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मारुति ने लॉन्च की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, पेट्रोल नहीं एथेनॉल होगा असली फ्यूल, देखें कैसी है Wagon R

मारुति सुजुकी ने भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार Wagon R लॉन्च कर दी है. एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाली यह कार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है. कंपनी का कहना है कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक किसानों, एथेनॉल उत्पादकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचा सकती है.

वैगन आर फ्लेक्स-फ्यूल Image Credit: Maruti Suzuki/youtube.com

Maruti Suzuki Flex Fuel Car: भारत में वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार लॉन्च कर दी है. कंपनी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक Wagon R के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल को बाजार में उतारा है. इस लॉन्च को केवल एक नई कार की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात में कमी और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में लॉन्च हुई यह कार एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने में सक्षम है और सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देने वाली मानी जा रही है.

नॉर्मल कार से कैसे होगी अलग

फ्लेक्स-फ्यूल Wagon R पारंपरिक पेट्रोल कारों की तुलना में ईंधन के मामले में काफी अलग है. जहां सामान्य कारें केवल पेट्रोल या जैसे ईंधन पर चलती हैं, वहीं फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रणों पर चलने में सक्षम होता है. इसके इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को भी आसानी से इस्तेमाल कर सके. एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, इसलिए इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.

क्या होगी कीमत

मारुति सुजुकी ने स्वीकार किया कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की सफलता केवल कार लॉन्च करने से नहीं मिलेगी. इसके लिए पूरे देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी. साथ ही, ग्राहकों में जागरूकता बढ़ाने, अधिक फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च करने और ईंधन व वाहनों की कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की भी जरूरत होगी. carwale की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी कीमत 8.5 लाख रुपये से शुरू हो सकती है.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक

मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि भारत के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और दूसरी, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना. उनके अनुसार, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकती है. उन्होंने कहा कि देश को ऐसे एनर्जी सॉल्यूशन की जरूरत है, जो स्वच्छ, किफायती, बड़े स्तर पर लागू किए जा सकें और भारत की अपनी ताकत पर आधारित हों. फ्लेक्स-फ्यूल वाहन इसी दिशा में एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर सकते हैं.

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे होगा लाभ

कंपनी का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का लाभ केवल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा. एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं. हिसाशी ताकेउची ने कहा कि यह तकनीक कृषि और परिवहन क्षेत्र को आपस में जोड़ती है. इससे किसानों, एथेनॉल उत्पादकों और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है.

मल्टी-पाथवे स्ट्रेटेजी पर काम कर रही है कंपनी

मारुति सुजुकी केवल फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है. कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, सीएनजी, कंप्रेस्ड बायोगैस और हाइड्रोजन जैसे कई वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी काम कर रही है. कंपनी पहले ही 9 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट की घोषणा कर चुकी है, जिनमें से 2 संयंत्र ऑपरेशनल हैं. कंपनी का कहना है कि स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के लिए विभिन्न तकनीकों का मिश्रण ही भविष्य का रास्ता है.

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