Balwant Jain

बलवंत जैन टैक्‍स और इन्‍वेस्‍टमेंट के एक्‍सपर्ट हैं. ये एक रैंक होल्‍डर चार्टर्ड अकाउंटेंट और 1983 बैच के कंपनी सेक्रेटरी हैं. साथ ही ये सर्टिफायड फाइनेंशियल प्‍लानर भी हैं. इन्‍हें कंसलटेंसी का व्‍यापक अनुभव है. जैन कई प्रतिष्ठित संस्‍थानों में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और कंपनी सेक्रेटरी के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इन संस्‍थानों में बॉम्‍बे ऑक्‍सीजन कॉरपोरेशन लिमिटेड और अपनापैसा.कॉम जैसी कंपनियां शामिल हैं. ये कई अखबारों, बिजनेस पोर्टल्‍स और विभिन्‍न टीवी चैनलों पर एक्‍सपर्ट के तौर पर अपनी विशेषज्ञता से लोगों को जागरूक करते हैं और उनकी समस्‍याओं का समाधान करते हैं. इसके अलावा ये मुंबई के NMIMS के विजिटिंग फैक्‍ल्‍टी मेंबर भी रह चुके हैं. इनसे jainbalwant@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है.

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Balwant Jain

सोने की कीमतों में तेजी के बीच निवेशकों के लिए गोल्ड और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स पर टैक्स नियम समझना जरूरी हो गया है. फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू होते हैं. सही टैक्स प्लानिंग से निवेशक टैक्स बोझ कम कर सकते हैं. आइये जानते हैं कि किस गोल्ड प्रोडक्ट को बेचने पर कितना टैक्स देना पड़ता है.

अगर आप अपने प्लॉट पर खुद घर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो होम लोन की शर्तें, EMI की टाइमिंग और सेक्शन 80C व 24(b) के टैक्स फायदे समझना बेहद जरूरी है. सही जानकारी आपको भविष्य में टैक्स नुकसान और फाइनेंशियल गलतियों से बचा सकती है.

कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश से पहले उसके टैक्स नियम समझना बेहद जरूरी है. किराये की आय, लोन पर ब्याज, अलग-अलग टैक्स रेजीम और बिक्री के बाद टैक्स छूट जैसे पहलू आपकी कमाई और टैक्स प्लानिंग को सीधे प्रभावित करते हैं. सही जानकारी से बड़े टैक्स नुकसान से बचा जा सकता है.

इनकम टैक्स कानून सिर्फ आपकी कमाई पर ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के नाम पर किए गए खर्च और निवेश पर भी टैक्स बचाने का मौका देता है. Old Tax Regime में माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस, बच्चों की पढ़ाई, जीवनसाथी के निवेश और मेडिकल खर्च जैसे मामलों में कई अहम सेक्शन के तहत छूट मिल सकती है.

घर बेचने से जुड़े टैक्स नियम अक्सर आम लोगों की नजर से ओझल रहते हैं. कई बार सही जानकारी के अभाव में लोग अनावश्यक टैक्स बोझ उठा लेते हैं. प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन से पहले कुछ अहम टैक्स प्रावधान और विकल्प समझ लेना भविष्य में बड़े वित्तीय नुकसान से बचा सकता है.

लोन सिर्फ जरूरत नहीं, सही योजना हो तो टैक्स बचत का मजबूत जरिया भी बन सकता है. अलग-अलग तरह के लोन पर आयकर कानून क्या राहत देता है और कहां सावधानी जरूरी है, यही समझना हर उधार लेने वाले के लिए सबसे अहम है.

वित्तीय योजना बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है समय-समय पर उसकी समीक्षा करना. बदलती जरूरतें, आय और बाजार की स्थिति कई संकेत देती हैं, जिन पर ध्यान देना भविष्य की आर्थिक स्थिरता के लिए अहम हो सकता है.

सरकार का यह खास बॉन्ड निवेशकों को सुरक्षित ब्याज का विकल्प देता है, लेकिन इसमें कई ऐसी शर्तें हैं जो आम निवेशकों को चौंका सकती हैं. कौन निवेश कर सकता है, कब ब्याज मिलेगा, टैक्स कैसे लगेगा और जल्दी पैसे निकालने पर क्या होगा. यह सब जानना जरूरी है वरना नुकसान हो सकता है.

शादी, तलाक और परिवार से जुड़ी आर्थिक जिम्मेदारियां सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं होतीं, इनका सीधा असर आपकी टैक्स गणना पर भी पड़ता है. कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनकी कीमत उन्हें भारी टैक्स, ब्याज और पेनल्टी के रूप में चुकानी पड़ती है. पूरी जानकारी आगे.

डेट फंड में निवेश को अक्सर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसमें ब्याज दर जोखिम, क्रेडिट जोखिम और कॉन्सन्ट्रेशन जोखिम जैसे बड़े खतरे छिपे होते हैं. सही फंड चुनने, पोर्टफोलियो की निगरानी, रेटिंग देखने और ऊंचे रिटर्न के पीछे न भागने जैसी सावधानियां निवेशक को बड़े नुकसान से बचा सकती हैं.