चीन को पीछे छोड़ भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक, 25 फसलों की 184 नई किस्में लॉन्च

भारत ने कृषि के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने का गौरव हासिल किया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया है.

चावल का बड़ा उत्पादक बना भारत Image Credit: @Canva/Money9live

Largest Rice Production: भारत ने कृषि के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार, 4 जनवरी को बताया कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है. भारत ने इस मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया है. देश का कुल चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन रहा.

चीन को पीछे छोड़कर नंबर-1 बना भारत

कृषि मंत्री ने इसे देश के लिए एक अभूतपूर्व सफलता बताया. उन्होंने कहा कि कभी भारत को खाद्यान्न की कमी वाले देश के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज भारत न केवल आत्मनिर्भर है बल्कि दुनिया को भी अनाज उपलब्ध करा रहा है. भारत अब बड़ी मात्रा में चावल का निर्यात कर रहा है और देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है, जिससे खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित है.

25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में लॉन्च

इस मौके पर कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से विकसित 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में भी जारी की. ये बीज अधिक पैदावार देने वाले, बेहतर क्वालिटी वाले और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल हैं. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये बीज जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाए जाएं, ताकि उन्हें सीधा लाभ मिल सके और उनकी आय बढ़े.

1969 से अब तक 7,205 फसल किस्मों को मंजूरी

कृषि मंत्री ने बताया कि 1969 में गजट अधिसूचना की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 7,205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया जा चुका है. इनमें धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, दलहन, तिलहन और रेशा फसलें शामिल हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 2014 के बाद मोदी सरकार के दौरान 3,236 उच्च उपज वाली किस्मों को मंजूरी दी गई है, जो पहले के वर्षों की तुलना में बड़ी उपलब्धि है.

किसानों को होगा सीधा फायदा

मंत्री के अनुसार, नई किस्मों से किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर फसल गुणवत्ता और अच्छी कमाई का मौका मिलेगा. ये बीज कीटों और बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हैं और कम पानी व मुश्किल परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार दे सकते हैं. जारी की गई नई किस्में सूखा, मिट्टी की सैलिनिटी, जलवायु परिवर्तन और अन्य प्राकृतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं. ये बीज प्राकृतिक और जैविक खेती को भी बढ़ावा देंगे. कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों से खास तौर पर दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देने को कहा, ताकि भारत इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन सके.

नई किस्मों में क्या-क्या शामिल

जारी की गई 184 किस्मों में-

  • 122 अनाज फसलें,
  • 6 दलहन,
  • 13 तिलहन,
  • 11 चारा फसलें,
  • 6 गन्ना,
  • 24 कपास (जिसमें 22 बीटी कपास),
  • और जूट व तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल है.

ये सभी किस्में ICAR संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों के सहयोग से विकसित की गई हैं.

बीज उपलब्धता बढ़ाने पर जोर

कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बीज गुणन दर को 1.5 से 2 गुना तक बढ़ाया गया है. राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय बीज निगम किसानों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं.

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