9 महीने में 36 बुजुर्ग बने साइबर ठग के शिकार, कहीं आपके गार्जियन भी तो नहीं है इस जाल में?
अगर आपको अचानक कोई कॉल आए और खुद को पुलिस या बैंक अधिकारी बताकर जानकारी मांगे तो सावधान हो जाइए. गोवा में कुछ ऐसे ही मामलों ने पुलिस को भी चौंका दिया है. किस तरह से लोग एक क्लिक में लाखों गंवा रहे हैं, जानिए पूरी कहानी में.
इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने भले ही हमारी जिंदगी को आसान बनाया हो, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. खासकर बुजुर्ग लोग, जिनकी डिजिटल समझ सीमित है, वे अब साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान शिकार बनते जा रहे हैं. गोवा पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 9 महीनों में राज्य में 36 वरिष्ठ नागरिक ठगी का शिकार हुए हैं, जिनमें से 15 लोग ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ जैसी खतरनाक साजिश में फंसे. ऐसे में ठगों का पैंतरा आपको जानना जरूरी है ताकि आप अपने घर के बड़ों को ऐसे किसी भी गड्ढे में गिरने बचा सकें.
कैसे बनते हैं बुजुर्ग साइबर क्राइम के शिकार
बुजुर्गों का आसानी से विश्वास कर लेने वाली प्रवृत्ति, उनका अकेलापन, तकनीकी जानकारी की कमी और आर्थिक स्थिरता उन्हें साइबर अपराधियों के लिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाती है. अक्सर ठग खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस या सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर डर का माहौल बनाते हैं और पीड़ित से पैसे ठग लेते हैं.
इस स्कैम में अपराधी खुद को पुलिस या CBI अधिकारी बताकर कहते हैं कि पीड़ित के नाम पर कोई अपराध हुआ है, और जेल से बचने के लिए तुरंत जुर्माना देना होगा. डर और शर्म के चलते कई पीड़ित शिकायत तक दर्ज नहीं कराते, जिससे अपराधियों के हौसले और बढ़ते हैं.
देश भर में चल रहा है ठगी का खेल
सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, आम नागरिक भी बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं. बीते कुछ महीनों में गोवा पुलिस ने करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़े दो बड़े मामलों का खुलासा किया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने गोवा साइबर क्राइम पुलिस ने कर्नाटक के एक निवासी को गिरफ्तार किया, जो एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी में कथित रूप से शामिल था. यह मामला ओल्ड गोवा निवासी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें पीड़ित ने भारी धनराशि की ठगी का आरोप लगाया था.
वहीं नवंबर में, बेंगलुरु निवासी कुमार उत्कलसर (उम्र 50) को गोवा पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने 2.3 करोड़ रुपये की हाई-वैल्यू इनवेस्टमेंट फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया था. इस मामले में शिकायत वालपई, सत्तारी के एक निवासी द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें बताया गया कि निवेश के नाम पर भारी रकम ऐंठ ली गई.
इन दोनों मामलों से साफ है कि साइबर ठग अब राज्य की सीमाओं से परे जाकर ठगी के नेटवर्क चला रहे हैं.
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आप कैसे बच सकते हैं?
- किसी अनजान कॉलर को OTP या बैंक जानकारी कभी न दें.
- अगर कोई खुद को अधिकारी बताए और पैसे मांगे तो तुरंत कॉल काटें.
- साइबर अपराध से जुड़ी किसी भी आशंका की स्थिति में www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें.
- अपने बुजुर्ग परिजनों को डिजिटल जागरूकता दें, और समय-समय पर उन्हें सतर्क करें.
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