कृषि योजनाओं को अंब्रेला स्कीम में लाने की तैयारी में सरकार, PM-RKVY और कृषोन्नति योजना के विलय पर मंथन

केंद्र सरकार की एक नई पहल पर कृषि और नीति से जुड़े हलकों में चर्चा तेज है. प्रस्ताव का मकसद राज्यों को ज्यादा निर्णय क्षमता देना और योजनाओं को जमीनी जरूरतों के करीब लाना बताया जा रहा है. आने वाले समय में इस कदम से खेती से जुड़ी नीतियों के काम करने के तरीके में बदलाव दिख सकता है.

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केंद्र सरकार खेती से जुड़ी योजनाओं को और असरदार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार ने संसद को बताया है कि वह दो प्रमुख केंद्रीय कृषि योजनाओं को मिलाकर एक नई ‘अंब्रेला स्कीम’ बनाने पर विचार कर रही है. इसका मकसद यह है कि राज्यों को अपनी जरूरतों के हिसाब से योजनाओं को लागू करने में ज्यादा लचीलापन मिल सके और खेती से जुड़े फैसले जमीनी जरूरतों के अनुरूप लिए जा सकें.

किन योजनाओं को मिलाने का प्रस्ताव

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत फिलहाल दो बड़ी केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं चलाई जा रही हैं. पहली है प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और दूसरी है कृषोन्नति योजना. कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि इन दोनों योजनाओं को मिलाकर एक ही छत के नीचे लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इससे योजनाओं का ढांचा आसान होगा और राज्यों को अलग-अलग नियमों में उलझना नहीं पड़ेगा.

16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए तैयारी

सरकार ने बताया कि 16वें वित्त आयोग की अवधि को ध्यान में रखते हुए एक एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिशन ड्राफ्ट तैयार किया गया है. यह ड्राफ्ट कृषि और किसान कल्याण विभाग की सभी केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं को एक अंब्रेला स्कीम के तहत कवर करेगा. फिलहाल इस ड्राफ्ट को इंटर-मिनिस्ट्रियल कंसल्टेशन के लिए भेजा गया है.

राज्यों को क्यों मिलेगा फायदा

सरकार का कहना है कि इस एकीकृत योजना से राज्यों को जरूरत आधारित फैक्टर को चुनने और लागू करने की ज्यादा आजादी मिलेगी. हर राज्य की कृषि से जुड़ी चुनौतियां अलग होती हैं और यह नया ढांचा उन्हें उसी हिसाब से फैसले लेने में मदद करेगा.

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मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दूसरे मंत्रालयों और नीति आयोग से सुझाव मिलने के बाद, जरूरत पड़ी तो ड्राफ्ट में बदलाव किए जाएंगे. फंडिंग का ढांचा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को धन आवंटन के मानदंड और प्रदर्शन आधारित फंडिंग जैसे सभी विवरण EFC नोट के अंतिम रूप और मंजूरी के बाद सामने आएंगे.

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