राजेश एक्सपोर्ट्स के रेवेन्यू में 97-99% की हेराफेरी, SEBI ने प्रमोटर को ट्रेडिंग से रोका; समझें पूरा मामला

मार्केट रेगुलेटर ने राजेश मेहता को अगले आदेश तक राजेश एक्सपोर्ट्स की सिक्योरिटीज खरीदने, बेचने या उनमें डील करने से रोक दिया है. बेंगलुरु की गोल्ड रिफाइनर और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स, NSE और BSE दोनों पर लिस्टेड है.

सेबी का राजेश एक्सपोर्ट्स पर एक्शन. Image Credit: Getty image

कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है. उन पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी, जांचकर्ताओं के साथ सहयोग न करने और कंपनी के बताए गए रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप है. 3 जून को जारी 109 पन्नों के एक अंतरिम आदेश में सेबी ने कहा कि उसकी जांच और फोरेंसिक समीक्षा में पहली नजर में ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कंपनी का लगभग 97-99 फीसदी रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो सकता है. सेबी ने इन नतीजों को ‘बेहद गंभीर और अभूतपूर्व’ बताया है.

राजेश मेहता पर सख्ती

मार्केट रेगुलेटर ने राजेश मेहता को अगले आदेश तक राजेश एक्सपोर्ट्स की सिक्योरिटीज खरीदने, बेचने या उनमें डील करने से रोक दिया है. रेगुलेटर ने कंपनी को यह भी निर्देश दिया है कि वह जांचकर्ताओं के साथ पूरी तरह सहयोग करे और अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट और संबंधित-पार्टी ट्रांजैक्शन में सही और निष्पक्ष जानकारी दे. यह आदेश मार्च 2024 में मिली एक शेयरधारक की शिकायत के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें कंपनी के बही-खातों में बड़े पैमाने पर बकाया व्यापार प्राप्तियों (trade receivables) को लेकर चिंता जताई गई थी.

शुरुआती जांच के बाद, SEBI ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि को कवर करते हुए एक औपचारिक जांच शुरू की और फोरेंसिक ऑडिटर BDO India Services को नियुक्त किया.

क्या करती है कंपनी?

बेंगलुरु की गोल्ड रिफाइनर और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स, NSE और BSE दोनों पर लिस्टेड है. यह कंपनी देश और विदेश दोनों जगह सोने के प्रोडक्ट्स बेचती है और ‘शुभ ज्वेलर्स’ ब्रांड के तहत ज्वेलरी स्टोर चलाती है. सेबी केस का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि जांच के दौरान कंपनी और उसके प्रमोटर ने लगातार सहयोग नहीं किया, जैसा कि सेबी ने बताया है.

आधे-अधूरे रिकॉर्ड

रेगुलेटर के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स अहम अकाउंटिंग सिस्टम तक पहुंच देने में नाकाम रहा, उसने जरूरी फाइनेंशियल रिकॉर्ड रोककर रखे और जांचकर्ताओं और फोरेंसिक ऑडिटर द्वारा मांगे गए पूरे डॉक्यूमेंट्स जमा नहीं किए. सेबी ने पाया कि फोरेंसिक ऑडिटर कंपनी के लेन-देन के बड़े हिस्से को वेरिफाई नहीं कर पाया, क्योंकि सपोर्टिंग रिकॉर्ड या तो अधूरे थे या उपलब्ध नहीं थे.

लेन-देन की जांच

इस आदेश में विदेशों में मौजूद सब्सिडियरी और स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनियों की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं, जिनमें सिंगापुर और स्विट्जरलैंड की कंपनियां भी शामिल हैं. जांचकर्ताओं ने REL Singapore, Global Gold Refineries AG और स्विट्जरलैंड की कीमती मेटल्स को रिफाइन करने वाली कंपनी Valcambi जैसी सब्सिडियरी कंपनियों से जुड़े लेन-देन की जांच की.

सोर्स और डेस्टिनेशन का पता नहीं

सेबी ने कहा कि बुनियादी अकाउंटिंग रिकॉर्ड तक एक्सेस न होने के कारण फोरेंसिक जांच में काफी रुकावट आई और कई रिपोर्ट किए गए आंकड़ों का स्वतंत्र वेरिफिकेशन नहीं हो पाया. रेगुलेटर ने आगे आरोप लगाया कि कंपनी ने फंड को इस तरह से घुमाया कि उनके सोर्स और डेस्टिनेशन का पता न चल सके, जिससे रिपोर्ट किए गए वित्तीय विवरणों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए.

बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया रेवेन्यू

जांच के नतीजों की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने कहा कि निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तुरंत दखल देना जरूरी है. पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने अपने आदेश में कहा, ‘इस मामले में पहली नजर में जो गड़बड़ियां सामने आई हैं – जिनमें कंपनी का लगभग 97% से 99% रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, वे बेहद गंभीर और अभूतपूर्व हैं.’

राजेश मेहता को कंपनी की सिक्योरिटीज में डील करने से रोकने के अलावा, सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वह जांचकर्ताओं द्वारा मांगी गई सभी बकाया जानकारी 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं. नियामक ने कंपनी की बुक और लेन-देन की विस्तृत समीक्षा करने के लिए एक नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का भी आदेश दिया है.

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