निर्यात पाबंदियां हटते ही भारत का चावल बाजार में जोरदार कमबैक, थाईलैंड और वियतनाम की बिक्री पर दबाव

वैश्विक कृषि बाजार में एक बड़े निर्यातक देश की वापसी ने सप्लाई और कीमतों की दिशा बदल दी है. बेहतर उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी दरों के चलते अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का रुख तेजी से बदला है, जिसका असर दूसरे निर्यातक देशों और उपभोक्ताओं दोनों पर दिख रहा है.

चावल का बड़ा उत्पादक बना भारत Image Credit: @Canva/Money9live

India rice exports surge: सरकार द्वारा निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाए जाने के बाद भारत के चावल कारोबार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक भारत ने एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है. साल भर में चावल के निर्यात में करीब 20 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जिससे न सिर्फ भारत की हिस्सेदारी बढ़ी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर भी असर पड़ा.

चावल निर्यात में 19.4% की बढ़त

सरकारी और उद्योग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, बीते साल भारत का चावल निर्यात 19.4 फीसदी बढ़कर 21.55 मिलियन टन पहुंच गया. यह आंकड़ा 2022 के रिकॉर्ड 22.3 मिलियन टन के काफी करीब है. इससे पहले 2024 में भारत ने 18.05 मिलियन टन चावल का निर्यात किया था. मार्च में निर्यात प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय शिपमेंट्स में तेजी से सुधार देखने को मिला.

रिकॉर्ड उत्पादन और बेहतर आपूर्ति स्थिति के चलते सरकार ने 2022 और 2023 में लगाए गए सभी निर्यात प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाया. इसका सीधा फायदा यह हुआ कि भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया और खरीदारों का रुख दोबारा भारत की ओर मुड़ गया.

नॉन-बासमती और बासमती दोनों में मजबूती

नॉन-बासमती चावल के निर्यात में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला. इसका निर्यात 25 फीसदी बढ़कर 15.15 मिलियन टन पहुंच गया. वहीं बासमती चावल का निर्यात 8 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 6.4 मिलियन टन हो गया. नॉन-बासमती चावल की सप्लाई खास तौर पर बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती जैसे देशों में तेजी से बढ़ी. वहीं ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन ने प्रीमियम बासमती चावल की खरीद बढ़ाई.

वैश्विक कीमतों पर भी पड़ा असर

भारत से बेहतर और सस्ती सप्लाई आने के चलते थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों का निर्यात दबाव में आ गया. एशियाई बाजारों में चावल की कीमतें लगभग एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गईं, जिससे अफ्रीका और अन्य गरीब देशों के उपभोक्ताओं को राहत मिली.

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क्यों मजबूत है भारत की स्थिति

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय चावल अन्य देशों की तुलना में सस्ता और आसानी से उपलब्ध है. कम कीमतों और स्थिर सप्लाई ने भारत को खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस दिलाने में मदद की है. आमतौर पर भारत जितना चावल निर्यात करता है, उतना मिलाकर भी थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे बड़े निर्यातक नहीं कर पाते.

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