Dollar vs Euro : डॉलर के राज को खत्म कर देगा यूरो , ट्रंप की नीतियां या और कोई है इसकी बड़ी वजह; Asian Euro-Tilt Explained!
क्या अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व का युग अब समाप्त होने की ओर है? यही बड़ा सवाल आज वैश्विक बाजारों में उठ रहा है. एशिया-प्रशांत देशों में एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है, जिसमें सरकारें और कॉरपोरेट अपने अंतरराष्ट्रीय कर्ज के लिए डॉलर के बजाय यूरो को चुन रहे हैं.
इसके पीछे कई अहम वजहें बताई जा रही हैं. ट्रंप की संभावित नीतियों से पैदा हुई अनिश्चितता, फेडरल रिज़र्व की लगातार बढ़ती ब्याज दरें, डॉलर की बढ़ती अस्थिरता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव—ये सभी कारण मिलकर देशों को वैकल्पिक हार्ड करेंसी की ओर धकेल रहे हैं. यूरो इस समय एक स्थिर विकल्प की तरह उभर रहा है, खासकर उन देशों के लिए जो जोखिम कम करना चाहते हैं.
क्या 2025 वह साल बन सकता है जब वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में डॉलर को पहली बार इतने व्यापक स्तर पर चुनौती मिले? क्या दुनिया अब एक मल्टी-करेंसी बैलेंस की ओर बढ़ रही है, जहां डॉलर के साथ यूरो और अन्य करेंसी भी बड़ी भूमिका निभाएंगी?
इस बदलते आर्थिक परिदृश्य, उभरते Geo-Financial Trends और इससे ग्लोबल मार्केट्स पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए देखें यह डीटेल्ड एनालिसिस.
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