढ़ती लाइफस्टाइल लागत और कम सैलरी के कारण युवा छोटे-छोटे अनसिक्योर्ड लोन लेते जा रहे हैं जो बाद में बड़ा कर्ज बन रहा है. आइए इसे डिटेल में समझते हैं.

Gen Z में बढ़ता लोन! Image Credit: Canva

भारत की युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, तेजी से कर्ज के जाल में फंसती जा रही है. आसान डिजिटल लोन, क्रेडिट कार्ड और “बाय नाउ पे लेटर” जैसे विकल्पों ने उधारी को बेहद आसान बना दिया है. नतीजा यह है कि ₹30-40 हजार मासिक कमाने वाले कई युवा ₹30-40 लाख तक के कर्ज में डूब रहे हैं. एक्सपर्ट्स इसे आने वाले समय का बड़ा फाइनेंशियल रिस्क मान रहे हैं. आइये जानते हैं कि कर्ज के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

एक उदाहरण से समझें

ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के रहने वाले विद्युत शर्मा ने 2016 में 19 साल की उम्र में फ्रीलांस फोटोग्राफी शुरू करने के लिए कैमरा और उपकरण खरीदने के लिए छोटे-छोटे लोन लिए जो कुछ ही साल में बढ़कर करीब ₹40 लाख के कर्ज में बदल गए. इसके बाद लोन 4-5 साल में 54 अलग-अलग लोन खातों में फैल गया. इनमें ज्यादातर छोटे, बिना गारंटी वाले लोन थे, जो फिनटेक ऐप, एनबीएफसी, क्रेडिट कार्ड कंपनियों और बैंकों से लिए गए थे.

विद्युत बताते हैं कि 2021 के आसपास उन्हें महसूस हुआ कि महंगे उपकरण खरीदने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन्हें लगातार इंस्टेंट लोन के ऑफर मिल रहे थे. लेकिन उन्होंने यह नहीं सोचा था कि EMI चूकने के बाद हालात कितने खराब हो सकते हैं. रोजाना 15-20 कॉल और घर-परिवार तक पहुंचने वाली वसूली की वजह से परेशान होकर उन्होंने पिछले साल एक डेब्ट काउंसलिंग फर्म की मदद ली. उनकी मदद से न सिर्फ वसूली का दबाव खत्म हुआ, बल्कि कर्ज भी घटकर करीब ₹5 लाख रह गया.

कैसे शुरू होता है कर्ज का जाल

ऐसे मामले अब आम होते जा रहे हैं. हर महीने 25-35 साल के सैकड़ों युवा कर्ज राहत कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं. आज कल कई युवा (Gen Z) ₹30-40 हजार की सैलरी पर ₹30-40 लाख तक का कर्ज ले रहे हैं. इनकम और खर्च के बीच का अंतर भरने के लिए लिया गया कर्ज धीरे-धीरे बेकाबू हो जाता है. अधिकांश मामलों में कर्ज की शुरुआत घर या गाड़ी जैसे बड़े लोन से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे डिजिटल लोन से होती है. गैजेट, ट्रैवल, लाइफस्टाइल या रोजमर्रा के खर्च के लिए लिए गए ये लोन आसानी से मिल जाते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं. जब आय EMI के मुकाबले कम पड़ती है तो लोग पुराने लोन चुकाने के लिए नया लोन लेने लगते हैं और कर्ज का साइकल तेज हो जाता है.

क्यों बढ़ रहा है कर्ज?

रिपोर्ट्स के अनुसार, नए क्रेडिट लेने वालों में 41% हिस्सेदारी Gen Z की है. NBFC और फिनटेक कंपनियों से कर्ज लेने वालों में 65% युवा हैं. ₹50,000 से कम के छोटे लोन में डिफॉल्ट की दर भी तेजी से बढ़ी है और माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में तनावग्रस्त लोन का अनुपात बढ़कर 6.2% तक पहुंच चुका है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक कारण हैं.

  • मोबाइल ऐप के जरिए तुरंत लोन मिलना बेहद आसान हो गया है।
  • 18% से 48% तक की ऊंची ब्याज दरें EMI का बोझ बढ़ा रही हैं।
  • महंगाई और स्थिर वेतन के कारण खर्च और आय का अंतर बढ़ा है।
  • सोशल मीडिया और लाइफस्टाइल दबाव के चलते गैजेट, ट्रैवल और शॉपिंग पर उधारी बढ़ी है।

खतरे के संकेत

कई युवा क्रेडिट कार्ड का न्यूनतम भुगतान कर रहे हैं, जिससे कर्ज तेजी से बढ़ता है. एक लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन लेना कर्ज के चक्र को और खतरनाक बना देता है.

  • EMI आय का 50% से ज्यादा हो जाना
  • क्रेडिट कार्ड लिमिट का 80–90% इस्तेमाल
  • जरूरी खर्च के लिए भी उधार लेना
  • एक लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन लेना

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