माइलेज की वजह से न्यूट्रल में कार चलाना पड़ सकता है भारी, ब्रेक फेल से लेकर हादसे तक का है रिस्क; जानें सही तरीका
माइलेज बढ़ाने के चक्कर में न्यूट्रल में कार चलाना खतरनाक साबित हो सकता है. ऑटो एक्सपर्ट्स के मुताबिक न्यूट्रल में इंजन का कंट्रोल खत्म हो जाता है, जिससे ब्रेक पर ज्यादा दबाव पड़ता है और ब्रेक फेल होने का जोखिम बढ़ जाता है. न्यूट्रल में चलाने से माइलेज घट सकता है और इमरजेंसी में हादसे का खतरा बढ़ता है.
Car mileage tips: माइलेज बढ़ाने के चक्कर में कई ड्राइवर आज भी ढलान, ट्रैफिक या खुले रास्तों पर कार को न्यूट्रल में डालकर चलाते हैं. लेकिन ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आदत न सिर्फ गलत है, बल्कि जानलेवा भी हो सकती है. मॉडर्न कार टेक्नोलॉजी के दौर में न्यूट्रल में गाड़ी चलाना माइलेज बढ़ाने की बजाय खतरे को कई गुना बढ़ा देता है.
न्यूट्रल में इंजन का कंट्रोल खत्म
जब कार न्यूट्रल में होती है, तो इंजन का पहियों पर सीधा कंट्रोल नहीं रहता. खासकर ढलान पर ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है. गाड़ी की पूरी स्पीड सिर्फ ब्रेक के भरोसे कंट्रोल होती है. अगर ब्रेक पर लगातार दबाव पड़ता रहे, तो वे जल्दी गर्म हो सकते हैं और उनकी पकड़ कमजोर हो सकती है. यही वजह है कि न्यूट्रल में गाड़ी चलाने से ब्रेक फेल होने का जोखिम बढ़ जाता है.
गियर में रहने से मिलता है इंजन ब्रेकिंग का फायदा
इसके उलट, जब कार गियर में होती है, तो इंजन खुद एक तरह से ब्रेकिंग का काम करता है. इसे इंजन ब्रेकिंग कहा जाता है. ढलान पर गियर में कार रखने से स्पीड अपने आप कंट्रोल में रहती है और ब्रेक पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता. यही कारण है कि पहाड़ी इलाकों में ड्राइविंग के दौरान न्यूट्रल की बजाय हमेशा गियर में गाड़ी चलाने की सलाह दी जाती है.
मॉडर्न कारों में फ्यूल कट-ऑफ सिस्टम
आज की ज्यादातर मॉडर्न कारों में फ्यूल कट-ऑफ सिस्टम मौजूद होता है. जब कार गियर में होती है और ड्राइवर एक्सिलरेटर नहीं दबाता, तो सिस्टम अपने आप फ्यूल सप्लाई बंद कर देता है. इसका मतलब यह है कि गाड़ी चलने के बावजूद फ्यूल की खपत लगभग शून्य हो जाती है. यानी गियर में गाड़ी छोड़ने पर माइलेज अपने आप बेहतर होता है.
न्यूट्रल में माइलेज बढ़ता नहीं, घटता है
न्यूट्रल में कार चलाने पर इंजन को चालू रखने के लिए लगातार फ्यूल की जरूरत होती है. ऐसे में यह सोच पूरी तरह गलत है कि न्यूट्रल में माइलेज ज्यादा मिलता है. कई मामलों में न्यूट्रल में चलाने से माइलेज कम हो जाता है और सेफ्टी रिस्क अलग से बढ़ जाता है.
इमरजेंसी में बढ़ जाता है खतरा
न्यूट्रल में गाड़ी होने पर अचानक जरूरत पड़ने पर ड्राइवर के पास तुरंत पावर नहीं होती. ओवरटेक, अचानक स्पीड बढ़ाने या किसी इमरजेंसी स्थिति में पहले गियर डालना पड़ता है, और यही कुछ सेकंड का डिले हादसे की वजह बन सकता है.
माइलेज के लिए सही तरीका क्या है
ड्राइविंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर माइलेज चाहिए तो न्यूट्रल में गाड़ी चलाने की बजाय सही गियर, सही RPM और सेफ ड्राइविंग अपनानी चाहिए. स्मूद एक्सिलरेशन, समय पर गियर शिफ्ट और बेवजह ब्रेकिंग से बचना न सिर्फ माइलेज बढ़ाता है, बल्कि आपकी और दूसरों की जान भी सुरक्षित रखता है.
यह भी पढ़ें: Creta-Seltos की बढ़ेगी टेंशन, फरवरी में लॉन्च होगी निसान की नई Tekton SUV; प्रीमियम लुक के साथ मिलेगी ये सुविधा