शांति वार्ता के बीच चीन से हथियार मंगाने की तैयारी में ईरान! नई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच चीन द्वारा ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की संभावित तैयारी की खबर ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है. इस बीच जमीनी हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं. जानें क्या है पूरा मामला.

US Iran Tension and China Entry: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान शांति वार्ता की कोशिशों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर एक नई खुफिया रिपोर्ट ने हालात को और गंभीर बना दिया है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन जल्द ही ईरान को एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है. इस खबर ने पहले से नाजुक माहौल में नई बेचैनी पैदा कर दी है.
रिपोर्ट में क्या हुए खुलासे?
रायटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि बीजिंग, ईरान को शोल्डर-फायर्ड एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम (MANPADS) उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है. ये ऐसे पोर्टेबल हथियार होते हैं, जो हवा में उड़ते टारगेट- जैसे हेलीकॉप्टर या लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट को निशाना बना सकते हैं.
रिपोर्ट्स में यह भी संकेत दिए गए हैं कि इन हथियारों की सप्लाई सीधे न होकर तीसरे देशों के जरिए की जा सकती है, ताकि इसकी असल उत्पत्ति छिपाई जा सके. हालांकि, इस मामले पर अमेरिका, व्हाइट हाउस या चीन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो यह क्षेत्र में सैन्य संतुलन को बदल सकती है.
शांति वार्ता या रणनीतिक तैयारी?
दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू हो चुकी है. यह बातचीत करीब 6 हफ्तों से जारी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक अहम कोशिश मानी जा रही है. ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के नेतृत्व में बड़ा प्रतिनिधिमंडल पहुंचा है, जिसमें विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी शामिल हैं.
वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, उनके साथ मिडिल ईस्ट मामलों के दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी मौजूद हैं. लेकिन इन वार्ताओं के समानांतर हथियारों की संभावित आपूर्ति की खबर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या ईरान बातचीत के साथ-साथ अपनी सैन्य ताकत भी बढ़ाने में लगा है?
संघर्ष थमा नहीं, बस ठहरा है
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की बात हो रही है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण हैं. इजरायल और लेबनान के बीच झड़पें तेज हो गई हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं. यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह संघर्ष युद्ध विराम के दायरे में आता है या नहीं. ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके सहयोगियों पर हमले जारी रहे, तो वह कड़ा जवाब देगा.
वहीं, होर्मुज स्ट्रेट जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, उसपर भी ईरान की पकड़ बनी हुई है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है. वहीं, दूसरी ओर इस टकराव का असर अब खाड़ी देशों में भी दिखने लगा है. कुवैत ने अपने अहम ठिकानों पर ड्रोन हमलों की बात कही है, जबकि सऊदी अरब ने अपने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है. इससे साफ है कि यह संघर्ष धीरे-धीरे बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है.
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