चावल व्यापारियों की बल्ले-बल्ले, चावल के निर्यात शुल्क में सरकार ने की कटौती!

केंद्र सरकार ने गैर-बासमती उबले चावल के निर्यात शुल्क में कटौती की है जिससे चावल व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है. इस फैसले से चावल के निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद है.

क्या पंजाब के चावल खाने योग्य नहीं हैं. आखिर राज्य क्यों कर हैं लेने से इनकार. Image Credit: Chadchai Ra-ngubpai/Moment/Getty Images

चावलों के व्यापारियों के लिए अच्छी खबर है. केंद्र सरकार ने गैर बासमती उसना चावलों एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती की है. शुक्रवार की देर रात सरकार ने उबले चावल पर निर्यात शुल्क को 20% से घटाकर 10% कर दिया है. सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर इस बात की जानकारी दी. यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देश में भंडार बढ़ गया है और किसान आने वाले सप्ताह में नई फसल की कटाई के लिए तैयार हैं.

सरकार ने क्यों बढ़ाया था निर्यात शुल्क

एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती से भारत के एक्सपोर्ट प्राइस कम होंगे, शिपमेंट में वृद्धि होगी. साथ ही यह फैसला थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को भी अपने चावल का एक्सपोर्ट प्राइस कम करने के लिए दबाव बनाएगा.

साल 2023 में कम बारिश के चलते चावल की देश में चावल की फसल प्रभावित हुई थी जिसके चलते सरकार ने उबले चावल पर 20 फीसदी ड्यूटी लागू की. अधिसूचना में कहा गया है कि सरकार ने भूरे चावल और भूसी वाले चावल पर निर्यात शुल्क भी घटाकर 10% कर दिया है. यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू होगी.

सफेद चावल पर निर्यात शुल्क घटकर शून्य हुआ

सफेद चावल पर निर्यात शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या निजी व्यापारियों को निर्यात की अनुमति होगी या व्यापार सरकार-से-सरकार सौदों तक ही सीमित रहेगा.

इस महीने की शुरुआत में सरकार ने हजारों किसानों की मदद के लिए बासमती चावल के निर्यात के लिए न्यूनतम मूल्य को हटा दिया था. यह किसान यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका जैसे बड़े विदेशी बाजारों तक पहुंच की कमी के बारे में शिकायत कर रहे थे.

पांच सालों के मुकाबले सबसे अधिक खेती

1 सितम्बर को भारतीय खाद्य निगम में चावल का स्टॉक 32.3 मिलियन मीट्रिक टन था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 38.6% अधिक है. इससे सरकार को चावल निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिल गई. इस सीजन में अच्छी बारिश के कारण ने किसानों ने 41.35 मिलियन हेक्टेयर में चावल की खेती की. यह आंकड़ा पिछले साल के 40.45 मिलियन हेक्टेयर से अधिक है साथ ही पिछले पांच वर्षों के औसत क्षेत्रफल 40.1 मिलियन हेक्टेयर से भी अधिक है.

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