कभी NPA से जूझ रहे थे ये 3 PSU बैंक, अब कमा रहे रिकॉर्ड मुनाफा, फिर भी शेयर क्यों हैं सस्ते?
बढ़ते NPA, भारी घाटा और कमजोर बैलेंस शीट की वजह से इन बैंकों पर भरोसा कम हो गया था. लेकिन पिछले कुछ सालो में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. अब कई सरकारी बैंक रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहे हैं, खराब लोन काफी कम हो चुके हैं और उनकी वित्तीय स्थिति पहले से मजबूत हो गई है.
3 PSU banks: एक समय था जब सरकारी बैंकों में निवेश करने से ज्यादातर निवेशक बचते थे. बढ़ते NPA, भारी घाटा और कमजोर बैलेंस शीट की वजह से इन बैंकों पर भरोसा कम हो गया था. लेकिन पिछले कुछ सालो में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. अब कई सरकारी बैंक रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहे हैं, खराब लोन काफी कम हो चुके हैं और उनकी वित्तीय स्थिति पहले से मजबूत हो गई है.
इसके बावजूद शेयर बाजार में इन बैंकों को अभी भी वैसी वैल्यू नहीं मिल रही है जैसी निजी बैंकों को मिलती है. पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंक आज भी अपनी बुक वैल्यू के आसपास या उससे कम पर कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब इन बैंकों की हालत सुधर चुकी है, तो निवेशक अब भी पूरी तरह भरोसा क्यों नहीं जता रहे हैं.
NPA संकट ने बदल दी थी तस्वीर
- करीब 10 साल पहले सरकारी बैंकों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टील, पावर और बड़ी कंपनियों को भारी मात्रा में लोन दिए थे.
- कई प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए और बड़ी संख्या में लोन फंस गए.
- इसके बाद RBI की Asset Quality Review (AQR) के जरिए बैंकों को खराब लोन की सही जानकारी दिखानी पड़ी.
- इससे कई सरकारी बैंकों का NPA तेजी से बढ़ा और निवेशकों का भरोसा टूट गया.
पंजाब नेशनल बैंक ने कैसे बदली तस्वीर?
- PNB कभी सबसे ज्यादा NPA वाले बैंकों में शामिल था.
- FY18 में बैंक का ग्रॉस NPA 18.38 प्रतिशत तक पहुंच गया था.
- अब FY26 में यह घटकर सिर्फ 2.95 प्रतिशत रह गया है.
- बैंक का नेट NPA भी घटकर 0.29 प्रतिशत हो गया है.
- FY26 में बैंक ने 18,460 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया.
- इसके बावजूद बैंक का शेयर अभी भी बुक वैल्यू से नीचे यानी करीब 0.83 गुना पर कारोबार कर रहा है.

केनरा बैंक का मजबूत प्रदर्शन
केनरा बैंक ने भी पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुधार किया है. FY26 में बैंक का ग्रॉस NPA घटकर 1.84 प्रतिशत और नेट NPA 0.43 प्रतिशत रह गया. बैंक ने FY26 में करीब 19,783 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. Return on Equity करीब 16 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इसके बावजूद बैंक का शेयर करीब 1.04 गुना बुक वैल्यू पर ही ट्रेड कर रहा है.

बैंक ऑफ बड़ौदा भी मजबूत स्थिति में
बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी शानदार वापसी की है. FY26 में बैंक ने 20,058 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया. ग्रॉस NPA घटकर 1.89 प्रतिशत रह गया, जबकि Return on Equity 15.39 प्रतिशत तक पहुंच गया. इतने मजबूत प्रदर्शन के बाद भी बैंक का शेयर करीब एक गुना बुक वैल्यू पर ही कारोबार कर रहा है.

| बैंक | Peak GNPA (FY18) | FY26 GNPA | FY26 Net Profit (excl. exceptional items) |
| पंजाब नेशनल बैंक | 18.38% | 2.95% | ₹18,460 crore |
| केनरा बैंक | 11.84% | 1.84% | ₹19,783 crore |
| बैंक ऑफ बड़ौदा | 12.26% | 1.89% | ₹20,058 crore |
फिर भी क्यों नहीं बढ़ रहा भरोसा?
सरकारी बैंकों के साथ सबसे बड़ी चुनौती उनकी पुरानी छवि है. निवेशकों को अब भी डर है कि भविष्य में सरकारी फैसलों का असर इन बैंकों के कारोबार पर पड़ सकता है.
इसके अलावा निजी बैंकों की तुलना में सरकारी बैंकों की ग्रोथ, कम लागत वाली जमा राशि और लंबे समय तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता को लेकर भी सवाल बने हुए हैं.
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