Chilli price fall: चीन के चलते 6000 रुपये सस्ती हुई मिर्च, जानें ताजा मंडी भाव

भारत 27.82 लाख टन मिर्च उत्पादन के साथ दुनिया में सबसे आगे है. जबकि देश में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सबसे बड़े मिर्च उत्पादक राज्य हैं. साल 2023-24 में, तेलंगाना मिर्च के रकबे में 3.92 लाख एकड़ के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जबकि उत्पादन में 7.94 लाख टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा. लेकिन वैश्विक स्तर पर पैदावार 3,229 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के मुकाबले 2,021 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से काफी कम है.

मिर्च की कीमतों में 35 फीसदी की गिरावट. Image Credit: tv9

Chilli latest price: चीन के चलते तेलंगाना में मिर्च की कीमतों में 35 फीसदी की गिरावट आई है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. जिस मिर्च की कीमत पिछले साल जनवरी महीने में 19,000 रुपये प्रति क्विंटल थी, इस साल उसका रेट गिरकर 12000 से 13000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. यानी मिर्च की कीमत में 6000 रुपये की कमी आई है. ऐसे में मिर्च उत्पादक किसानों का कहना है कि कीमत में इसी तरह से गिरावट जारी रही, तो मुनाफा कमाना तो दूर लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा.

बिजनेस लाइन के मुताबिक, प्रो. जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय का कहना है कि जनवरी से मार्च महीने के दौरान फसल कटाई के समय मिर्च की कीमत 14500 से 16500 रुपये प्रति क्विंटल रह सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि वैश्विक मांग में कमी आने खासकर चीन से कम डिमांड के चलते मिर्च की कीमतों में गिरावट आई है.

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मिर्च के निर्यात में गिरावट

तेलंगाना सरकार की एक रिपोर्ट में राष्ट्रीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सितंबर 2024 में लाल मिर्च का निर्यात 36,276 टन था, जो पिछले महीने से 4.09 प्रतिशत की कमी दर्शाता है. मसाला बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अक्टूबर 2024 के दौरान मिर्च का निर्यात 3.31 लाख टन था, जिसकी कीमत 645.15 मिलियन डॉलर थी, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 3.04 लाख टन मिर्च का निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत 757.84 मिलियन डॉलर थी. चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में मिर्च के निर्यात में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है.

किसानों की सरकार से बड़ी मांग

इसके चलते तेलंगाना के किसानों ने केंद्र और राज्य सरकारों से 20,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपज खरीदने का आग्रह किया है. मिर्च किसान और तेलंगाना रायथु संघम के वरिष्ठ नेता बोंथु रामबाबू ने कहा कि बेहतर कीमतों की उम्मीद में कई किसानों ने अपनी उपज कोल्ड स्टोरेज भंडारित कर दिया है. लेकिन कीमतों में कोई बढ़ोतरी के संकेत न देखकर, उन्हें इसे कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. ऐसे में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

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किसानों का प्रदर्शन

पिछले कुछ वर्षों में राज्य में मिर्च का क्षेत्रफल 4.50 लाख एकड़ से घटकर 2.34 लाख एकड़ रह गया है. दूसरी ओर, कीटों और बीमारियों के कारण फसल को 40 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है. खम्मम जिले के लालापुरम क्षेत्र में मिर्च की खेती करने वाले किसानों ने बुधवार को अनुचित कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्होंने 20,000 रुपये प्रति क्विंटल रेट सुनिश्चित करने की मांग की.

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