खाना पकाने को भी मोहताज होंगे पाकिस्तानी! कतर ने रोकी LNG सप्लाई, ईरान-इजरायल युद्ध में बुरा फंसा पाक
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब पाकिस्तान पर साफ दिखने लगा है. कतर की ओर से LNG सप्लाई पर फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किए जाने के बाद पाकिस्तान गंभीर ऊर्जा संकट के मुहाने पर पहुंच गया है. सीमित गैस भंडार और आयात पर भारी निर्भरता के कारण देश में रसोई गैस, बिजली उत्पादन और ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.
Qatar Stops LNG Supply Pakistan: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब पड़ोसी देश पाकिस्तान पर तेजी से दिखने लगा है. एनर्जी सप्लाई पर निर्भरता और सीमित भंडार के कारण पाकिस्तान एक बड़े एनर्जी संकट के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है. हालात इतने गंभीर हो सकते हैं कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में रसोई गैस से लेकर बिजली प्रोडक्शन तक प्रभावित हो सकता है. दरअसल, पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता की खबर यह है कि कतर ने उसे LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लाई को लेकर फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किया है. पाकिस्तान के फेडरल एनर्जी मिनिस्टर अली परवेज मलिक ने खुद इस बात की पुष्टि की है. उनका कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती है तो पाकिस्तान में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है, क्योंकि देश पहले से ही सीमित गैस और ईंधन भंडार के सहारे चल रहा है.
कतर को क्यों उठाना पड़ा ये कदम?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच LNG सप्लाई पहले ही प्रभावित हो चुकी थी. रिपोर्ट्स के अनुसार क्षेत्र में सैन्य टकराव के दौरान कतर के कुछ गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के आसपास हमले और सुरक्षा जोखिम बढ़ने के बाद LNG उत्पादन और निर्यात में बाधा आई. इसके चलते कतर ने कई शिपमेंट रोक दिए हैं और पाकिस्तान को भेजे जाने वाले कार्गो पर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है. अब फोर्स मेज्योर नोटिस जारी होने से साफ संकेत मिल रहा है कि सप्लाई पूरी तरह बाधित हो सकती है.
99 फीसदी गैस के लिए पाक की है निर्भरता
पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि उसकी LNG जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से ही आता है. ऊर्जा बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार कतर और संयुक्त अरब अमीरात मिलकर पाकिस्तान की लगभग 99 फीसदी LNG जरूरत को पूरा करते हैं. यानी अगर इन देशों से सप्लाई बाधित होती है तो पाकिस्तान के पास तुरंत कोई मजबूत विकल्प मौजूद नहीं है.
भारत के लिए स्थिति उतनी मुश्किल नहीं!
इसी क्षेत्र से बांग्लादेश और भारत भी LNG आयात करते हैं, लेकिन दोनों देशों की स्थिति पाकिस्तान की तुलना में थोड़ी बेहतर है. आंकड़ों के मुताबिक कतर और यूएई बांग्लादेश की लगभग 72 फीसदी और भारत की करीब 53 फीसदी LNG जरूरत पूरी करते हैं. हालांकि भारत के पास अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से गैस खरीदने जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास इतनी छूट नहीं है.
सीमित भंडार ने बढ़ाई पाक की टेंशन
पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके सीमित भंडार हैं. ऊर्जा विश्लेषण फर्मों के मुताबिक पाकिस्तान के पास गैस और तेल का स्टॉक बहुत कम समय के लिए ही उपलब्ध है. ऐसे में अगर नई आपूर्ति समय पर नहीं पहुंचती तो देश में गैस की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को LNG के इस्तेमाल पर पाबंदियां लगाने, उद्योगों की खपत कम करने या गैस की कीमतें बढ़ाने जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं.
बिजली प्रोडक्शन में आ सकती है दिक्कत
इस संकट का असर सिर्फ गैस तक सीमित नहीं रहेगा. पाकिस्तान में बिजली प्रोडक्शन का बड़ा हिस्सा गैस और आयातित ईंधन पर निर्भर है, इसलिए LNG की कमी का सीधा असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. अगर गैस की कमी बढ़ती है तो देश को बिजली प्रोडक्शन के लिए कोयले पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे लागत और प्रदूषण दोनों बढ़ेंगे. हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में यह भी माना गया है कि पाकिस्तान में तेजी से बढ़ रही सोलर एनर्जी कैपेसिटी बिजली संकट के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है. लेकिन अल्पकाल में यह समाधान पूरी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता.
कच्चे तेल के मोर्चे पर भी मुश्किल में पाक
इसके अलावा पाकिस्तान के सामने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. देश के पास सीमित पेट्रोलियम रिजर्व है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण नए कार्गो की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो सकता है. दूसरी तरफ ईरान से मिलने वाली ऊर्जा सप्लाई भी मौजूदा हालात में बाधित हो चुकी है, जिससे संकट और गहरा सकता है.
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