परिवार को किराया देकर लेते हैं HRA? नए नियम के बाद बदल जाएगा तरीका, सिर्फ रसीद नहीं बताना होगा रिश्ता
Old Tax Regime में HRA छूट लेने वालों के लिए नया प्रस्तावित नियम अहम साबित हो सकता है. अब अगर आप माता-पिता, जीवनसाथी या किसी रिश्तेदार को किराया देते हैं, तो टैक्स विभाग को मकान मालिक से अपना संबंध भी बताना अनिवार्य हो सकता है, खासकर जब सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक हो.
HRA Claim and New Draft Rule: अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम में HRA यानी House Rent Allowance का फायदा लेने के लिए अपने जीवनसाथी, माता-पिता या किसी दूसरे रिश्तेदार को किराया देते हैं, तो आपके लिए एक अहम बदलाव प्रस्तावित किया गया है. इनकम टैक्स नियम 2026 के ड्राफ्ट में यह अनिवार्य किया गया है कि HRA क्लेम करते समय किराया देने वाले व्यक्ति और मकान मालिक के बीच संबंध यानी रिलेशनशिप की जानकारी भी देनी होगी. यानी अब केवल किराया रसीद या PAN देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी बताना पड़ेगा कि मकान मालिक आपका कौन लगता है.
किन मामलों में देना होगा विवरण?
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अगर किसी कर्मचारी ने साल भर में 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया दिया है, तो HRA छूट पाने के लिए निम्न जानकारी देना जरूरी होगा-
- मकान मालिक का नाम
- मकान मालिक का पता
- मकान मालिक का PAN
- मकान मालिक से आपका संबंध
यह प्रावधान ड्राफ्ट Income-tax Rules 2026 के Rule 205 में प्रस्तावित है और खास तौर पर उन मामलों को कवर करता है जहां किराया बड़ी राशि में दिया जाता है.
पहले क्या नियम था?
मौजूदा Income-tax Rules 1962 के तहत HRA क्लेम के लिए केवल मकान मालिक का नाम, पता और PAN देना जरूरी होता था, बशर्ते सालाना किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा हो. Rule 26(C) में रिश्ते का खुलासा करने की कोई बाध्यता नहीं थी. यही वजह है कि कई लोग परिवार के सदस्यों के नाम पर किराया दिखाकर टैक्स बचत का दावा करते थे.
नया नियम क्यों लाया जा रहा है?
यह कदम फर्जी HRA दावों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है. टैक्स विभाग लंबे समय से ऐसे मामलों की जांच कर रहा है, जिनमें कर्मचारी अपने ही परिवार के सदस्यों को किराया दिखाते हैं, लेकिन वास्तविक रूप से पैसा ट्रांसफर नहीं होता या फिर प्राप्तकर्ता उस इनकम को अपने आयकर रिटर्न में घोषित नहीं करता. नया खुलासा अनिवार्य होने से विभाग को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किराया वास्तव में दिया जा रहा है या केवल टैक्स बचाने के लिए दिखाया जा रहा है. साथ ही परिवार के भीतर बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन पर भी नजर रखी जा सकेगी.
भविष्य में नोटिस भी आ सकता है
अगर कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी या माता-पिता को भारी किराया दिखाता है, लेकिन वे अपनी आयकर रिटर्न में उस किराये की इनकम नहीं दर्शाते, तो ऐसे मामलों में भविष्य में टैक्स नोटिस आने की संभावना बढ़ सकती है. यानी अब किराया देने वाले और लेने वाले- दोनों की जानकारी सिस्टम में मैच की जाएगी.
पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जी क्लेम
पिछले कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने फर्जी टैक्स कटौतियों और छूटों के कई मामलों का खुलासा किया है. वर्ष 2025 में विभाग ने ऐसे संगठित गिरोहों का पर्दाफाश किया था, जो लोगों के ITR में गलत छूट और कटौती दिखाकर रिफंड दिलाते थे. इनमें HRA सहित कई धाराओं के दुरुपयोग के मामले शामिल थे. वित्त मंत्रालय के अनुसार कुछ मामलों में तो झूठे TDS रिटर्न तक दाखिल किए गए थे ताकि अधिक रिफंड हासिल किया जा सके. इसके अलावा 2024 में भी विभाग ने ऐसे उच्च मूल्य वाले मामलों की पहचान की थी, जिनमें कर्मचारी द्वारा दिखाया गया किराया और मकान मालिक द्वारा घोषित किराया मेल नहीं खा रहा था. इससे स्पष्ट हुआ कि HRA का गलत उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा था.
ईमानदारी से किराया देते हैं तो चिंता की बात नहीं
हालांकि, अगर आप वास्तव में अपने माता-पिता या जीवनसाथी को किराया दे रहे हैं और सभी दस्तावेज सही हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. बस यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि किराया बैंकिंग चैनल से दिया जाए, किराया रसीद और एग्रीमेंट मौजूद हो और मकान मालिक अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में उस आय को घोषित करे. अगर दोनों पक्ष सही तरीके से जानकारी देते हैं, तो HRA लाभ जारी रखने में कोई समस्या नहीं होगी.
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