मिडिल ईस्ट तनाव से हिला शेयर मार्केट, 2 दिन में निवेशकों के ₹11 लाख करोड़ डूबे; क्या और गिरावट का खतरा?

मध्य-पूर्व तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और दो दिनों में निवेशकों के करीब ₹11 लाख करोड़ डूब गए. सेंसेक्स और निफ्टी 2.5% से ज्यादा टूटे. विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों से लंबी अवधि में बाजार स्थिर रह सकता है.

शेयर मार्केट Image Credit: Tv9 Bharatvarsh

मध्य-पूर्व में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है पिछले दो कारोबारी सत्रों में बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई है और निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹11 लाख करोड़ की कमी आ गई. इस दौरान BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में ही 2.5% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली. सोमवार को बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली जब ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में कार्रवाई की. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए. इसके बाद सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा टूट गया और एक महीने में पहली बार 81,000 के नीचे बंद हुआ. वहीं निफ्टी भी 300 अंकों से अधिक गिरकर 25,000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे पहुंच गया. ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मार्केट में अभी और भी गिरावट आ सकती है.

सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी

इस दौरान सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ने से सोने की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया. वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से सरकार के लिए वित्तीय दबाव बढ़ सकता है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईटी सेक्टर पर भी दबाव बना हुआ है क्योंकि अमेरिकी टेक कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर दिखाई दे रहा है. इसके अलावा बैंकिंग शेयरों पर भी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव का असर पड़ सकता है.

बड़ी गिरावट के संकेत नहीं

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में यह गिरावट लंबी अवधि के लिए खतरे की घंटी नहीं है. भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत मानी जा रही है. जनवरी 2026 में देश का नेट जीएसटी कलेक्शन ₹1.71 लाख करोड़ रहा जबकि आने वाले वर्षों में कंपनियों की आय में सुधार की उम्मीद की जा रही है.

बाजार फिलहाल वैश्विक घटनाओं के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहा है, लेकिन घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने हुए हैं. इसके अलावा घरेलू निवेशकों के लगातार निवेश से बाजार को सहारा मिल रहा है.

क्या करें निवेशक

ET ने एक्सपर्ट्स से हवाले से बताया है कि निवेशकों को घबराकर शेयर बेचने की जरूरत नहीं है. बल्कि यह समय अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने और मजबूत बैलेंस शीट वाली बड़ी कंपनियों पर ध्यान देने का है. वहीं एसआईपी निवेशकों को अपने निवेश को जारी रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि लंबी अवधि में ऐसी अस्थिरता ही बेहतर रिटर्न का आधार बनती है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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