गेहूं की बुवाई लगभग पूरी… अच्छी है फसल की स्थिति, 73 फीसदी लगाई गईं बायो-फोर्टिफाइड बीज की किस्में
बोए गए क्षेत्र के 73 फीसदी से ज्यादा हिस्से में जलवायु-अनुकूल और बायो-फोर्टिफाइड बीज की किस्में लगाई गई हैं, जो मौसम की किसी भी गड़बड़ी का सामना करने में मदद करेंगी. इस रबी सीजन में अब तक दालों का रकबा 13.34 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच गया है.
भारत में मौजूदा रबी सीजन के लिए गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो गई है और फसल की स्थिति अच्छी दिख रही है. कृषि कमिश्नर पीके सिंह ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी. सिंह ने बताया कि पिछले साल के कुल 32.8 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में, चल रहे 2025-26 रबी (सर्दियों) के मौसम में 29 दिसंबर तक 32.26 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था. सिंह ने PTI को बताया, ‘बिहार के कुछ हिस्सों को छोड़कर, पूरे देश में गेहूं की बुवाई पूरी हो गई है. कुल रकबा पिछले साल के स्तर तक पहुंच सकता है.’
बायो-फोर्टिफाइड बीज की किस्में
उन्होंने बताया कि बोए गए क्षेत्र के 73 फीसदी से ज्यादा हिस्से में जलवायु-अनुकूल और बायो-फोर्टिफाइड बीज की किस्में लगाई गई हैं, जो मौसम की किसी भी गड़बड़ी का सामना करने में मदद करेंगी. अधिकारी ने कहा, ‘समय पर और जल्दी बुवाई के कारण, गेहूं की फसल की संभावनाएं अच्छी दिख रही हैं, और अभी यह बहुत अच्छी स्थिति में है. गेहूं उगाने वाले क्षेत्रों से कोई समस्या सामने नहीं आई है.’
दालों और तिलहन की बुवाई पूरी
उन्होंने आगे कहा कि दालों और तिलहन की बुवाई पूरी हो गई है और दक्षिण भारत में जनवरी के आखिर तक धान की रोपाई जारी रहेगी. डेटा के अनुसार, 2025-26 रबी सीजन में 26 दिसंबर तक धान की बुवाई पिछले साल की इसी अवधि के 1.30 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 1.49 मिलियन हेक्टेयर हो गई है. पिछले रबी सीजन में चावल 4.47 मिलियन हेक्टेयर में बोया गया था.
रेपसीड-सरसों का रकबा बढ़ा
सिंह ने कहा कि चने और रेपसीड-सरसों के तहत रकबा बढ़ा है और अधिकारियों को रबी सीजन के दौरान अच्छी फसल की उम्मीद है. रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर में शुरू होती है और कटाई मार्च से शुरू होती है. गेहूं की अच्छी फसल सरकारी कल्याण कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करेगी और कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद करेगी. दालों और तिलहन का अच्छा उत्पादन आयात पर दबाव कम करेगा.
दालों का रकबा
इस रबी सीजन में अब तक दालों का रकबा 13.34 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच गया है. यह पिछले साल पूरे रबी सीजन में हासिल किए गए कुल 13.40 मिलियन हेक्टेयर के करीब है. वहीं, चना, मसूर और मूंग की बुवाई का रकबा पिछले साल के कुल रकबे से ज्यादा रहा. उड़द की बुवाई पीछे रही. इस सीजन में अब तक मोटे अनाज का रकबा 4.90 मिलियन हेक्टेयर रहा, जिसमें मक्का और ज्वार क्रमशः 2.09 मिलियन हेक्टेयर और 2.03 मिलियन हेक्टेयर में बोए गए.
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