अमेरिका में इस दवा को मिली मंजूरी, यहां इस फार्मा स्टॉक पर दिखा असर; 16% उछला शेयर
फार्मा कंपनी Wockhardt के लिए सोमवार का दिन बड़ी उपलब्धि लेकर आया. कंपनी की नई एंटीबायोटिक दवा Zaynich को अमेरिकी नियामक US FDA से मंजूरी मिल गई है. यह दवा गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के लिए विकसित की गई है और ऐसे समय में आई है जब दुनिया एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की चुनौती से जूझ रही है.

Wockhardt Share Rally: फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी Wockhardt के लिए सोमवार का दिन दमदार साबित हुआ है. कंपनी की दशकों लंबी रिसर्च को उस वक्त बड़ी कामयाबी मिली, जब अमेरिकी रेगुलेटर ‘यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (US FDA) ने उसकी नई एंटीबायोटिक दवा ‘जैनिच’ को मंजूरी दे दी. इस ब्लॉकबस्टर खबर के आते ही शेयर बाजार में वॉकहार्ट के शेयरों को खरीदने की होड़ मच गई. सोमवार को शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर 16.21% तक रॉकेट हो गया. हालांकि, बाद में इसमें थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई, फिर भी सुबह 9:42 बजे यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 12.8% की तेजी के साथ ₹2,292 पर ट्रेड कर रहा था.
क्या है यह नई दवा और क्यों है इतनी खास?
वॉकहार्ट की यह नई दवा ‘जैनिच’ मुख्य रूप से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (cUTI) यानी मूत्र मार्ग के गंभीर संक्रमण और पाइलोनेफ्राइटिस के इलाज के लिए बनाई गई है. यह दवा उन बैक्टीरिया (ड्रग-रेसिस्टेंट ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया) पर हमला करती है, जिन पर आम दवाइयां बेअसर हो चुकी हैं.
आज के समय में जब दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक बड़ा खतरा बन चुका है और डॉक्टरों के सामने इलाज के विकल्प कम हो रहे हैं, ऐसे में वॉकहार्ट की यह खोज एक गेम-चेंजर मानी जा रही है. अमेरिका और भारत, दोनों जगहों से मंजूरी पाकर वॉकहार्ट ने वह वैज्ञानिक मुकाम हासिल कर लिया है, जहां अब तक मुट्ठी भर भारतीय फार्मा कंपनियां ही पहुंच सकी हैं.
यह भी पढ़ें: इस कंपनी को हुआ रिकॉर्ड मुनाफा, प्रमोटर्स ने भी बढ़ाई होल्डिंग, यूरिया बिजनेस से मिला बूस्ट; रखें शेयरों पर नजर
₹75,000 करोड़ का बड़ा बाजार
ग्लोबल लेवल पर बड़ी फार्मा कंपनियों ने एंटीबायोटिक रिसर्च में अपना निवेश कम कर दिया है, लेकिन वॉकहार्ट ने इस अंतर को पाटने का काम किया है. कंपनी के अनुमान के मुताबिक:
- ग्लोबल मार्केट: दुनिया भर में करीब 20 लाख मरीज इस गंभीर बैक्टीरिया संक्रमण से पीड़ित हैं. अमेरिका, यूरोप और भारत को मिलाकर इस दवा का कुल बाजार करीब $9 बिलियन (लगभग ₹75,000 करोड़) का है.
- अमेरिका और यूरोप: यहां इस दवा के लिए लगभग $7 बिलियन का बाजार मौजूद है.
- भारतीय बाजार: अकेले भारत में ऐसे करीब 11 लाख मरीज हैं, जिन्हें इस दवा की जरूरत है. भारत में इसके लिए करीब ₹17,000 करोड़ के मौके मौजूद हैं.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.