Russian Oil Import: रूस से घटा भारत का तेल आयात, चीन से मिल रही कड़ी टक्कर; वेनेजुएला से बढ़ रहा आयात

भारत ने सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात घटाकर रोजाना 18.2 लाख बैरल कर दिया, जो जुलाई के मुकाबले करीब 29 फीसदी कम है. Kpler के मुताबिक, चीन की बढ़ती खरीद और रूसी तेल की सीमित उपलब्धता इसकी प्रमुख वजहें हैं. इस बीच भारत ने वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाया है. Reliance Industries की जामनगर रिफाइनरी वेनेजुएला के तेल की प्रमुख खरीदार है. जानिए भारत की तेल खरीद में क्या बदलाव आ रहा है.

सितंबर में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात घटकर 18.2 लाख बैरल प्रतिदिन रहा.

Highlights

  • सितंबर में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात घटकर 18.2 लाख बैरल प्रतिदिन रहा.
  • चीन की बढ़ती खरीद और रूसी तेल की सीमित उपलब्धता से भारत को मिल रही टक्कर.
  • वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ा रहा भारत, Reliance की जामनगर रिफाइनरी प्रमुख खरीदार.

भारत ने सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात घटा दिया है. चीन की ओर से रूसी तेल की बढ़ती खरीद के कारण उपलब्ध सप्लाई पर दबाव बढ़ा है. सितंबर में भारत ने रूस से रोजाना करीब 18.2 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया, जबकि जून और जुलाई में यह आंकड़ा 26 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा था. हालांकि, रूस अब भी भारत के लिए कच्चे तेल का एक अहम सप्लायर बना हुआ है. इस बीच भारत ने वेनेजुएला से तेल की खरीद भी बढ़ाई है, जिससे देश को कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल रही है.

रूस से तेल का आयात क्यों घटा?

Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात जुलाई के करीब 25.7 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर सितंबर में 18.2 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. यानी इसमें करीब 29 फीसदी की गिरावट आई. अगस्त में भारत ने रूस से रोजाना करीब 20.2 लाख बैरल तेल खरीदा था.

Kpler के सीनियर मैनेजर सुमित रिटोलिया के मुताबिक, इस गिरावट को केवल अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाने की धमकियों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. रूसी तेल की सीमित उपलब्धता और चीन की ओर से बढ़ती मांग भी इसके अहम कारण हैं.

रूसी तेल के लिए चीन से मिल रही टक्कर

सितंबर में चीन ने रूस से रोजाना करीब 14.9 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया. हाल के महीनों में चीनी रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई है. Kpler के मुताबिक, ईरान से तेल की सप्लाई तक पहुंच में कमी भी चीन की ओर से रूसी तेल की बढ़ती खरीद की एक वजह रही है.

ऐसे में भारत को रूसी तेल की उपलब्धता के लिए चीन से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. Kpler के अनुसार, अक्टूबर में भारत का रूसी तेल आयात रोजाना 18 लाख से 19 लाख बैरल के आसपास रहने की उम्मीद है, जो सितंबर के स्तर के करीब होगा.

वेनेजुएला से बढ़ा कच्चे तेल का आयात

रूस से तेल की खरीद घटने के बीच भारत ने वेनेजुएला से आयात बढ़ाया है. Kpler के मुताबिक, अगस्त में वेनेजुएला ने भारत को रोजाना करीब 2.5 लाख बैरल और सितंबर में करीब 2.57 लाख बैरल तेल का निर्यात किया. इसके मुकाबले अमेरिका को वेनेजुएला से क्रमशः करीब 4.52 लाख और 5.63 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला.

Kpler के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में भारत पहुंचने वाले वेनेजुएला के कच्चे तेल की मात्रा करीब 2.87 लाख बैरल प्रतिदिन थी. निर्यात और भारत पहुंचने वाले तेल के आंकड़ों में अंतर जहाजों की यात्रा में लगने वाले समय के कारण हो सकता है.

Reliance की रिफाइनरी के लिए क्यों अहम है वेनेजुएला का तेल?

भारत में वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार Reliance Industries का जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है. इसकी रिफाइनिंग क्षमता और तकनीकी व्यवस्था भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के अनुकूल है.

वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला हो सकता है. कुछ ग्रेड में एसिड की मात्रा भी अधिक होती है, जिससे इसे प्रोसेस करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. इसलिए भारत की सभी रिफाइनरियां इस तेल को बड़े पैमाने पर प्रोसेस करने के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हैं.

सरकारी रिफाइनरियों ने अब तक वेनेजुएला का तेल सीमित मात्रा में खरीदा है. Kpler ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की पारादीप रिफाइनरी तक ऐसे तेल की खेप पहुंचने का भी उल्लेख किया है.

तेल आयात को डायवर्सिटी ला रहा भारत

भारत की रणनीति रूसी तेल को पूरी तरह छोड़ने की नहीं, बल्कि आयात के स्रोतों में विविधता लाने की है. रूस के अलावा भारत मध्य पूर्व और अमेरिका महाद्वीप के दूसरे देशों से भी कच्चे तेल की खरीद कर रहा है.

Kpler का अनुमान है कि अक्टूबर में भारत पहुंचने वाले वेनेजुएला के तेल की मात्रा करीब 3.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकती है. हालांकि, लंबी समुद्री यात्रा के कारण अक्टूबर के अंत में आने वाली कुछ खेप नवंबर तक पहुंच सकती हैं.

इस तरह भारत के सामने रूसी तेल की उपलब्धता और कीमतों के अलावा रिफाइनरियों की जरूरतें भी अहम हैं. आने वाले महीनों में तेल की खरीद का रुझान इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग देशों से कितनी सप्लाई उपलब्ध होती है और भारतीय रिफाइनरियां किस तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती हैं.