US-Iran Talks: पाक में शांति वार्ता का दूसरा राउंड खत्म, कितनी बनी सहमति? शर्तों और तनाव में उलझा मामला
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के पहले दिन का पहला दौर बिना किसी बड़े नतीजे के खत्म हो गया. ट्रंप के सख्त रुख, ईरान की शर्तों और जमीनी तनाव के बीच बातचीत जारी है, लेकिन भरोसे की कमी अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

US Iran Talk Pakistan: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू हुई हाई-लेवल शांति वार्ता ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. हालांकि बातचीत की शुरुआत से पहले ही कई अड़चनें सामने आईं, जिससे यह साफ हो गया कि रास्ता आसान नहीं होने वाला. देरी, शर्तें और आपसी अविश्वास, इन सबके बीच आखिरकार बातचीत शुरू तो हुई, लेकिन अनिश्चितता अब भी बनी हुई है. इससे इतर, यह बात भी सामने आई है कि दोनों देशों के बीच होने वाली शांति वार्ता का दूसरा राउंड समाप्त हो चुका है. Aljazeera ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा कि दोनों ही देशों ने मुख्य मुद्दों के लिखित दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया है.
ट्रंप ने साफ की स्थिति!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की कि वार्ता आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है, लेकिन उनके बयान में भरोसे से ज्यादा सतर्कता नजर आई. उन्होंने साफ कहा कि उन्हें नहीं पता कि बातचीत किस दिशा में जाएगी और वे बहुत कम समय में यह परख लेंगे कि ईरान ईमानदारी से बातचीत कर रहा है या नहीं. साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर कूटनीति नाकाम होती है, तो अमेरिका अपनी रणनीति बदलने से पीछे नहीं हटेगा.
वार्ता में कौन-कौन शामिल?
इस वार्ता में दोनों देशों के शीर्ष नेता और अधिकारी शामिल हुए. अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर मौजूद रहे, जबकि ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मोर्चा संभाला. करीब दो घंटे चली शुरुआती बातचीत के बाद इसे रोक दिया गया, जिससे संकेत मिला कि कई मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है. पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई और उसकी सैन्य नेतृत्व भी इसमें शामिल रहा.
बनी रही भ्रम की स्थिति
वार्ता के समानांतर जमीनी हालात ने भी भ्रम की स्थिति पैदा की. एक तरफ अमेरिका ने दावा किया कि उसके जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं, वहीं ईरान और पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज कर दिया. यह स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद अहम मार्ग है और इस पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है.
विदेशों में जमी संपत्ति को रिलीज कर रहा यूएस?
तनाव तब और बढ़ गया जब यह खबर सामने आई कि अमेरिका ईरान की विदेशों में जमी संपत्तियों को रिलीज करने पर विचार कर रहा है. हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया, जिससे दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी एक बार फिर उजागर हो गई. ईरान ने इसे बातचीत की गंभीरता का संकेत बताया था, लेकिन अमेरिका की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और उलझा दिया.
क्या रही ईरान की शर्तें?
ईरान ने बातचीत के लिए कुछ सख्त शर्तें भी रखी हैं. इनमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की गारंटी, जमे हुए फंड की वापसी, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और पूरे क्षेत्र में संघर्ष विराम शामिल हैं. खास तौर पर लेबनान में जारी लड़ाई को लेकर ईरान का रुख बेहद सख्त है. उसका कहना है कि जब तक वहां हिंसा नहीं रुकती, तब तक किसी बड़े समझौते की उम्मीद नहीं की जा सकती. हालांकि अमेरिका और इजरायल इस मुद्दे को अलग मानते हैं.
लेबनान में बिगड़ते हालात
इस बीच लेबनान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. इजरायली हमले जारी हैं, जबकि हिजबुल्लाह भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है. इससे यह साफ है कि क्षेत्रीय तनाव अभी थमा नहीं है, बल्कि कई मोर्चों पर फैल चुका है. खाड़ी देशों तक इसका असर दिखने लगा है, जिससे पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ रही है. ईरान के भीतर भी इस वार्ता को लेकर भरोसा कम ही नजर आ रहा है. सरकारी प्रवक्ता ने साफ कहा कि देश बातचीत तो करेगा, लेकिन पूरी सतर्कता के साथ. उनका बयान, “हम ट्रिगर पर उंगली रखकर बातचीत कर रहे हैं”. यह दिखाता है कि ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है.
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