ट्रंप टैरिफ पर घमासान! FedEx ने अमेरिकी सरकार पर ठोका मुकदमा, मांगा पूरा रिफंड, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठाया कदम

FedEx ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के इमरजेंसी टैरिफ के खिलाफ सरकार पर मुकदमा दायर किया है. साथ ही सभी वसूले गए शुल्क का रिफंड मांगा है, यह कदम Supreme Court of the United States की ओर से टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद उठाया गया है. इससे 170 अरब डॉलर से ज्यादा वसूली पर अब रिफंड को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है. फिलहाल 1500 से ज्यादा केस लंबित हैं और यदि अदालतें कंपनियों के पक्ष में फैसला देती हैं तो अमेरिकी सरकार को अरबों डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं.

FedEX asks full refund to USA government Image Credit: canva

FedEx asks full refund: अमेरिका में ट्रंप सरकार की ओर से लगाए गए टैरिफ को लेकर कानूनी घमासान तेज हो गया है. दुनिया की दिग्गज लॉजिस्टिक्स कंपनी FedEx ने अमेरिकी सरकार के खिलाफ मुकदमा ठोक दिया है. साथ ही उन सभी टैरिफ का पूरा रिफंड मांगा है, जो अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इमरजेंसी आर्थिक शक्तियों के तहत लगाए थे.

यह मामला यूनाइटेड स्‍टेट्स ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर किया गया है. फेडएक्‍स ने ये मुकदमा सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद किया. दरअसल हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ऑफ द यूनाइटेड स्‍टेट्स ने 6–3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा था कि इमरजेंसी कानून के तहत लगाए गए ये टैरिफ गैरकानूनी थे.

क्या है पूरा मामला?

FedEx और उसकी सहयोगी कंपनी FedEx Logistics ने 11 पन्नों की शिकायत में कहा है कि उन्होंने जो भी IEEPA टैरिफ सरकार को चुकाए हैं, उनका पूरा पैसा ब्याज समेत वापस किया जाए. हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि उसने कुल कितना भुगतान किया है. बता दें ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत ज्यादातर अमेरिकी ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ बढ़ाए थे. सुप्रीम कोर्ट का कहना कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वैधानिक अधिकारों से ज्यादा कदम उठाया है.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्‍पणी

सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के आधार पर टैरिफ को अवैध ठहराया है, लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि क्‍या कंपनियों के अब तक चुकाए गए 170 अरब डॉलर से ज्यादा टैरिफ का रिफंड मिलेगा. जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने चेतावनी दी कि रिफंड प्रक्रिया अव्यवस्थित हो सकती है. क्‍योंकि ट्रंप ने संकेत दिया कि भुगतान तुरंत नहीं होगा और मामला दो साल तक अदालतों में उलझ सकता है.

पुरानी दलील बनेगी मुसीबत

पिछले साल ट्रेड कोर्ट ने टैरिफ को अवैध बताया था, तब जस्टिस डिपार्टमेंट ने दलील दी थी कि अपील के दौरान टैरिफ वसूली जारी रहने दी जाए क्योंकि अगर सरकार हारती है तो कंपनियों को ब्याज समेत रिफंड मिल जाएगा. अब कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अपने ही पुराने तर्क से बंध सकती है. दिसंबर में ट्रेड कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने संकेत दिया था कि सरकार अपने पहले के आश्वासन से पलट नहीं सकती.

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1500 से ज्यादा मुकदमे लंबित

विश्लेषण के मुताबिक फिलहाल 1500 से ज्यादा रिफंड केस लंबित हैं. अनुमान है कि 2025 के अंत तक 3 लाख से ज्यादा इंपोर्टर्स ने ये टैरिफ चुकाए थे. यानी अगर रिफंड की राह खुलती है तो अरबों डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है. हालांकि जस्टिस डिपार्टमेंट का कहना है कि वह खास शिकायतों को चुनौती देने का अधिकार रखता है. यानी सरकार हर दावे को अलग-अलग जांच सकती है.

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