क्या होता है सेमीकंडक्टर, जिस पर दुनिया का दांव, भारत में बनेगा ₹10 लाख करोड़ का मार्केट, इसके झोंके में शेयर बाजार भी

भारत सरकार भी देश में ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप बनने की तैयारी कर ली है. करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि लाखों नौकरियां भी पैदा होंगी.

क्या होता है सेमीकंडक्टर Image Credit: AI/Money9 live

What is Semiconductor: इन दिनों एक छोटी सी चीज पूरी टेक्नोलॉजी और शेयर बाजार की दिशा तय कर रही है. इसका नाम है सेमीकंडक्टर. मोबाइल, लैपटॉप, कार, सैटेलाइट, यहां तक कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, हर जगह सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि दुनिया भर की बड़ी कंपनियां और देश इस सेक्टर में भारी निवेश कर रहे हैं. अब भारत भी इस रेस में शामिल हो चुका है.

भारत सरकार भी देश में ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप बनने की तैयारी कर ली है. करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि लाखों नौकरियां भी पैदा होंगी. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सेमीकंडक्टर आखिर है क्या और क्यों यह शेयर बाजार से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक को प्रभावित कर रहा है.

सेमीकंडक्टर क्या होता है

सेमीकंडक्टर ऐसा मैटेरियल होता है जो बिजली के बहाव को कंट्रोल करता है. यह पूरी तरह से कंडक्टर भी नहीं होता और पूरी तरह से इंसुलेटर भी नहीं होता. यानी यह जरूरत के हिसाब से बिजली को बहने देता है या रोकता है. यही खासियत इसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए जरूरी बनाती है.

वहीं सेमीकंडक्टर चिप एक बहुत छोटी सिलिकॉन की प्लेट होती है, जिसे माइक्रोचिप या IC भी कहा जाता है. यह नाखून जितनी छोटी होती है लेकिन इसमें लाखों ट्रांजिस्टर होते हैं. ये ट्रांजिस्टर स्विच की तरह काम करते हैं और बिजली को कंट्रोल करते हैं. इससे डेटा प्रोसेसिंग, स्टोरेज और सिग्नल का काम होता है.

कैसे काम करती है चिप

चिप में इलेक्ट्रॉन और होल के जरिए बिजली का प्रवाह होता है. ट्रांजिस्टर ऑन और ऑफ होकर 0 और 1 में डेटा बदलते हैं. इसी आधार पर कंप्यूटर और मोबाइल काम करते हैं. चिप में कई परतें होती हैं और इसमें सिलिकॉन के साथ जर्मेनियम और अन्य मटेरियल भी मिलाए जाते हैं.

सेमीकंडक्टर चिप आज हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का हिस्सा है. स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टीवी, कार, सैटेलाइट, मेडिकल उपकरण और पावर सिस्टम में इसका इस्तेमाल होता है. 5G, इंटरनेट, डेटा स्टोरेज और AI जैसे क्षेत्रों में भी यह बेहद जरूरी है.

कितना बड़ा है मार्केट

सरकार ने बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत कुल 1000 करोड़ रुपये अलॉट किए है. दिसंबर 2025 तक, छह राज्यों में ₹1.60 लाख करोड़ के 10 ISM प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. PTI के मुताबिक भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट साल 2030 तक $100-110 बिलियन (₹10 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है.

सेमीकंडक्टर के प्रकार

मुख्य रूप से दो तरह के सेमीकंडक्टर होते हैं. पहला N-type जिसमें इलेक्ट्रॉन्स ज्यादा होते हैं और बिजली आसानी से बहती है. दूसरा P-type जिसमें इलेक्ट्रॉन्स कम होते हैं और बिजली का प्रवाह कम होता है. इन दोनों को मिलाकर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाए जाते हैं.

अभी भारत सेमीकंडक्टर चिप के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. हर साल अरबों डॉलर खर्च होते हैं. अगर देश में ही चिप बनना शुरू हो जाए, तो आयात कम होगा और विदेशी मुद्रा बचेगी. साथ ही रोजगार के नए अवसर बनेंगे. सरकार ने करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है, जिससे हजारों नौकरियां बनेंगी.

कौन-कौन से देश आगे

दुनिया में ज्यादातर सेमीकंडक्टर एशिया में बनते हैं. ताइवान, दक्षिण कोरिया, चीन और जापान इसमें आगे हैं. अमेरिका और यूरोप के कुछ देश भी इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सेमीकंडक्टर अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि निवेश का बड़ा मौका बन चुका है. कंपनियां इस सेक्टर में निवेश कर रही हैं और इसका असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है. जिन कंपनियों का काम चिप से जुड़ा है, उनके शेयर में तेजी देखी जा रही है.

इसके झोंके में कैसे शेयर बाजार

आज के समय में शेयर बाजार की दिशा कई बड़े फैक्टर तय करते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी खासकर सेमीकंडक्टर सेक्टर इसका सबसे बड़ा ड्राइवर बनता जा रहा है. सेमीकंडक्टर चिप हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का जरूरी हिस्सा है, इसलिए जब इस सेक्टर में मांग बढ़ती है, तो इससे जुड़ी कंपनियों के शेयर भी तेजी दिखाते हैं. उदाहरण के तौर पर AI, 5G, इलेक्ट्रिक वाहन और डेटा सेंटर जैसी नई तकनीकों की मांग बढ़ने से चिप बनाने वाली कंपनियों का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर दिखता है.

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