IDBI बैंक प्राइवेटाइजेशन अंतिम पड़ाव पर, Fairfax बनाम Kotak; किसे मिलेगी 60.72% हिस्सेदारी?
IDBI बैंक में सरकार और LIC की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. Fairfax Financial और Kotak Mahindra Bank ने फाइनल बिड जमा कर दी है, जबकि रिजर्व प्राइस गोपनीय रखी गई है. जानें क्या होगी आगे की प्रक्रिया.
IDBI Stake Sale and Final Bidding: भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक बड़े बदलाव की घड़ी आ चुकी है. IDBI बैंक की हिस्सेदारी खरीदने की रेस अब आखिरी दौर में पहुंच गई है. कनाडा की दिग्गज निवेश कंपनी Fairfax Financial और देश की प्रमुख प्राइवेट बैंक Kotak Mahindra Bank ने IDBI बैंक में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने के लिए अपनी फाइनल बिड जमा कर दी है. दोनों कंपनियां सरकार और LIC के पास मौजूद 60.72 फीसदी हिस्सेदारी को खरीदने की कोशिश में हैं.
सरकार और LIC बेच रहे हैं अपनी हिस्सेदारी
फिलहाल IDBI बैंक में भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कुल हिस्सेदारी 90 फीसदी से ज्यादा है. अब इन दोनों ने मिलकर लगभग 61 फीसदी हिस्सेदारी निजी निवेशकों को बेचने का फैसला किया है. यह सौदा हाल के वर्षों में भारत के सबसे बड़े बैंक प्राइवेटाइजेशन डील्स में से एक माना जा रहा है.
रिजर्व प्राइस गोपनीय!
सरकार ने IDBI बैंक की बिक्री के लिए एक न्यूनतम कीमत (Reserve Price) तय की है, लेकिन इसे पूरी तरह गोपनीय रखा गया है. इस कीमत की जानकारी सिर्फ चुनिंदा सरकारी अधिकारियों को है. बोली लगाने वाली कंपनियों को यह नहीं बताया गया कि सरकार ने बैंक के लिए न्यूनतम मूल्य कितना तय किया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस रिजर्व प्राइस का निर्धारण बैंक के बिजनेस वैल्यू और उसकी फिजिकल एसेट्स के आधार पर किया गया है. हालांकि, IDBI बैंक की इमारतें और जमीन उसकी कुल वैल्यू का केवल करीब 3 फीसदी हिस्सा ही बनाती हैं. इसके अलावा, शेयर बाजार नियामक SEBI के प्राइसिंग नियम भी अंतिम कीमत को प्रभावित कर सकते हैं.
3 साल पुरानी प्रक्रिया, कई बार टली डील
IDBI बैंक की बिक्री की प्रक्रिया की शुरुआत अक्टूबर 2022 में हुई थी. यानी यह डील लगभग 3 साल से चल रही है. इस दौरान सरकार को कई तरह की कानूनी और नियामकीय अड़चनों को दूर करना पड़ा, ताकि संभावित खरीदारों के लिए रास्ता साफ हो सके. पहले उम्मीद थी कि जनवरी की शुरुआत में फाइनल बोलियां आ जाएंगी, लेकिन समय-सीमा को बढ़ाकर 1 फरवरी के बजट के बाद कर दिया गया. सरकार की योजना वित्त वर्ष 2026-27 में 80,000 करोड़ रुपये जुटाने की है, जिसमें IDBI बैंक की बिक्री एक अहम भूमिका निभाने वाली है.
आगे क्या होगा?
फाइनल बिड जीतने के बाद भी खरीदार के लिए प्रक्रिया खत्म नहीं होगी. सबसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) यह जांच करेगा कि नया मालिक बैंक चलाने के लिए उसकी ‘फिट एंड प्रॉपर’ शर्तों पर खरा उतरता है या नहीं. इसके अलावा, कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) भी इस डील की समीक्षा करेगा, ताकि बाजार में कंपटीशन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े. इतना ही नहीं, नया खरीदार IDBI बैंक के छोटे निवेशकों के लिए एक ओपन ऑफर भी लाएगा. फिलहाल बैंक में करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी छोटे शेयरधारकों के पास है.
सरकार और LIC को मिली खास छूट
इस सौदे को आसान बनाने के लिए सरकार और LIC ने अपनी प्रमोटर स्टेटस छोड़ने की अनुमति मांगी थी, जिसे मंजूरी मिल गई है. यह एक तकनीकी जरूरत थी, ताकि स्वामित्व हस्तांतरण में कोई कानूनी अड़चन न आए. साथ ही, सरकार ने SEBI से उस नियम में भी छूट मांगी है, जिसके तहत किसी लिस्टेड कंपनी में कम से कम 25 फीसदी शेयर पब्लिक के पास होना जरूरी होता है. इस छूट से नया मालिक बिना तुरंत शेयर बेचने की मजबूरी के बड़ी हिस्सेदारी अपने पास रख सकेगा.
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