आज बाजार में क्यों डूबे 10 लाख करोड़ रुपये, ये 4 फैक्टर बने खलनायक; जानें डिटेल्स
वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. बुधवार को सेंसेक्स 1123 अंक टूटकर 79116.19 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 385 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 10 लाख करोड़ रुपये घट गया.
Stock market crash India: वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया. बुधवार को कारोबार के दौरान बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया. कारोबार के अंत तक सेंसेक्स 1123 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी 385 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई.
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
बुधवार को सेंसेक्स 1123 अंक गिरकर 79116.19 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 50 में 385 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24480.50 के स्तर पर बंद हुआ. कारोबार की शुरुआत भी कमजोर रही थी. सेंसेक्स करीब 78529 के स्तर पर खुला, जो पिछले कई महीनों का निचला स्तर रहा. वहीं निफ्टी भी करीब 24400 के नीचे फिसल गया, जो लगभग सात महीनों में पहली बार देखने को मिला.
मार्केट कैप में भारी नुकसान
बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर कुल मार्केट कैप पर भी पड़ा. बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 10 लाख करोड़ रुपये घटकर लगभग 447 लाख करोड़ रुपये रह गया. सेंसेक्स के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में Tata Steel, L&T, Bajaj Finance, Bajaj Finserv और UltraTech Cement शामिल रहे, जिनमें 3 फीसदी से 7 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर Bharti Airtel, Infosys और Tech Mahindra जैसे शेयरों में हल्की मजबूती देखी गई.
मिडिल ईस्ट तनाव बना बड़ी वजह
बाजार की गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष माना जा रहा है. अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है. इसके जवाब में ईरान ने भी कई इलाकों में जवाबी कार्रवाई की है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका असर वैश्विक बाजारों और ऊर्जा कीमतों पर लंबे समय तक पड़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में भी तेजी देखने को मिली है. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. वहीं अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी लगभग 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया. होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए किसी भी बाधा का असर कीमतों पर तुरंत पड़ता है.
रुपये में कमजोरी और विदेशी बिकवाली
रुपये में गिरावट भी बाजार की कमजोरी की एक अहम वजह रही. डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गई, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई. इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी हाल के सत्रों में भारी बिकवाली की है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने करीब 3295 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 8593 करोड़ रुपये की खरीदारी कर कुछ हद तक गिरावट को संतुलित करने की कोशिश की है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
