बायोमेट्रिक बना ठगों का हथियार! आधार और SIM बंद कर Aadhar Card से चुपचाप निकाले जा रहे लाखों रुपये
डिजिटल पहचान ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं इससे जुड़े खतरे भी तेजी से सामने आ रहे हैं. हाल के मामलों ने दिखाया है कि एक छोटी सी लापरवाही कैसे बड़ा नुकसान बना सकती है. तकनीक, भरोसा और सतर्कता के बीच यह कहानी हर आम आदमी के लिए एक जरूरी चेतावनी है.
डिजिटल सुविधाओं ने जीवन आसान बनाया है, लेकिन इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल अब आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. गुजरात समेत कई राज्यों में सामने आए मामलों से साफ है कि साइबर ठग अब आधार से जुड़े बायोमेट्रिक सिस्टम को निशाना बना रहे हैं. फिंगरप्रिंट, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर, तीनों को जोड़कर ठग चुपचाप खाते खाली कर रहे हैं और पीड़ित को भनक तक नहीं लगती.
आधार कार्ड से किन पैतरों से पैसे ठग रहे फ्रॉड
पुलिस और साइबर क्राइम अधिकारियों के मुताबिक, ठग उंगलियों के निशान की नकल यानी क्लोन बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं. पहले यह तरीका राशन दुकानों में सरकारी अनाज की चोरी तक सीमित था, लेकिन अब सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों से पैसे निकालने के मामले सामने आ रहे हैं. कच्छ और खेड़ा जैसे ग्रामीण इलाकों में ऐसे केस मिले हैं, जहां बायोमेट्रिक छेड़छाड़ के जरिए खातों से रकम निकाल ली गई.
बायोमेट्रिक क्लोन के बाद एक और खतरनाक तरीका सामने आया है. अहमदाबाद और आसपास के इलाकों में ठग पहले पीड़ित की SIM या आधार से जुड़ी सेवाएं बंद करा देते हैं. SIM बंद होते ही बैंक ट्रांजैक्शन के SMS और OTP नहीं आते. इसी दौरान ठग बड़ी रकम निकाल लेते हैं. नडियाद के एक मामले में होटल मैनेजर के खाते से 3 लाख रुपये से ज्यादा निकल गए और उसे तब पता चला, जब बहुत देर हो चुकी थी.
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ठगों का तरीका समझें, खुद को बचाएं
पुलिस के अनुसार ठग पहले आधार की जानकारी जुटाते हैं, फिर उससे जुड़े बैंक और मोबाइल नंबर पहचानते हैं. इसके बाद आधार या SIM सेवाएं ब्लॉक कर पैसे निकालते हैं. बचाव के लिए जरूरी है कि आधार कार्ड, फिंगरप्रिंट या OTP किसी को न दें. बैंक और आधार में हमेशा वही मोबाइल नंबर लिंक रखें जो आपके पास हो. अगर अचानक SIM या सेवा बंद हो जाए, तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें.