टाटा में आर-पार की लड़ाई! चंद्रशेखरन के पक्ष में किसने डाला वोट, हंगामेदार बोर्ड मीटिंग में क्या-क्या हुआ?

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को गैर-कानूनी बताया है. दूसरी तरफ नोएल टाटा ने होल्डिंग कंपनी को प्राइवेट बनाए रखने के लिए स्ट्रक्चरल विकल्प सुझाए. कुल मिलाकर गुरुवार की बैठक इतनी हंगामेदार रही कि बोर्ड रूम का विवाद एक बार फिर से सड़कों पर आ गया है.

टाटा संस के भीतर विवाद. Image Credit: Money9live

Highlights

  • नोएल टाटा ने बोर्ड के अहम फैसलों को 'गैर-कानूनी' करार दिया.
  • कंपनी को 'अपर लेयर NBFC' फ्रेमवर्क का पालन करने का निर्देश दिया गया था.
  • नोएल ने शापूरजी पलोनजी ग्रुप का एक प्रस्ताव भी पेश किया.

गुरुवार को हुई हंगामेदार बोर्ड मीटिंग के बाद भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप टाटा की होल्डिंग कंपनी और उसके बहुमत शेयरहोल्डर के चेयरमैन के बीच कंट्रोल को लेकर जबरदस्त लड़ाई छिड़ गई. शेयरहोल्डर के चेयरमैन ने कंपनी के बोर्ड के अहम फैसलों को सार्वजनिक रूप से ‘गैर-कानूनी’ करार दिया.

प्रस्ताव के विरोध में एक वोट

यह सार्वजनिक लड़ाई तब शुरू हुई जब 125 अरब डॉलर के ‘सॉल्ट टू सेमीकंडक्टर’ तक का कारोबार करने वाले ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस के बोर्ड ने बहुमत (4-1) से मौजूदा एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने का फैसला किया.

इस फैसले का विरोध टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने किया. टाटा ट्रस्ट्स कई चैरिटेबल ट्रस्ट्स का समूह है, जिनके पास टाटा संस के ज्यादातर शेयर हैं. प्रस्ताव के विरोध में सिर्फ उन्होंने ही वोट दिया.

चंद्रशेखरन की नियुक्ति

यह मीटिंग RBI के उस फैसले के बाद हुई जिसमें उसने टाटा संस की प्राइवेट और अनलिस्टेड बने रहने की अपील को खारिज कर दिया था. RBI ने साफ किया था कि एक निश्चित आकार वाले शैडो बैंकों (जो पब्लिकली हेल्ड होने चाहिए) के लिए बने नियम टाटा संस पर भी लागू होंगे.

मीटिंग के कुछ ही देर बाद, टाटा संस ने एक बयान में कहा कि उसके बोर्ड ने बहुमत से फैसला किया है कि मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर चंद्रा को पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त किया जाएगा.

वीटो पावर का सवाल

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस ने यह भी तय किया था कि वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लागू नियमों का पालन करने के लिए कदम उठाएंगे और RBI, टाटा ट्रस्ट्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेंगे. इसके कुछ ही समय बाद, टाटा ट्रस्ट्स ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह चंद्रा को पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने के बोर्ड के फैसले को गैर-कानूनी मानता है.

एक बयान में कहा गया, ‘मेजॉरिटी शेयरहोल्डर के तौर पर सोच-समझकर लिए गए फैसले के अनुसार, ट्रस्ट का रुख वही बना हुआ है. गुरुवार की बोर्ड मीटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने इस रुख को फिर से दोहराया. बोर्ड मीटिंग में एन. चंद्रशेखरन को फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव, जिसमें चार डायरेक्टर ने पक्ष में और नोएल टाटा ने विपक्ष में वोट दिया, टाटा संस के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ (कंपनी के नियमों) के प्रावधानों के हिसाब से कानूनी तौर पर अमान्य था.’

