जब भी अमेरिका खाड़ी देशों पर करता है हमला, कितने दिन चलता है युद्ध? इस बार क्या होगी टाइमलाइन?
अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी को ईरान पर किए गए बड़े सैन्य हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ गया है. इतिहास बताता है कि इस क्षेत्र में अमेरिका के सैन्य अभियान कई बार कुछ हफ्तों से लेकर कई सालों तक चलते रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मौजूदा ईरान-अमेरिका-इजरायल टकराव कितना लंबा खिंच सकता है और इसका असर पूरे क्षेत्र पर कितना व्यापक हो सकता है.
Middle East Tension and US Interventions: मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के दौर में प्रवेश कर चुका है. कई दिनों की बयानबाजी, चेतावनियों और सैन्य हलचल के बाद 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े स्तर पर सैन्य हमला किया. इस ऑपरेशन के तहत तेहरान समेत कई अहम सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और हवाई हमलों से निशाना बनाया गया. इस कार्रवाई से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते रहे थे और कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की प्राथमिकता है. लेकिन यहां पर हम मौजूदा लड़ाई की जानकारी नहीं दे रहे हैं, बल्कि एतिहासिक घटनाओं के आधार पर एक तस्वीर पेश करना चाह रहे हैं कि जब भी अमेरिकी खाड़ी देशों से उलझता है तब वह लड़ाई कितने दिनों तक चलती है.
अमेरिका और मिडिल ईस्ट!
मौजूदा हालात को समझने के लिए अगर इतिहास पर नजर डालें तो मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों का एक खास पैटर्न दिखाई देता है. अक्सर ये अभियान किसी खास खतरे या घटना के जवाब में शुरू होते हैं, लेकिन कई बार इनका असर वर्षों तक चलता है. इसलिए यह सवाल अहम हो जाता है कि अगर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसकी टाइमलाइन कितनी लंबी हो सकती है.
लेबनान संकट में अमेरिका
1980 के दशक में लेबनान संकट के दौरान अमेरिका ने क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप किया था. 1982 में इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद अमेरिका ने भूमध्यसागर से नौसैनिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए कई ठिकानों पर बमबारी की. यह सैन्य कार्रवाई तकरीबन 3 महीनों तक चली, लेकिन इसके प्रभाव ने लेबनान की राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लंबे समय तक प्रभावित किया.
1991 और अमेरिका इराक
1991 का खाड़ी युद्ध अमेरिका के नेतृत्व में 35 देशों के गठबंधन द्वारा इराक के खिलाफ लड़ा गया एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियान था. यह संघर्ष 2 अगस्त 1990 को इराक द्वारा कुवैत पर कब्जा करने के बाद शुरू हुआ. इसके जवाब में अमेरिका ने सहयोगी देशों के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू की. ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म के तहत इराकी सेना को कुवैत से पीछे हटने पर मजबूर किया गया. यह युद्ध अगस्त 1990 से फरवरी 1991 तक चला. हालांकि औपचारिक लड़ाई खत्म होने के बाद भी इराक पर प्रतिबंध, नो-फ्लाई जोन और सैन्य दबाव का दौर कई वर्षों तक जारी रहा.
सद्दाम हुसैन का पतन
2003 में अमेरिका ने एक बार फिर इराक के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे ऑपरेशन इराकी फ्रीडम (Operation Iraqi Freedom) कहा गया. अमेरिका और उसके सहयोगियों ने दावा किया कि इराक के पास व्यापक विनाश के हथियार (WMD) हैं और वह आतंकवादी संगठनों के लिए खतरा बन सकता है. मार्च 2003 में शुरू हुए इस हमले के कुछ ही हफ्तों के भीतर अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं बगदाद तक पहुंच गईं और सद्दाम हुसैन की सरकार गिर गई. हालांकि इसके बाद भी सद्दाम कुछ महीनों तक छिपे रहे, लेकिन दिसंबर 2003 में अमेरिकी सेना ने उन्हें इराक के तिकरित के पास एक ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया. बाद में इराकी अदालत में मुकदमा चलाया गया और 2006 में उन्हें फांसी की सजा दी गई. सद्दाम के हटने के बाद इराक में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा का दौर जारी रहा, जिसने पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को गहराई से प्रभावित किया.
अफगानिस्तान में 20 वर्षों तक चला अमेरिकी सैन्य अभियान
अफगानिस्तान का युद्ध भी यह दिखाता है कि अमेरिका के सैन्य अभियान कितने लंबे खींच सकते हैं. 2001 में शुरू हुआ यह युद्ध लगभग 20 साल तक चला. यह आधुनिक इतिहास का सबसे लंबा अमेरिकी युद्ध माना जाता है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया. 2011 में लीबिया में नाटो और अमेरिका के हस्तक्षेप ने भी एक और उदाहरण पेश किया. कुछ महीनों के भीतर गद्दाफी सरकार गिर गई, लेकिन उसके बाद देश गृहयुद्ध और राजनीतिक विभाजन में फंस गया, जिसका असर आज भी जारी है.
अमेरिका और लीबिया
इसके बाद 1986 में अमेरिका ने लीबिया पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. त्रिपोली और बेंगाजी जैसे शहरों को निशाना बनाया गया. यह ऑपरेशन कुछ दिनों का था, लेकिन इससे पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका की राजनीति में गहरा असर पड़ा और लीबिया के साथ पश्चिमी देशों के संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे.
क्या होता है इस तरह की लड़ाई का पैटर्न?
इस तरह के युद्ध आम तौर पर तीन चरणों में आगे बढ़ते हैं. पहला चरण तेज हवाई हमलों और मिसाइल हमलों का होता है, जो कुछ दिनों या हफ्तों तक चलता है. दूसरा चरण प्रॉक्सी युद्ध का होता है, जिसमें क्षेत्रीय संगठन और सहयोगी देश शामिल हो जाते हैं और संघर्ष महीनों या वर्षों तक जारी रह सकता है. तीसरा चरण सबसे गंभीर होता है, जब युद्ध पूरी तरह क्षेत्रीय या वैश्विक संकट में बदल जाता है और इसका असर एनर्जी मार्केट, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है.
मौजूदा लड़ाई कब-तक चल सकती है?
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच मौजूदा टकराव भी इसी दिशा में बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते और सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ता है, तो यह संघर्ष सिर्फ कुछ दिनों की लड़ाई नहीं बल्कि मध्य-पूर्व की नई लंबी जंग का रूप भी ले सकता है. मौजूदा समय में भी कई रिपोर्ट में इस बात का दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच का यह युद्ध जून से लेकर सितंबर तक खींच सकता है. फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं- क्या यह तनाव सीमित सैन्य कार्रवाई तक सिमट जाएगा या फिर मिडिल ईस्ट एक और बड़े और लंबे युद्ध के दौर में प्रवेश करने वाला है.
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