Flexicap Fund ऐसा निवेश विकल्प है, जिसमें फंड मैनेजर को Large, Mid और Small Cap में निवेश की पूरी आजादी मिलती है. बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच यह फंड बेहतर रिटर्न और डायवर्सिफिकेशन का मौका देता है, इसलिए निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRI) के लिए भारत में निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनमें FCNR अकाउंट एक बेहतर विकल्प है. ये NRI के लिए विदेशी मुद्रा में सुरक्षित और टैक्स-फ्री निवेश की सुविधा देता है. रुपये की कमजोरी का फायदा मिलने से इसमें लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है.
विदेश में काम करने वाले भारतीयों यानी NRI के लिए भारत में बैंकिंग व्यवस्था थोड़ी अलग होती है. इसलिए कौन-सा बैंक अकाउंट खोलना सही रहता है इसकी जानकारी होना जरूरी है. फेमा के नियम के तहत एनआरआई के लिए तीन तरह के अकाउंट की सुविधा होती है, जिनमें NRO और NRE सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं. तो क्या है इनकी खासियत जानें डिटेल.
प्रॉपर्टी की डील टूट जाए तो क्या सिर्फ पैसा ही जाता है या टैक्स का भी झटका लगता है? टोकन मनी, स्टांप ड्यूटी और जीएसटी से जुड़े ऐसे नियम हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. एक छोटी सी गलती आपको बड़ा नुकसान करा सकती है.
शादी के बाद भी बेटी का पैतृक संपत्ति पर हक रहता है या नहीं इसे लेकर अक्सर लोग कंफ्यूजन में रहते हैं. क्योंकि 2005 से पहले इसे लेकर पर्याप्त नियम नहीं थे, लेकिन 2005 के कानून में संशोधन के बाद हिंदू उत्तराधिकार कानून में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिल गया है.
भारत में सोना रखने की कोई तय कानूनी सीमा नहीं है, लेकिन उसका स्रोत (खरीद, गिफ्ट या विरासत) साबित करना जरूरी होता है. CBDT के इस सिलसिले में कुछ नियम है, इसके तहत य सीमा तक आमतौर पर सोना या गहने जब्त नहीं किए जाते. हालांकि सोने के खरीद बिल या अन्य दस्तावेज आपके पास होने चाहिए.
अगर आपने ओल्ड टैक्स रिजीम चुना है और धारा 80C के तहत निवेश किया है, तो ये निवेश सिर्फ टैक्स बचत तक सीमित नहीं हैं. जरूरत पड़ने पर आप PPF, NSC, ELSS और पारंपरिक बीमा पॉलिसियों के जरिए लोन या आंशिक निकासी कर अस्थायी कैश की कमी से राहत पा सकते हैं. जानिए किन शर्तों पर कितना पैसा निकाल सकते हैं और कैसे बिना निवेश तोड़े लिक्विडिटी की समस्या दूर कर सकते हैं.
कम ब्याज दरों और स्थिर प्रॉपर्टी कीमतों के दौर में घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए होम लोन की सही समझ बेहद जरूरी है. उम्र, इनकम और डाउन पेमेंट के आधार पर बैंक कितना लोन देते हैं और किस कीमत का घर खरीदा जा सकता है, इसे दो आसान परिदृश्यों के जरिए समझाया गया है.
अक्सर प्रॉपर्टी बुकिंग के समय बिल्डर सिर्फ अलॉटमेंट लेटर देता है और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट सालों तक नहीं बनता. ऐसे में अगर सौदा रद्द हो जाए और बिल्डर ज्यादा पैसा लौटाए, तो क्या वह रकम कैपिटल गेन मानी जाएगी या अन्य स्रोतों से आय? ITAT के एक अहम फैसले ने इस उलझन को साफ किया है.
वित्त वर्ष 2025-26 खत्म होने से पहले करदाताओं को सैलरी डिटेल, खर्चों के प्रूफ, डिडक्शन और एडवांस टैक्स की जांच कर लेनी चाहिए. पीपीएफ-एनपीएस में न्यूनतम निवेश और 1.25 लाख रुपये तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन बुक कर टैक्स बचत की जा सकती है. समय पर ये काम करने से अतिरिक्त टैक्स और ब्याज से से राहत मिल सकती है.