अहम हो गई है AGM

ट्रस्ट के सार्वजनिक विरोध की वजह से टाटा संस की रुकी हुई और समय से पीछे चल रही सालाना आम बैठक (AGM) अहम हो गई है. चेयरमैन बने रहने के लिए चंद्रा को AGM में डायरेक्टर के तौर पर फिर से नियुक्त होना जरूरी है, जहां मेजॉरिटी के ऑनर टाटा ट्रस्ट्स का दबदबा है.

सर रतन टाटा ट्रस्ट की मुश्किलें

ज्यादातर शेयर रखने वाले दो ट्रस्टों में से एक- सर रतन टाटा ट्रस्ट को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने फैसले लेने से रोक रखा है और इसलिए वह AGM में हिस्सा नहीं ले सकता. नतीजतन, कोरम (जरूरी संख्या) न होने की वजह से बैठक टालनी पड़ी.

इस बैठक ने उस तरीके पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं जिससे टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस पर कंट्रोल रखता है यह एक ऐसा प्रावधान है जिसे ‘एसेंटिंग वोट’ (सहमति वाला वोट) कहा जाता है और यह ट्रस्ट द्वारा नॉमिनेट किए गए डायरेक्टर को मिलता है.

कंपनी के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ के अनुसार, टाटा संस बोर्ड के सभी अहम फैसलों के लिए ट्रस्ट के नॉमिनीज में से बहुमत की सहमति वाला वोट जरूरी है. अगर वोट बराबर (टाई) हो जाते हैं, तो बोर्ड का चेयरमैन ‘कास्टिंग वोट’ (निर्णायक वोट) डाल सकता है.

कौन-कौन हैं नॉमिनी?

अभी टाटा संस बोर्ड में ट्रस्ट के सिर्फ दो नॉमिनी, नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन हैं, और गुरुवार को चर्चा किए गए दो प्रस्तावों पर दोनों ने अलग-अलग दिशा में वोट दिया. इसलिए ‘टाई-ब्रेकर’ का सवाल अहम हो गया है. टाटा संस बोर्ड ने कानूनी राय के आधार पर यह माना है कि टाई की स्थिति में सेशन के चेयरमैन का ‘कास्टिंग वोट’ फैसला करने के लिए गिना जाता है.

नोएल टाटा का वीटो

ईटी के अनुसार, घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले कई लोगों ने बताया कि चूंकि चंद्रा अपनी दोबारा नियुक्ति के मामले में वोट नहीं दे सकते थे, इसलिए हरीश मनवानी ने ‘कास्टिंग वोट’ दिया, जिन्हें सेशन की अध्यक्षता के लिए बुलाया गया था. टाटा ट्रस्ट्स का मानना ​​है कि ट्रस्ट के नॉमिनी नोएल टाटा का नेगेटिव वोट बहुमत के फैसले के खिलाफ वीटो माना जाएगा, जिससे फैसला अमान्य हो जाएगा.

उनका कहना है कि टाटा ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की कानूनी राय पेश की थी, जिसे बोर्ड ने रिकॉर्ड पर नहीं लिया.

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि 12 अगस्त को चंद्रशेखरन का दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश न करने का फैसला उनकी अपनी मर्जी से लिया गया था, सार्वजनिक रूप से बताया गया था और ट्रस्ट्स ने इसे स्वीकार किया था.

लिस्टिंग को लेकर क्या हुआ?

लिस्टिंग के मुद्दे पर, नोएल का रुख यह रहा है कि टाटा संस सार्वजनिक लिस्टिंग का साफ वादा किए बिना भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की जरूरतों को पूरा कर सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि रेगुलेटर की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्ट्रक्चरल विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, साथ ही टाटा संस को प्राइवेट कंपनी बने रहने दिया जा सकता है.

नोएल ने टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों की एक कमेटी या टीम बनाने का भी प्रस्ताव दिया, जो मिलकर आगे के रास्ते पर विचार करे और यह तय करे कि कंपनी RBI के निर्देश का पालन कैसे कर सकती है.

हालांकि, बोर्ड RBI के निर्देश की अलग तरह से व्याख्या कर रहा है. अधिकारियों ने कहा कि टाटा संस के अपर लेयर में NBFC बने रहने के कारण, कंपनी को रेगुलेटर की जरूरतों को पूरा करना होगा और लिस्टिंग की तैयारी करनी होगी. इसलिए, वे लिस्टिंग की जरूरत को पूरा करने के विकल्प के तौर पर स्ट्रक्चरल विकल्पों पर विचार नहीं कर रहे हैं.

नोएल टाटा का बयान

AGM, जो मूल रूप से 18 अगस्त को होनी थी, उसे टाल दिया गया क्योंकि सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट मिलकर कोई प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर पाए. इसे 31 दिसंबर तक आयोजित किया जाना है.

नोएल का बयान इस धारणा को भी चुनौती देता है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 11 सितंबर के फैसले का मतलब जरूरी तौर पर यह है कि टाटा संस को लिस्ट होना ही होगा. उन्होंने कहा कि RBI ने कंपनी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को सरेंडर करने के आवेदन को ठुकरा दिया था.

कंपनी को ‘अपर लेयर NBFC’ फ्रेमवर्क का पालन करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उस बातचीत में लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं था, न ही कोई खास कदम उठाने को कहा गया था और न ही यह कहा गया था कि टाटा संस नियमों का उल्लंघन कर रही है.

बोर्ड का 2024 का फैसला

नोएल ने मार्च 2024 के बोर्ड के उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें लिस्ट न होने का निर्णय लिया गया था. उन्होंने कहा कि इस फैसले को कभी औपचारिक रूप से रद्द या उस पर दोबारा विचार नहीं किया गया. उस रणनीति के तहत, टाटा संस ने बाद में अपने कर्ज़ चुका दिए और लगभग 20,000 करोड़ रुपये के प्रेफरेंस शेयर समय से पहले रिडीम कर लिए. इसके लिए कंपनी ने अपने आंतरिक संसाधनों और ग्रुप की होल्डिंग्स को बेचकर फंड जुटाया था.

ट्रस्ट ने मई और जुलाई 2025 में सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों में अपनी स्थिति को फिर से स्पष्ट किया था और टाटा संस से कहा था कि वह दूसरे विकल्पों पर विचार करे और RBI के साथ बातचीत करे. नोएल ने कहा कि उन प्रस्तावों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ट्रस्टियों ने उन पर दोबारा विचार नहीं किया है.

तीन साल के समय की मांग

नोएल ने RBI के सामने विस्तृत पक्ष रखने, रेगुलेटर के साथ सुनवाई करने और रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) समेत अन्य विकल्पों पर विचार करने का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने संभावित समाधानों के बारे में कानूनी सलाह भी मांगी है और फैसले का आधार समझने के लिए RBI की पूरी फाइल और नोटिंग भी मांगी है.

अगर लिस्टिंग करना आखिरकार जरूरी हो भी जाता है, तो भी नोएल ने RBI से नियमों का पालन करने के लिए कम से कम तीन साल का समय, 11 सितंबर 2026 से सितंबर 2029 तक मांगा है.

शापूरजी पलोनजी ग्रुप का प्रस्ताव

नोएल ने शापूरजी पलोनजी ग्रुप का एक प्रस्ताव भी पेश किया, जिसके तहत स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉर्पोरेशन और साइरस इन्वेस्टमेंट्स के पास मौजूद टाटा संस की हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा कम से कम 25,000 करोड़ रुपये में बेचा जाएगा. इस प्रस्ताव में 18 महीनों में दो किस्तों में हिस्सेदारी खरीदने और NCLT के जरिए टाटा संस द्वारा चुनिंदा तरीके से कैपिटल में कटौती करने की योजना है.

उन्होंने आंतरिक कैश फ्लो, लिस्टेड शेयरों की बिक्री, नए व्यवसायों में निवेशकों को लाने और कुछ व्यवसायों की ‘ऑफर-फ़ॉर-सेल’ लिस्टिंग के जरिए इस खरीद के लिए फंड जुटाने का प्रस्ताव दिया. उन्होंने टाटा संस बोर्ड से NCLT की प्रक्रिया शुरू करने और कंपनी व टाटा ट्रस्ट को SP ग्रुप और बैंकरों के साथ बातचीत जारी रखने की अनुमति देने को कहा.

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