AI से हो रहा Meta के Ad बिजनेस को फायदा, लेकिन क्यों गूगल को हो रहा नुकसान?
AI मोड के ज़्यादा इस्तेमाल की वजह से अल्फाबेट का सर्च ऐड रेवेन्यू उम्मीद से कम रहा, जिससे ग्रोथ धीमी हो गई. मेटा ने 63.1 बिलियन डॉलर का ऐड रेवेन्यू बताया, जिसमें AI ने ऐड बनाने, टारगेटिंग और एंगेजमेंट को बेहतर बनाने में मदद की. गूगल का कहना है कि AI से चलने वाली लंबी क्वेरी से कमाई के नए मौके बन सकते हैं.
Highlights
- अल्फाबेट के Ad रेवेन्यू में आई कमी.
- मेटा का ऐड बिजनेस तेजी से बढ़ा.
- एआई मोड्स से गूगल को हुआ नुकसान.
Google की पेरेंट कंपनी Alphabet ने पिछले हफ्ते अपने कोर सर्च एडवरटाइजिंग बिजनेस में निराशाजनक नतीजों की रिपोर्ट दी. ऐड से रेवेन्यू 82 बिलियन डॉलर रहा, जो 83.4 बिलियन डॉलर की उम्मीद से कम रहा. चीफ बिजनेस ऑफिसर फिलिप शिंडलर ने सर्च एडवरटाइजिंग ग्रोथ में उम्मीद से ज्यादा कमी का कारण एआई मोड का ज्यादा इस्तेमाल बताया, जो सर्च इंजन के लिए एक चैटबॉट इंटरफेस है, जिसके साथ कंपनी अभी भी ऐड के साथ एक्सपेरिमेंट कर रही है, शिंडलर ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल में बताया कि गूगल इंटरनेशनल मार्केट में एआई मोड में ऐड देना शुरू करेगा.
गूगल बनाम मेटा का ऐड रेवेन्यू
Facebook, Instagram और WhatsApp की पेरेंट कंपनी Meta ने तीसरी तिमाही में 63.1 बिलियन डॉलर का एडवरटाइजिंग रेवेन्यू रिपोर्ट किया है. हालांकि ऐड रेवेन्यू के मामले में गूगल थोड़ा आगे रहा, लेकिन मार्क जकरबर्ग की सोशल मीडिया कंपनी अपने कोर बिजनेस में इस बड़ी सर्च इंजन के करीब आ रही है. पिछले कुछ सालों से मेटा के पक्ष में ट्रेंड रहा है और इस साल अप्रैल में यह बताया गया कि सोशल मीडिया कंपनी 2026 के आखिर तक डिजिटल एडवरटाइजिंग रेवेन्यू में गूगल को ग्लोबल लीडर के तौर पर हटाने की राह पर है.
मेटा के लिए क्या काम आया?
X पर एक पोस्ट में, कनाडा की हेल्थ मार्केटिंग एजेंसी क्लिक हेल्थ में जेनरेटिव AI के EVP साइमन स्मिथ ने कहा कि मेटा के एड बिजनेस को AI से फायदा होता है और गूगल के सर्च एड बिजनेस को इससे नुकसान होता है. उनके अनुसार, मेटा को एआई से इन वजहों से फायदा होता है:
- बेहतर परफॉर्म करने वाले बिजनेस के लिए बेहतर एड बनाना.
- उन एड्स को यूजर्स से बेहतर तरीके से मैच करना.
- बेहतर एल्गोरिदम लोगों को प्लेटफॉर्म पर ज्यादा देर तक बनाए रखना.
स्मिथ ने आगे कहा, यह सब मेटा प्लेटफॉर्म पर एडवरटाइजिंग को ज़्यादा वैल्यूएबल बनाता है, जिससे बिजनेस वहां ज़्यादा बिड लगाते हैं और एड्स पर ज्यादा खर्च करते हैं.
क्यों Google छूट रहा है पीछे?
गूगल के लिए एआई की तरफ तेजी से बढ़ना, जिसमें जेमिनी चैटबॉट और सर्च रिजल्ट में एआई समरी शामिल है, एक दोधारी तलवार की तरह रहा है. पिछले हफ्ते अर्निंग्स कॉल में, एग्जीक्यूटिव्स ने कहा कि गूगल के एआई मोड की मजबूत ग्रोथ की वजह से रेवेन्यू ग्रोथ में कमी आई है, क्योंकि कंपनी ट्रेडिशनल सर्च के मुकाबले एआई से कम ऐड रेवेन्यू कमाती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि AI बॉट्स, जिनमें ChatGPT और Claude जैसे कॉम्पिटिटर के बॉट्स भी शामिल हैं, इंटरनेट पर कई लोगों के लिए जवाबों के सोर्स के तौर पर सर्च की जगह ले रहे हैं.
Google के लिए आगे क्या?
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को उम्मीद है कि कंपनी एआई मोड में क्वेरीज करने के तरीके को अपना सकती है, जो एवरेज तौर पर ट्रेडिशनल सर्च से तीन गुना लंबी होती हैं और एक्टिविटी के नए तरीके उस क्वेरी ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं. सुंदर पिचाई ने कहा, मैं इसे एक एक्सपेंशन के मौके के तौर पर देखूंगा, कुछ साल पहले की तरह, सर्च में एआई चैट यूज केस को शामिल करने से लोगों को सर्च में ज्यादा पूछने और ज्यादा करने की इजाजत मिली, जो हमारे इस्तेमाल में दिख रहा है. CBO शिंडलर ने भी ऐसा ही कुछ कहा, उन्होंने कहा, ज्यादातर एआई मोड क्वेरीज इंक्रीमेंटल होती हैं, जो समय के साथ ज्यादा मोनेटाइज़ेशन के मौके बनाती है.
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