घर खरीदने की सोच रहे हैं? जानिए कितनी सैलरी पर मिलेगा कितना होम लोन, आसान उदाहरणों के साथ
कम ब्याज दरों और स्थिर प्रॉपर्टी कीमतों के दौर में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए होम लोन की सही समझ बेहद जरूरी है. उम्र, इनकम और डाउन पेमेंट के आधार पर बैंक कितना लोन देते हैं और किस कीमत का घर खरीदा जा सकता है, इसे दो आसान परिदृश्यों के जरिए समझाया गया है.
होम लोन की ब्याज दरें इस समय ऐतिहासिक रूप से काफी नीचे हैं और रियल एस्टेट की कीमतें भी लंबे समय से लगभग स्थिर बनी हुई हैं. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोग अपना घर खरीदने की योजना बना रहे हैं. घर खरीदना सिर्फ नए शादीशुदा लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक बड़ा लक्ष्य होता है जो शादी करने की योजना बना रहे होते हैं. कई बार सही रहने की जगह न होने की वजह से लोगों को शादी का फैसला भी टालना पड़ता है.
ऐसे बहुत से लोग होंगे, जिन्होंने पहले से कुछ पैसा जमा कर रखा है और अब वे अगले वित्त वर्ष में होम लोन लेकर घर खरीदने की सोच रहे हैं. वहीं कई लोग ऐसे भी हैं, जो भविष्य में घर खरीदने के लिए अभी से डाउन पेमेंट यानी अपनी हिस्सेदारी (मार्जिन मनी) जमा करना चाहते हैं. यह लेख आपको यह समझने में मदद करेगा कि बैंक होम लोन की पात्रता कैसे तय करते हैं, कितना लोन मिल सकता है और लोन लेने के लिए आपको अपनी तरफ से कितना पैसा लगाना होता है. साथ ही, यह उन लोगों के लिए भी उपयोगी होगा जो भविष्य में घर खरीदने के लिए अभी से निवेश की योजना बना रहे हैं.
मार्जिन मनी से अगले वित्त वर्ष में घर खरीदने की योजना
आप किस तरह का घर खरीद सकते हैं, यह मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करता है- आपके पास उपलब्ध मार्जिन मनी और आपकी आय. बैंक एक तय सीमा से ज्यादा रकम प्रॉपर्टी के मूल्य के मुकाबले लोन के रूप में नहीं दे सकते. इसे लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो कहा जाता है.
30 लाख रुपये तक के होम लोन पर बैंक अधिकतम 90% तक लोन दे सकते हैं. 30 लाख से 75 लाख रुपये के बीच लोन पर यह सीमा 80% होती है. वहीं 75 लाख रुपये से ज्यादा के लोन पर LTV रेशियो 75% तक सीमित रहता है. इसके अलावा, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज, जो आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमत का लगभग 5% होते हैं, बैंक फंड नहीं करते. यह खर्च आपको खुद उठाना होता है.
लोन पात्रता तय करते समय बैंक आमतौर पर यह मानते हैं कि आपकी कुल डिस्पोजेबल इनकम का लगभग 50% से 60% हिस्सा सभी लोन की EMI चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर पहले से कोई लोन चल रहा है, तो इससे आपकी होम लोन पात्रता कम हो जाती है.
बैंक सैलरीड लोगों को आमतौर पर 60 साल की उम्र के बाद और प्रोफेशनल्स को 65 साल के बाद तक की अवधि के लिए होम लोन नहीं देते.
अगर आपके पास पहले से मार्जिन मनी मौजूद है, तो नीचे दिए गए दो उदाहरणों के जरिए यह समझने की कोशिश की गई है कि किसी तय कीमत के घर के लिए आपको कितना होम लोन लेना होगा और उस लोन के लिए कितनी सालाना आय जरूरी होगी.
पहला परिदृश्य: 35 साल की उम्र और 12.50 लाख रुपये की उपलब्ध नकदी
इस स्थिति में आपको 20 साल की होम लोन अवधि चुननी चाहिए. आपकी उम्र आखिरी EMI के समय 55 साल होगी, जो 60 साल की अधिकतम सीमा से काफी कम है.
दूसरा परिदृश्य: 45 साल की उम्र और 20 लाख रुपये की उपलब्ध नकदी
यहां यह माना गया है कि आपकी रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है. ऐसे में आपको अधिकतम 15 साल की अवधि के लिए ही होम लोन मिलेगा.
