भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसान नाराज, 12 फरवरी को देशभर में प्रदर्शन का ऐलान

SKM ने पीटीआई को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि यह अंतरिम ट्रेड समझौता भारतीय कृषि को अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियों के हवाले करने जैसा है. किसान संगठनों ने 12 फरवरी को देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. SKM नेताओं ने कहा कि गांव-गांव में प्रदर्शन होंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाए जाएंगे.

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भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम ट्रेड डील को लेकर देश के किसान संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है. इस समझौते को जहां सरकार व्यापार बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं किसान संगठन इसे भारतीय कृषि के लिए खतरा मान रहे हैं. डील की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद किसान संगठनों ने इसके खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है, जिससे यह मुद्दा अब सियासी और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है.

किसान संगठनों का आरोप, खेती के साथ हुआ समझौता

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), उसके गैर-राजनीतिक गुट और ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) सहित कई संगठनों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील की कड़ी आलोचना की है. SKM ने पीटीआई को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि यह अंतरिम ट्रेड समझौता भारतीय कृषि को अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियों के हवाले करने जैसा है. संगठन ने इसे “पूरी तरह आत्मसमर्पण” करार देते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग भी की है.

संयुक्त बयान के मुताबिक, इस अंतरिम ट्रेड डील के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म या कम करेगा. इसके साथ ही कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर भी आयात शुल्क घटाने की बात कही गई है. वहीं अमेरिका भारत से आने वाले कुछ सामानों पर 18 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा, जिसमें टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर और कुछ मशीनरी उत्पाद शामिल हैं.

12 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन

किसान संगठनों ने 12 फरवरी को देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. SKM नेताओं ने कहा कि गांव-गांव में प्रदर्शन होंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाए जाएंगे. SKM ने 12 फरवरी को प्रस्तावित आम हड़ताल को भी समर्थन देने की घोषणा की है.

कृषि और डेयरी सेक्टर पर असर का डर

AIKS नेता कृष्ण प्रसाद ने पीटीआई के हवाले से कहा कि यह ट्रेड डील कृषि क्षेत्र पर गहरा असर डालेगी. कृष्ण प्रसाद का कहना है कि डील के तहत ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम और सोयाबीन ऑयल जैसे उत्पादों के लिए बाजार खुल जाएगा, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है. उन्होंने दावा किया कि इसका असर डेयरी सेक्टर पर भी पड़ेगा. किसान नेताओं का कहना है कि ये समझौते अमेरिका और यूरोपीय संघ की सुस्त अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाने के लिए किए जा रहे हैं.

सरकार का जवाब: किसानों के हित सुरक्षित

वहीं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बीते दिनों प्रेस कॉन्फ्रेस में किसानों को भरोसा दिलाया है कि उनके हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी “रेड लाइन” नहीं पार की है और अनाज, मसाले, डेयरी, पोल्ट्री, मांस, सब्जियों और फलों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई रियायत नहीं दी गई है. सरकार का कहना है कि किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे.

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