शादी के बाद भी बेटी का पैतृक संपत्ति पर हक रहता है या नहीं इसे लेकर अक्सर लोग कंफ्यूजन में रहते हैं. क्योंकि 2005 से पहले इसे लेकर पर्याप्त नियम नहीं थे, लेकिन 2005 के कानून में संशोधन के बाद हिंदू उत्तराधिकार कानून में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिल गया है.
भारत में सोना रखने की कोई तय कानूनी सीमा नहीं है, लेकिन उसका स्रोत (खरीद, गिफ्ट या विरासत) साबित करना जरूरी होता है. CBDT के इस सिलसिले में कुछ नियम है, इसके तहत य सीमा तक आमतौर पर सोना या गहने जब्त नहीं किए जाते. हालांकि सोने के खरीद बिल या अन्य दस्तावेज आपके पास होने चाहिए.
अगर आपने ओल्ड टैक्स रिजीम चुना है और धारा 80C के तहत निवेश किया है, तो ये निवेश सिर्फ टैक्स बचत तक सीमित नहीं हैं. जरूरत पड़ने पर आप PPF, NSC, ELSS और पारंपरिक बीमा पॉलिसियों के जरिए लोन या आंशिक निकासी कर अस्थायी कैश की कमी से राहत पा सकते हैं. जानिए किन शर्तों पर कितना पैसा निकाल सकते हैं और कैसे बिना निवेश तोड़े लिक्विडिटी की समस्या दूर कर सकते हैं.
कम ब्याज दरों और स्थिर प्रॉपर्टी कीमतों के दौर में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए होम लोन की सही समझ बेहद जरूरी है. उम्र, इनकम और डाउन पेमेंट के आधार पर बैंक कितना लोन देते हैं और किस कीमत का घर खरीदा जा सकता है, इसे दो आसान परिदृश्यों के जरिए समझाया गया है.
अक्सर प्रॉपर्टी बुकिंग के समय बिल्डर सिर्फ अलॉटमेंट लेटर देता है और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट सालों तक नहीं बनता. ऐसे में अगर सौदा रद्द हो जाए और बिल्डर ज्यादा पैसा लौटाए, तो क्या वह रकम कैपिटल गेन मानी जाएगी या अन्य स्रोतों से आय? ITAT के एक अहम फैसले ने इस उलझन को साफ किया है.
वित्त वर्ष 2025-26 खत्म होने से पहले करदाताओं को सैलरी डिटेल, खर्चों के प्रूफ, डिडक्शन और एडवांस टैक्स की जांच कर लेनी चाहिए. पीपीएफ-एनपीएस में न्यूनतम निवेश और 1.25 लाख रुपये तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन बुक कर टैक्स बचत की जा सकती है. समय पर ये काम करने से अतिरिक्त टैक्स और ब्याज से से राहत मिल सकती है.
किराए के मकान में रहने वालों के लिए आयकर कानून में अलग-अलग टैक्स नियम तय हैं. किराया मिलने पर टैक्स, होम लोन ब्याज, HRA और सेक्शन 80GG के तहत कटौती के स्पष्ट प्रावधान हैं. सही जानकारी से टैक्स प्लानिंग और बचत दोनों आसान हो जाती है.
सोने की कीमतों में तेजी के बीच निवेशकों के लिए गोल्ड और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स पर टैक्स नियम समझना जरूरी हो गया है. फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू होते हैं. सही टैक्स प्लानिंग से निवेशक टैक्स बोझ कम कर सकते हैं. आइये जानते हैं कि किस गोल्ड प्रोडक्ट को बेचने पर कितना टैक्स देना पड़ता है.
अगर आप अपने प्लॉट पर खुद घर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो होम लोन की शर्तें, EMI की टाइमिंग और सेक्शन 80C व 24(b) के टैक्स फायदे समझना बेहद जरूरी है. सही जानकारी आपको भविष्य में टैक्स नुकसान और फाइनेंशियल गलतियों से बचा सकती है.
कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश से पहले उसके टैक्स नियम समझना बेहद जरूरी है. किराये की आय, लोन पर ब्याज, अलग-अलग टैक्स रेजीम और बिक्री के बाद टैक्स छूट जैसे पहलू आपकी कमाई और टैक्स प्लानिंग को सीधे प्रभावित करते हैं. सही जानकारी से बड़े टैक्स नुकसान से बचा जा सकता है.