इन मान्यताओं के आधार पर विवरण नीचे टेबल में दिया गया है:
| विवरण | पहला परिदृश्य | दूसरा परिदृश्य |
|---|---|---|
| वर्तमान आयु (साल में) | 35 | 45 |
| डाउन पेमेंट के लिए उपलब्ध राशि (लाख रुपये में) | 12.50 | 20.00 |
| खरीदी जाने वाली प्रॉपर्टी की कीमत (लाख रुपये में) | 50.00 | 85.00 |
| स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज (लाख रुपये में) | 2.50 | 4.25 |
| आवश्यक मार्जिन मनी (लाख रुपये में) | 10.00 | 17.00 |
| मार्जिन मनी के आधार पर उपलब्ध होम लोन (लाख रुपये में) | 40.00 | 68.00 |
| होम लोन की उपलब्ध अवधि (साल में) | 20.0 | 15.0 |
| EMI (रुपये में) | 31,61 | 62,074 |
| होम लोन पात्रता के लिए आवश्यक वार्षिक आय (लाख रुपये में) | 7.60 | 15.00 |
| होम लोन पर ब्याज दर (प्रतिवर्ष) | 7.25% | 7.25% |
भविष्य में घर खरीदने के लिए मार्जिन मनी जुटाने की योजना
जो लोग तुरंत नहीं, बल्कि आने वाले कुछ सालों में घर खरीदने की सोच रहे हैं, उन्हें पहले से मार्जिन मनी जमा करने की योजना बनानी चाहिए. मार्जिन मनी के लिए निवेश का विकल्प इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके पास कितना समय है.
अगर यह माना जाए कि आपकी घर खरीदने की योजना तीन से पांच साल के भीतर की है और इस दौरान आपको घर की कीमत का करीब 20% जमा करना है, तो इस समय इक्विटी में निवेश करना उचित नहीं होगा. ऐसे में आप डेट म्यूचुअल फंड्स में मासिक SIP के जरिए निवेश शुरू कर सकते हैं. इसके अलावा, कंजर्वेटिव हाइब्रिड डेट स्कीम्स में भी निवेश किया जा सकता है, जहां करीब 10% से 25% हिस्सा इक्विटी में लगाया जाता है, ताकि कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की संभावना बन सके.
जिन लोगों का निवेश समय पांच साल से ज्यादा का है, उनके लिए एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं. ये फंड मुख्य रूप से इक्विटी आधारित होते हैं, जहां कम से कम 65% पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है और बाकी रकम डेट में निवेश की जा सकती है. डेट में 35% तक निवेश की सुविधा होने से इक्विटी से जुड़े उतार-चढ़ाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है. इससे तय समय में जरूरी रकम जमा करने में मदद मिलती है.
भविष्य में घर खरीदने के लिए मार्जिन मनी की योजना बनाते समय यह भी जरूरी है कि आप प्रॉपर्टी की संभावित कीमत बढ़ने को ध्यान में रखें, जो कम से कम महंगाई दर के बराबर हो सकती है. अगर आपने प्रॉपर्टी की कीमत में होने वाली बढ़ोतरी को ध्यान में नहीं रखा, तो हो सकता है कि घर खरीदते समय आपको यह महसूस हो कि आपने जो मार्जिन मनी जमा की है, वह डाउन पेमेंट के लिए पर्याप्त नहीं है.
उम्मीद है कि यह चर्चा आपको यह समझने में मदद करेगी कि बैंक होम लोन की पात्रता कैसे तय करते हैं और भविष्य में घर खरीदने के लिए मार्जिन मनी की योजना कैसे बनाई जा सकती है.
लेखक एक टैक्स और इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं. आप उन्हें jainbalwant@gmail.com पर या ट्विटर हैंडल @jainbalwant पर संपर्क कर सकते हैं.
Latest Stories
परिवार को किराया देकर लेते हैं HRA? नए नियम के बाद बदल जाएगा तरीका, सिर्फ रसीद नहीं बताना होगा रिश्ता
दोहरी पेंशन लेने वालों पर होगी कार्रवाई, CM धामी ने दिए जांच के आदेश, कैग की रिपोर्ट में हुआ था खुलासा
बिजनेस करने के लिए महिलाओं को ₹1.40 लाख रुपये दे रही सरकार, जानें किसे मिलता है लाभ, कैसे करें आवेदन
