क्या है क्लस्टर बम जिससे डरे अमेरिका और इजरायल, ईरान ताबड़तोड़ कर रहा हमले; आयरन डोम भी हो रहा फेल
मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान क्लस्टर म्युनिशन एक नए खतरे के रूप में सामने आया है. इजरायल का आरोप है कि ईरान ने उसके शहरों पर इस हथियार का इस्तेमाल किया है. क्लस्टर म्युनिशन हवा में फटकर दर्जनों छोटे बमों में बदल जाते हैं और बड़े इलाके में फैल जाते हैं.
Cluster Bomb: पश्चिम एशिया में जारी इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान एक नया और खतरनाक हथियार चर्चा में आ गया है. इजरायल ने आरोप लगाया है कि ईरान ने उसके शहरों पर क्लस्टर म्युनिशन का इस्तेमाल किया है. इस हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत की खबर सामने आई है. क्लस्टर म्युनिशन ऐसे हथियार होते हैं जो हवा में फटकर दर्जनों छोटे बमों में बदल जाते हैं और बड़े इलाके में फैल जाते हैं. यही वजह है कि इनसे बचाव करना बेहद मुश्किल होता है और आम नागरिकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है.
क्या होते हैं क्लस्टर म्युनिशन (बम)
क्लस्टर म्युनिशन एक ऐसा हथियार होता है जिसमें एक कंटेनर के अंदर कई छोटे बम यानी सबम्युनिशन होते हैं. यह कंटेनर हवा में खुलता है और दर्जनों या कभी कभी सैकड़ों छोटे बम एक बड़े इलाके में फैल जाते हैं. अलग अलग मॉडल में इनकी संख्या कुछ दर्जन से लेकर 600 से ज्यादा तक हो सकती है. इन्हें विमान, मिसाइल या तोप के जरिये दागा जा सकता है. इनका मुख्य उद्देश्य एक बड़े इलाके में फैले सैन्य ठिकानों को एक साथ निशाना बनाना होता है.
आयरन डोम के लिए क्यों है चुनौती
इजरायल का आयरन डोम सिस्टम छोटे रॉकेट और कम ऊंचाई से आने वाले हमलों को रोकने के लिए बनाया गया है. लेकिन क्लस्टर म्युनिशन अलग तरह का खतरा पैदा करते हैं. जब यह हथियार हवा में फटता है तो इसके अंदर के छोटे बम अलग अलग दिशाओं में फैल जाते हैं. ऐसे में हर छोटे बम को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से इजरायल के लिए यह एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गया है.
नागरिकों के लिए बड़ा खतरा
क्लस्टर म्युनिशन को मानवीय नजरिए से बहुत खतरनाक हथियार माना जाता है. इतिहास बताता है कि इनमें से बड़ी संख्या में छोटे बम जमीन पर गिरने के बाद भी नहीं फटते. अनुमान है कि 10 से 40 फीसदी तक बम बिना फटे रह सकते हैं. ये बम बाद में किसी के छूने या हिलाने पर अचानक फट सकते हैं. इससे आम लोगों खासकर बच्चों और किसानों के लिए कई साल तक खतरा बना रहता है.
युद्ध खत्म होने के बाद भी रहता है खतरा
इन हथियारों का असर युद्ध खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है. जमीन पर पड़े बिना फटे बम राहत और पुनर्निर्माण के काम को मुश्किल बना देते हैं. कई जगह खेती करना भी खतरनाक हो जाता है. विस्थापित लोग जब अपने घर लौटते हैं तो उनके सामने भी जान का खतरा बना रहता है. यही वजह है कि कई देश इन हथियारों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताते रहे हैं.
कितने देश बनाते और रखते हैं यह हथियार
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार करीब 34 देशों ने अब तक 210 से ज्यादा तरह के क्लस्टर म्युनिशन बनाए हैं. दुनिया के कम से कम 75 देशों के पास इनका रिजर्व मौजूद है. इन हथियारों के लाखों यूनिट और अरबों छोटे बम अलग अलग देशों के स्टॉक में हैं. हालांकि कुछ देशों ने हाल के वर्षों में नई नीतियां बनाकर इनके उत्पादन को बंद करने का फैसला भी लिया है.
तकनीक के बावजूद पूरी तरह सुरक्षित नहीं
कुछ नए मॉडल के क्लस्टर म्युनिशन में सेल्फ डेस्ट्रक्ट सिस्टम जोड़ा गया है. इसका उद्देश्य यह होता है कि अगर बम जमीन पर गिरकर नहीं फटे तो कुछ समय बाद खुद नष्ट हो जाएं. लेकिन जानकारों का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है. असली युद्ध की स्थिति में इनका फेल होने का खतरा अभी भी बना रहता है और कई बम जमीन पर बिना फटे रह जाते हैं. यही कारण है कि इन हथियारों को लेकर वैश्विक स्तर पर लगातार बहस चल रही है.
