रॉयल एनफील्ड की पैरेंट कंपनी को झटका, Eicher मोटर्स पर 1.64 करोड़ रुपये की ड्यूटी और जुर्माने का आदेश

रॉयल एनफील्ड की पैरेंट कंपनी Eicher मोटर्स को पश्चिम बंगाल के कस्टम ड्यूटी विभाग से 1.64 करोड़ रुपये की ड्यूटी और जुर्माने का आदेश मिला है. यह मामला वर्ष 2020 में आयात किए गए एक शिपमेंट पर प्रेफरेंशियल टैरिफ छूट के दावे से जुड़ा है. कुल राशि में 82 लाख रुपये की कस्टम ड्यूटी ड्यूटी और 82 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है.

Eicher मोटर्स को कस्टम ड्यूटी विभाग से 1.64 करोड़ रुपये की ड्यूटी और जुर्माने का आदेश मिला है. Image Credit:

Eicher Motors: रॉयल एनफील्ड की पैरेंट कंपनी Eicher मोटर्स को कस्टम ड्यूटी डिपार्टमेंट से झटका लगा है. कंपनी को पश्चिम बंगाल के कस्टम ड्यूटी अधिकारियों की ओर से 1.64 करोड़ रुपये की डिमांड और जुर्माने का आदेश मिला है. यह मामला वर्ष 2020 में आयात किए गए एक सामान की खेप से जुड़ा हुआ है. कंपनी पर आरोप है कि उसने आयात के दौरान प्रेफरेंशियल टैरिफ छूट का दावा किया था. अब कंपनी इस आदेश के खिलाफ अपील करने समेत सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है.

क्या है पूरा मामला

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, Eicher मोटर्स के अनुसार यह मामला वर्ष 2020 में आयात किए गए एक शिपमेंट से जुड़ा है. कंपनी ने उस समय प्रेफरेंशियल टैरिफ छूट का लाभ लिया था. कस्टम ड्यूटी विभाग ने इस दावे की जांच के बाद कंपनी पर अतिरिक्त ड्यूटी लगाने का फैसला किया है. इसी के तहत कंपनी को डिमांड नोटिस जारी किया गया है.

कितनी राशि का है आदेश

कंपनी को कुल 1.64 करोड़ रुपये का आदेश मिला है. इसमें 82 लाख रुपये की कस्टम ड्यूटी ड्यूटी शामिल है. इसके अलावा 82 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. यानी ड्यूटी और जुर्माने की राशि बराबर है. यह आदेश कस्टम ड्यूटी अधिनियम 1962 के विभिन्न प्रावधानों के तहत जारी किया गया है.

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी

Eicher मोटर्स ने इस घटनाक्रम की जानकारी रेगुलेटरी फाइलिंग के माध्यम से शेयर बाजार को दी है. कंपनी ने बताया कि उसे यह आदेश 3 जून 2026 को ईमेल के जरिए प्राप्त हुआ. फाइलिंग में कहा गया है कि कंपनी पूरे मामले की समीक्षा कर रही है और आगे की रणनीति पर काम कर रही है.

अपील का विकल्प तलाश रही कंपनी

Eicher मोटर्स ने कहा है कि वह आदेश के खिलाफ अपील दायर करने सहित सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है. कंपनी का मानना है कि मामले की डिटेल जांच और कानूनी सलाह के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा. फिलहाल कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह कब तक अपील दायर करेगी.

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निवेशकों की नजर अगले कदम पर

यह मामला भले ही कंपनी के आकार के मुकाबले छोटी राशि का हो, लेकिन निवेशकों की नजर अब कंपनी की अगली कार्रवाई पर रहेगी. यदि कंपनी अपील करती है तो मामले का अंतिम निपटारा कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा. वहीं कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति पर इस राशि का कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं मानी जा रही है.